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Fri, Oct 9, 2026Updated 9:23 AM IST
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दुर्ग में कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन: भैंस के सामने बीन बजाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की चुप्पी का विरोध, 10 स्थानों पर मनाया काला दिवस

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गुरुवार को एक अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग ग्रामीण के नेतृत्व में पूरे जिले में ‘काला दिवस’ मनाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कथित निष्क्रियता और मुख्य चुनाव आयुक्त की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए भैंस के सामने बीन बजाने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन जिले के कुल 9 ब्लॉकों में 10 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग ग्रामीण द्वारा आयोजित इस व्यापक विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से उनके पद से इस्तीफा देने की मांग करना था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्तमान में चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहा है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मुद्दों पर लगातार चुप्पी साधे हुए हैं, जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया के लिए ठीक नहीं है। इसी चुप्पी का विरोध जताने के लिए कार्यकर्ताओं ने भैंस के सामने बीन बजाने का रास्ता अपनाया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि चुनाव आयोग की मौजूदा स्थिति उस कहावत की तरह हो गई है जहां सुनने वाले को कोई फर्क नहीं पड़ता।

गुरुवार को दुर्ग ग्रामीण जिले के 9 ब्लॉकों में फैले 10 स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। इन सभी स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने काले कपड़े या काली पट्टियां पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर पकड़ रखे थे, जिन पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले नारे लिखे हुए थे। जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग ग्रामीण के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में स्थानीय पदाधिकारियों से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी 10 स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुआ, लेकिन कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवाल बेहद तीखे थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त की चुप्पी के विरोध के अलावा, कांग्रेस ने अपने शीर्ष नेताओं के खिलाफ हाल ही में की गई कार्रवाई का भी खुलकर विरोध किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए चुनाव आयोग का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। यदि चुनाव आयोग का शीर्ष नेतृत्व ही संवेदनशील राजनीतिक मामलों पर मौन धारण कर लेता है, तो आम मतदाताओं और विपक्षी दलों का संवैधानिक संस्थाओं से विश्वास उठने का खतरा पैदा हो जाता है।

भैंस के सामने बीन बजाने वाला यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जनता और विपक्ष के सवालों का सीधा जवाब नहीं देते, तब तक उनका यह प्रतीकात्मक विरोध यही संदेश देता रहेगा कि उनकी चुप्पी लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। उन्होंने मांग की कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त निष्पक्ष रूप से काम करने में असमर्थ हैं, तो उन्हें नैतिक आधार पर अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए।

दुर्ग ग्रामीण में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की आक्रामक राजनीतिक रणनीति को भी स्पष्ट किया है। जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग ग्रामीण ने संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 9 ब्लॉकों के 10 स्थानों पर कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित किया। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह काला दिवस केवल एक शुरुआत है और यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर और भी बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

चुनाव आयोग की भूमिका भारतीय लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में किसी प्रमुख विपक्षी दल द्वारा सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और उनकी चुप्पी पर सवाल उठाना एक गंभीर राजनीतिक घटनाक्रम है। हालांकि, इस मामले में अभी तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि चुनाव आयोग कांग्रेस के इन आरोपों पर भविष्य में कोई स्पष्टीकरण देगा या नहीं।

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर हुई कार्रवाई के विरोध ने इस प्रदर्शन को एक व्यापक राजनीतिक आयाम दे दिया है। कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टियों पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को ऐसी परिस्थितियों में एक मजबूत ढाल का काम करना चाहिए, न कि मूकदर्शक बनना चाहिए। दुर्ग जिले में गुरुवार को मनाए गए इस काला दिवस ने स्थानीय राजनीति में गर्माहट ला दी है और अब देखना यह होगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आती हैं।