दमोह: दादी सास का खेत में किया अंतिम संस्कार, ग्रामीणों ने युवक को पीटा; गर्भवती पत्नी ने वीडियो बनाकर पुलिस से मांगी सुरक्षा

मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पटेरा क्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील और विवादित मामला सामने आया है। पटेरा के बेला गांव की रहने वाली एक गर्भवती महिला संगीता लोधी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने और अपने पति की जान को खतरा बताया है। संगीता लोधी ने इस वायरल वीडियो के माध्यम से पुलिस प्रशासन से तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई है। यह पूरा विवाद 6 अक्टूबर को एक बुजुर्ग महिला के निधन और उसके बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर शुरू हुआ था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगीता लोधी की दादी सास का 6 अक्टूबर को निधन हो गया था। इसके बाद परिवार के सामने शव के अंतिम संस्कार की समस्या खड़ी हो गई।
बेला गांव में अंतिम संस्कार को लेकर जो विवाद पैदा हुआ, उसने बाद में हिंसक रूप ले लिया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब परिवार ने दादी सास का अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था शुरू की, तो गांव के कुछ लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार रोकने का प्रयास किया, जिसके कारण परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गांव वालों के विरोध और अवरोध के चलते परिवार किसी आम श्मशान घाट या सार्वजनिक स्थान पर अंतिम संस्कार नहीं कर सका। अंततः परिजनों को मजबूरन अपनी दादी सास का अंतिम संस्कार अपने ही खेत में करना पड़ा। खेत में अंतिम संस्कार किए जाने की बात जब गांव में फैली, तो इसने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया और माहौल तेजी से तनावपूर्ण हो गया।
अंतिम संस्कार को लेकर हुए इस विवाद के बीच ग्रामीणों का एक समूह संगीता लोधी के पति के खिलाफ आक्रामक हो गया। आरोप है कि गांव के लोगों ने संगीता के पति को पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट की। इस हमले में युवक को चोटें आईं। ग्रामीणों द्वारा किए गए इस कथित हमले और मारपीट की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। परिवार का आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण के उनके साथ ऐसा सुलूक किया गया और उन्हें अपमानित किया गया।
इस पूरी घटनाक्रम के बाद संगीता लोधी, जो वर्तमान में गर्भवती हैं, ने खुद को और अपने पति को असुरक्षित महसूस किया। जब उन्हें लगा कि गांव में उनका रहना अब खतरे से खाली नहीं है और कोई भी ग्रामीण उनकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है, तो उन्होंने न्याय और सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। संगीता ने अपना एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने रोते हुए अपनी आपबीती बयां की। इस वीडियो में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पति को ग्रामीणों ने पीटा है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
संगीता लोधी ने अपने वायरल वीडियो में सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह एक गर्भवती महिला हैं और उनके पति पर गांव वालों ने हमला किया है। ऐसे में उनके परिवार की जान को खतरा है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि उन्हें और उनके पति को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे बिना किसी डर के अपना जीवन व्यतीत कर सकें। संगीता का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वायरल होने के बाद इस वीडियो ने स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है और लोग इस मामले पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
दमोह जिले के पटेरा क्षेत्र के बेला गांव में घटी यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक तनाव और अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर होने वाले विवादों को उजागर करती है। किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार में बाधा डालना और फिर उसके परिजनों के साथ मारपीट करना कानूनन एक गंभीर अपराध माना जाता है। हालांकि, इस मामले में अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है कि क्या संगीता लोधी या उनके पति ने औपचारिक रूप से थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने इस वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लिया है या नहीं।
ग्रामीणों की ओर से अंतिम संस्कार का विरोध क्यों किया गया, इसके पीछे के सटीक कारणों की भी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। क्या यह किसी पुरानी रंजिश का नतीजा था, या कोई जमीनी विवाद था, या फिर कोई अन्य सामाजिक कारण था, इस बारे में फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से की गई किसी भी अपुष्ट बात की पुष्टि नहीं करता है। सभी तथ्य केवल उपलब्ध जानकारी और संगीता लोधी द्वारा जारी किए गए वीडियो के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।
फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स यह मांग कर रहे हैं कि पुलिस जल्द से जल्द इस मामले की निष्पक्ष जांच करे। यदि ग्रामीणों द्वारा मारपीट और अंतिम संस्कार में बाधा डालने की बात सही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, एक गर्भवती महिला और उसके परिवार को तत्काल आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। दमोह जिला प्रशासन और पटेरा पुलिस से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करेंगे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में उचित कदम उठाएंगे। आगे की जांच और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही इस पूरे विवाद की सच्ची तस्वीर सामने आ सकेगी।

