दिल्ली में महिला सुरक्षा को मजबूती: 181 हेल्पलाइन को 112, चाइल्डलाइन और सहायता केंद्रों से जोड़ा गया, सीएम रेखा गुप्ता ने दी जानकारी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ तथा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब महिलाओं के लिए संचालित 181 हेल्पलाइन नंबर को आपातकालीन सेवा 112, चाइल्डलाइन और अन्य वन स्टॉप सहायता केंद्रों के साथ एकीकृत (इंटीग्रेट) कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद संकट की स्थिति में पीड़ित महिलाओं और बच्चों को मदद प्राप्त करने के लिए अलग-अलग नंबरों पर फोन करने या विभिन्न कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को राजधानी में महिला सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नई एकीकृत व्यवस्था की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, उनके सम्मान की रक्षा और उनके समग्र कल्याण के लिए विभिन्न स्तरों पर अपनी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि संकट के समय किसी भी महिला या बच्चे को मदद के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति संकट में होता है, तो उसे तत्काल और सटीक सहायता मिलनी चाहिए। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख हेल्पलाइन नंबरों और सहायता केंद्रों को एक ही मंच पर लाने का निर्णय लिया गया है, ताकि शिकायत दर्ज होने से लेकर समाधान तक की पूरी प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सके।
इस एकीकरण के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह हुआ है कि अब 181 महिला हेल्पलाइन को सीधे 112 नंबर से जोड़ दिया गया है। 112 नंबर देश भर में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) के रूप में कार्य करता है। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसी त्वरित सेवाओं के लिए 112 नंबर का उपयोग किया जाता है। पहले कई बार ऐसा होता था कि महिलाएं हिंसा या छेड़छाड़ की शिकायत 181 पर दर्ज कराती थीं, लेकिन तुरंत पुलिस सहायता के लिए उन्हें 112 या 100 पर अलग से कॉल करना पड़ता था। अब इन दोनों नंबरों के एकीकरण से जैसे ही 181 पर कोई गंभीर शिकायत प्राप्त होगी, उसकी सूचना स्वतः ही 112 कंट्रोल रूम को भी मिल जाएगी, जिससे पुलिस की पीसीआर वैन या संबंधित थाने की टीम बिना किसी देरी के मौके पर पहुंच सकेगी।
इसके अतिरिक्त, 181 हेल्पलाइन को चाइल्डलाइन से भी जोड़ दिया गया है। चाइल्डलाइन मुख्य रूप से बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली एक समर्पित सेवा है। यदि किसी मामले में महिला के साथ-साथ कोई बच्चा भी पीड़ित है, या फिर शिकायत सीधे किसी बच्चे के उत्पीड़न से जुड़ी है, तो अब 181 से प्राप्त जानकारी को तुरंत चाइल्डलाइन के साथ साझा किया जा सकेगा। इससे बाल कल्याण समिति और बाल संरक्षण इकाइयां बिना समय गंवाए सक्रिय हो सकेंगी। बच्चों से जुड़े मामलों में गोपनीयता और संवेदनशीलता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होता है, और यह एकीकरण इस दिशा में बेहद सहायक सिद्ध होगा।
सरकार ने इस व्यवस्था में वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) को भी शामिल किया है। वन स्टॉप सेंटर वे विशेष केंद्र होते हैं जहां हिंसा, घरेलू उत्पीड़न या यौन अपराधों का शिकार हुई महिलाओं को एक ही छत के नीचे चिकित्सा सहायता, कानूनी परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, पुलिस सहायता और अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। 181 हेल्पलाइन को इन सहायता केंद्रों से जोड़ने का सीधा लाभ यह होगा कि कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज होते ही पीड़िता को उसके निकटतम वन स्टॉप सेंटर में भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पीड़िता को अस्पताल, थाने और कोर्ट के बीच अलग-अलग दौड़ लगाने से राहत मिलेगी, क्योंकि सखी केंद्र में सभी जरूरी विभागों के प्रतिनिधि उपलब्ध रहते हैं।
दिल्ली सरकार के इस फैसले से राजधानी में कार्यरत विभिन्न सुरक्षा और कल्याणकारी एजेंसियों के बीच समन्वय (कोऑर्डिनेशन) में भारी सुधार की उम्मीद है। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर कई योजनाएं चलाई गई हैं, लेकिन अक्सर विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में देरी या तालमेल की कमी के कारण पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय इसी कमजोरी को दूर करने की एक ठोस पहल है। एकीकृत डेटाबेस और रियल-टाइम सूचना साझा करने की प्रणाली से न केवल प्रतिक्रिया समय (रिस्पांस टाइम) कम होगा, बल्कि मामलों की निगरानी भी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
सूत्रों के अनुसार, इस नई इंटीग्रेटेड प्रणाली के माध्यम से सरकार को यह डेटा भी मिल सकेगा कि दिल्ली के किन क्षेत्रों में महिलाओं या बच्चों से जुड़ी शिकायतें अधिक आ रही हैं। इस आंकड़े के आधार पर पुलिस बल की तैनाती और जागरूकता अभियानों को उन विशिष्ट इलाकों में केंद्रित किया जा सकेगा जहां वास्तव में इसकी अधिक आवश्यकता है। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लागू किया जाता रहेगा जो नागरिकों को त्वरित न्याय और सुरक्षा प्रदान कर सकें। 181, 112, चाइल्डलाइन और वन स्टॉप सेंटर के इस एकीकरण को दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था के इतिहास में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।

