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DUSU चुनाव में 40.46% मतदान, दिल्ली हाईकोर्ट ने जीत जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में आयोजित छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए शुक्रवार को वोटिंग सत्र संपन्न हुआ। प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस वोटिंग सत्र में कुल 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के अंतिम नतीजे 19 सितंबर को घोषित किए जाने हैं। इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्र संघ चुनाव के नतीजों के […]
DUSU चुनाव में 40.46% मतदान, दिल्ली हाईकोर्ट ने जीत जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया
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दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में आयोजित छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए शुक्रवार को वोटिंग सत्र संपन्न हुआ। प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस वोटिंग सत्र में कुल 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के अंतिम नतीजे 19 सितंबर को घोषित किए जाने हैं। इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्र संघ चुनाव के नतीजों के बाद किसी भी तरह के विक्ट्री जुलूस या सड़कों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस और हॉस्टल क्षेत्रों में भी पूर्णतः लागू होगा।

कोर्ट की बेंच, जो चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की है, ने चुनाव नियमों के उल्लंघन को लेकर सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया और पूछा कि नुकसान की भरपाई क्यों न उम्मीदवारों से करवाई जाए।

वोटिंग की पृष्ठभूमि और प्रमुख उम्मीदवार

यह चुनाव देश का सबसे बड़ा स्टूडेंट इलेक्शन माना जाता है। इस चुनाव में करीब 2.75 लाख छात्र वोटिंग के लिए एलिजिबल हैं। प्रमुख दलों के अनुसार, एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए यश डबास और उपाध्यक्ष पद के लिए ईशू मौर्या को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद के लिए विजय शंकर मीणा और उपाध्यक्ष पद के लिए वीर चतरथ को उम्मीदवार बनाया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में दो प्रमुख कैंपस हैं — साउथ कैंपस और नॉर्थ कैंपस, जो लगभग 15 किमी की दूरी पर स्थित हैं। दोनों कैंपस मिलाकर DU में कुल 91 कॉलेज आते हैं, लेकिन DUSU के चुनावों में DU के सभी कॉलेज वोट नहीं कर सकते। DUSU में सिर्फ 52 कॉलेज और फैकल्टी ही सीधे तौर पर वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। सेंट स्टीफंस, लेडी श्री राम और जीसस एंड मैरी जैसे कुछ बड़े और प्रसिद्ध कॉलेज भी DUSU का हिस्सा नहीं हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा फैसला और चेतावनी

दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्र संघ चुनाव के नतीजे आने के बाद किसी भी तरह के विक्ट्री जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह रोक सड़कों के साथ-साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस और हॉस्टल में भी लागू रहेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी विक्ट्री जुलूस को रोकने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की होगी। आदेश का उल्लंघन करने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और इसे कोर्ट की अवमानना भी माना जाएगा।

कोर्ट ने DU, दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और पुराने कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के लिए हर संभव कदम उठाने का निर्देश दिया। एमसीडी समित सहित अन्य अधिकारियों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए भी कार्रवाई करने को कहा गया।

हिंसा पर कोर्ट की नाराजगी और पूर्वी चेतावनी

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों के दौरान हो रही हिंसा पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र को अपराधियों का समाज नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने इस मामले में डीयू प्रशासन, दिल्ली पुलिस और सरकार से कल तक रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उठाए गए कदमों से वो संतुष्ट नहीं हुआ, तो वोटों की गिनती और नतीजों के ऐलान पर रोक लगा दी जाएगी।

कोर्ट ने ये टिप्पणी DUSU चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा और गुंडागर्दी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की। पहले ही बुधवार रात नॉर्थ कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प हुई थी। एबीवीपी और एनएसयूआई ने एक-दूसरे से जुड़े लोगों पर अलग-अलग जगहों पर हमला करने के आरोप लगाए।

DUSU के प्रसिद्ध पूर्व अध्यक्ष

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के कई प्रसिद्ध नेता इस संस्थान से जुड़े हुए हैं। अरुण जेटली 1974 में DUSU अध्यक्ष रहे और बाद में केंद्र सरकार में देश के वित्त एवं रक्षा मंत्री बने। विजय गोयल 1977 में DUSU अध्यक्ष रहे और केंद्रीय राज्य मंत्री बने। अजय माकन 1985 में DUSU अध्यक्ष रहे और आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्री बने। अलका लांबा 1995 में DUSU अध्यक्ष रहीं और बाद में दिल्ली विधानसभा में विधायक तथा महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

इस चुनाव का महत्व और देशभर में प्रतिक्रिया

DUSU चुनाव प्रत्येक वर्ष पूरे देश का ध्यान आकर्षित करते हैं, क्योंकि यह भारत का सबसे बड़ा छात्र संघ चुनाव है। जितने छात्र इस चुनाव में भाग लेते हैं, उतना ही राजनीतिक दलों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोर्चा साबित होता है। कई प्रसिद्ध राजनीतिक नेता अपने करियर की शुरुआत DUSU से ही किया है, जिससे यह छात्र राजनीति का एक महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। इस बार भी वोटिंग के नतीजे और उसके बाद की राजनीतिक गतिविधियों पर पूरा ध्यान टिकाया जा रहा है।

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