Wed, 28 Oct 202612:20 PM
Wed, Oct 28, 2026Updated 12:20 PM IST
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एसईसीएल गेवरा खदान में महासंग्राम: सीएमडी का दौरा और दूसरी तरफ भू-विस्थापितों ने ठप किया कामकाज, अजय जायसवाल के तीखे तेवर से गरमाई सियासत!

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कोरबा:
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की मेगा प्रोजेक्ट गेवरा खदान इस वक्त भूकम्प जैसी हलचल से गुजर रही है। खदान के अंदर हालात विस्फोटक हो चुके हैं। एक तरफ प्रबंधन के बड़े साहब यानी सीएमडी (CMD) का हाई-प्रोफाइल दौरा चल रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ जमीन गंवाने वाले भू-विस्थापित और मजदूर अजय जायसवाल की अगुवाई में आर-पार की लड़ाई के मूड में उतर आए। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जायसवाल के नेतृत्व में आक्रोशित भीड़ ने खदान के पहिए पूरी तरह जाम कर दिए और कामकाज अनिश्चितकाल के लिए ठप करा दिया है।
​सीएमडी का दौरा सिर्फ “दिखावा”, जमीन देने वाले मजदूर हो रहे हैं तबाह!
​खदान में सुलग रही आग के बीच जब एसईसीएल के सीएमडी मुआयने के लिए पहुंचे, तो मजदूरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस विरोध की कमान संभाल रहे अजय जायसवाल ने प्रबंधन पर तीखा हमला बोला।
​जायसवाल ने दो टूक शब्दों में हल्ला बोलते हुए कहा, “एक तरफ हमारी जमीन पर कोयला निकालकर तिजोरियां भरी जा रही हैं और दूसरी तरफ स्थानीय मजदूरों व भू-विस्थापितों का बेरहमी से मानसिक व आर्थिक शोषण किया जा रहा है। सीएमडी का यह दौरा सिर्फ एक ढकोसला और कागजी खानापूर्ति है। इन्हें मजदूरों के पसीने और आंसुओं से कोई मतलब नहीं है!”
​इन सुलगती वजहों से भड़की मजदूरों की आग
​गेवरा खदान में चल रही आउटसोर्सिंग कंपनियों (खासकर PNC और अन्य) के अंडर काम करने वाले मजदूरों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। पिछले 6 महीनों से चल रहे सुलगते आंदोलन के पीछे मुख्य वजहें ये रहीं:
​वेतन पर ग्रहण: पसीना बहाने वाले मजदूरों को पिछले दो महीनों से एक फूटी कौड़ी (वेतन) नहीं मिली है, जिससे उनके घरों के चूल्हे तक बुझने की कगार पर हैं।
​पेमेंट स्लिप का खेल: नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों को उनकी सैलरी की रसीद (Salary Slip) तक नहीं दी जा रही है, ताकि धांधली छिपाई जा सके।
​मौत के मुहाने पर काम: कार्यस्थल पर सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। बिना सेफ्टी गियर के मजदूरों को खतरनाक हालातों में झोंका जा रहा है।
​जब तक मांगें नहीं, तब तक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगी गाड़ियां!
​मौके पर मौजूद सैकड़ों भू-विस्थापितों के तेवर बता रहे हैं कि इस बार समझौता आसान नहीं होगा। आंदोलनकारियों ने खुली चेतावनी दी है कि जब तक रुका हुआ वेतन खातों में नहीं आता, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते और विस्थापन के वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान का चक्काजाम यूं ही जारी रहेगा और उत्पादन ठप रहेगा।
​फिलहाल, गेवरा खदान में तनाव का माहौल चरम पर है और प्रबंधन बैकफुट पर नजर आ रहा है। देखना यह होगा कि मजदूरों के इस आक्रामक तेवर के आगे प्रबंधन झुकता है या यह गतिरोध और भी भयानक रूप लेता है।