डिंडौरी की प्रसूता से 108 एंबुलेंस कर्मियों ने मांगे 2000 रुपये, पैसे न देने पर बस में नवजात को लेकर जाने को मजबूर हुई महिला; वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

मंडला/डिंडौरी। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले की एक प्रसूता महिला के साथ 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर बदसलूकी और पैसे मांगने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 108 एंबुलेंस के कर्मचारियों ने महिला को उसके घर तक छोड़ने के बदले में दो हजार रुपये की मांग की। जब प्रसूता और उसके परिजनों ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो एंबुलेंस कर्मियों ने उन्हें गाड़ी में बैठाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद नवजात शिशु और उसकी मां को मंडला से डिंडौरी तक की दूरी सार्वजनिक बस में तय करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना का एक वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
वांदे भारत न्यूज़ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला मंडला और डिंडौरी जिले से जुड़ा हुआ है। डिंडौरी जिले की रहने वाली एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए मंडला के जिला अस्पताल लाया गया था, जहां उसने एक नवजात शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद जब महिला की हालत स्थिर हुई और डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी, तो उसे वापस अपने घर डिंडौरी जाना था। ऐसे में सरकारी व्यवस्था के तहत 108 एंबुलेंस सेवा का सहारा लिया गया, ताकि नवजात और प्रसूता को सुरक्षित तरीके से उनके घर तक पहुंचाया जा सके। लेकिन आरोप है कि एंबुलेंस कर्मचारियों ने इस निशुल्क सेवा के बदले में अवैध वसूली करने का प्रयास किया।
प्रसूता महिला ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि एंबुलेंस कर्मियों ने घर तक छोड़ने के लिए उनसे दो हजार रुपये की मांग की। महिला और उसके परिवार वालों ने बताया कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने कर्मचारियों से अनुरोध किया कि वे उन्हें बिना पैसे के ही घर छोड़ दें, क्योंकि यह एक सरकारी एंबुलेंस सेवा है। हालांकि, कर्मचारियों ने उनकी एक न सुनी और रुपये न देने पर एंबुलेंस में बैठाने से मना कर दिया। इसके बाद एक नवजात बच्चे और उसकी कमजोर मां को मंडला से डिंडौरी तक की यात्रा एक आम सार्वजनिक बस में करनी पड़ी। बस में भीड़भाड़ और धक्का-मुक्की के बीच एक नवजात और प्रसूता महिला की सेहत को कितना खतरा रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस घटना का वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें प्रसूता महिला अपनी व्यथा सुनाते हुए दिख रही है। वीडियो वायरल होते ही लोगों में 108 एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष देखने को मिला। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि 108 एंबुलेंस सेवा गंभीर रूप से बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटनाग्रस्त लोगों को समय पर और मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन इस तरह की घटनाएं इस महत्वपूर्ण सेवा की विश्वसनीयता पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करती हैं।
वीडियो संज्ञान में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि उस दिन ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे और किसने महिला से पैसे मांगे। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अभी तक किसी भी अधिकारी ने औपचारिक रूप से इस मामले पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जांच प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि की गई है।
गौरतलब है कि 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से निशुल्क होती है और इसके लिए मरीज या उसके तीमारदारों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना नियमों का खुला उल्लंघन माना जाता है। मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए इस सेवा को काफी मजबूत किया है, लेकिन इस तरह के मामले बार-बार सामने आते रहते हैं, जो सिस्टम में मौजूद खामियों को उजागर करते हैं। डिंडौरी और मंडला जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पहले से ही एक चुनौती रहती है, ऐसे में एंबुलेंस कर्मियों द्वारा की गई यह कथित मनमानी प्रशासन के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई होती है। वहीं, पीड़ित प्रसूता महिला और उसके नवजात शिशु की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। वांदे भारत न्यूज़ इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए है और जांच के परिणाम आने पर इसे अपडेट किया जाएगा।

