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HAL ने भारतीय वायुसेना को सौंपे तेजस और अंकुर ट्रेनर, पवनहंस को ध्रुव NG हेलिकॉप्टर

हैदराबाद: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने शुक्रवार को बेंगलुरु में एक विशेष हैंडओवर समारोह का आयोजन किया, जिसमें भारतीय वायु सेना को फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर सौंपे गए। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में भारतीय वायु सेना को दो लाइट […]
HAL ने भारतीय वायुसेना को सौंपे तेजस और अंकुर ट्रेनर, पवनहंस को ध्रुव NG हेलिकॉप्टर
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हैदराबाद: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने शुक्रवार को बेंगलुरु में एक विशेष हैंडओवर समारोह का आयोजन किया, जिसमें भारतीय वायु सेना को फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर सौंपे गए। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में भारतीय वायु सेना को दो लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट टू-सीटर ट्रेनर तेजस और बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 (HTT-40) सौंपे गए। इसके साथ ही पवनहंस लिमिटेड को चार नेक्स्ट जेनरेशन ध्रुव हेलिकॉप्टर भी हस्तांतरित किए गए। यह समारोह भारतीय वायु सेना की प्रशिक्षण क्षमता को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

वायुसेना को दिए गए HTT-40 का नाम ‘अंकुर’ रखा गया है। यह विमान भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती पायलट ट्रेनिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने 70 HTT-40 विमानों का कॉन्ट्रैक्ट वायुसेना को 2023 में दिया था। समझौते के मुताबिक अंकुर की डिलीवरी सितंबर 2025 से शुरू होनी थी, हालांकि इसमें करीब एक साल की देरी हुई। मौजूदा हैंडओवर इसी कॉन्ट्रैक्ट के तहत डिलीवरी की शुरुआत है। अंकुर विमान का 57 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बनाया गया है, जो स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। इस उच्च स्थानीयकरण दर से देश के औद्योगिक क्षमता में वृद्धि को दर्शाया गया है।

अंकुर के वायुसेना में शामिल होने से पायलट्स को ट्रेनिंग के लिए स्वदेशी विमानों के ज्यादा विकल्प मिल गए हैं। यह पहला स्वदेशी विमान नहीं है जिससे भारतीय पायलट ट्रेनिंग लेंगे। इससे पहले भी वायुसेना स्वदेशी HAL HPT-32 ‘दीपक’ जैसे ट्रेनर विमानों का इस्तेमाल कर चुकी है। अंकुर की डिलीवरी से वायुसेना की प्रशिक्षण क्षमता में वृद्धि हुई है और देश के स्वदेशी उड्डयन उद्योग को मजबूती मिली है। इससे पायलटों को आधुनिक सुविधाओं वाले देशे बने विमानों से परिचित होने का अवसर मिलता है और उनकी तकनीकी क्षमताओं में विकास होगा।

HAL ने भारतीय वायुसेना को दो एलसीए फुल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (FOC) ट्रेनर विमान भी सौंप दिए। इससे FOC कॉन्ट्रैक्ट के तहत चार ट्विन-सीटर विमानों की डिलीवरी पूरी हो गई। इन विमानों में बेहतर रडार, ऑटोपायलट, फ्यूल सिस्टम, सुरक्षित कम्युनिकेशन के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग प्रोब जैसी उन्नत सुविधाएं हैं। ये विमान पायलटों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और वायु सेना के प्रशिक्षण कार्यक्रम को और प्रभावी बनाएंगे। एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग प्रोब की सुविधा से विमानों की रेंज और ऑपरेशनल क्षमता में वृद्धि होगी।

पवनहंस को चार ध्रुव एनजी हेलिकॉप्टर भी HAL द्वारा सौंपे गए। यह पहली बार होगा जब सिविल सर्टिफाइड ध्रुव एनजी को सिविल एविएशन क्षेत्र में शामिल किया गया। यह HAL द्वारा डिजाइन और निर्मित 5.5 टन का हल्का ट्विन-इंजन मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर है। ध्रुव एनजी का सिविल एविएशन क्षेत्र में प्रवेश एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है क्योंकि इससे नागरिक उड्डयन क्षेत्र में इसके उपयोग की संभावनाएं खुली हैं। पवनहंस को ये हेलिकॉप्टर मिलने से उनके बेड़े में वृद्धि हुई है और वे विभिन्न मिशनों को निभा सकेंगे। इसके साथ ही यह HAL की विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।

बेंगलुरु में आयोजित इस समारोह ने भारतीय वायु सेना की प्रशिक्षण श्रृंखला को और मजबूत किया है। तेजस और अंकुर ट्रेनर विमानों की डिलीवरी से पायलटों को स्वदेशी विमानों से ट्रेनिंग लेने के अवसर मिले हैं। ध्रुव एनजी हेलिकॉप्टर का सिविल एविएशन क्षेत्र में शामिल होना HAL की विविध क्षमताओं को दर्शाता है। इन हस्तांतरणों से भारतीय वायु सेना की तैयारी में वृद्धि हुई है और देश के स्वदेशी उड्डयन उद्योग को मजबूती मिली है। HAL की इस पहल से भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन में और वृद्धि होने की संभावना है और यह देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है।

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