गाजियाबाद के एक हाईराइस टावर में 29 अप्रैल को आग लग गई। देखते ही देखते 7 मंजिलों में आग फैल गई। आग लगने का कारण एक फ्लैट में AC ब्लास्ट होना बताया जा रहा है। इससे पहले 28 अप्रैल को नोएडा में भी एक घर में AC का मेन स्विच ऑफ नहीं था, जिससे ब्लास्ट हो ग
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आखिर गर्मी बढ़ने से AC ब्लास्ट क्यों होने लगते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: गाजियाबाद में AC फटने का मामला क्या है?
जवाब: गाजियाबाद की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में 29 अप्रैल को आग लगी, देखते ही देखते 12वीं मंजिल तक पहुंच गई…
- बिल्डिंग के टावर-डी से सुबह करीब 8:50 बजे अचानक एक ब्लास्ट की आवाज आई। आस-पास के लोगों ने जाकर देखा तो 9वें फ्लोर के एक फ्लैट में आग लग गई थी।
- कुछ ही देर में आग ने इमारत की 7 मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों ने 5-6 किलोमीटर दूर से धुएं का गुबार देखा।
- शुरुआती जांच में आग लगने की दो थ्योरी समझ आ रही हैं- एक शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी, जिसमें घरों के AC ब्लास्ट हो गए। दूसरी AC का कंप्रेसर ब्लास्ट होने से ही आग लगी।
- सोसायटी के जिस टावर में आग लगी, उसके पास वाले टावर में सीनियर जर्नलिस्ट अजीत अंजुम का भी घर था। उन्होंने 10:50 बजे X पर आग का वीडियो शेयर किया।
- अजीत के मुताबिक, शुरुआती घंटों में महज 2 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची, जिनके पास इमारत के करीब जाकर आग बुझाने के लिए सीढ़ियां नहीं थीं। इस वजह से सामने की बिल्डिंग के लोग ही पाइप्स और बाल्टियों से आग बुझाने लगे।
- गाजियाबाद के चीफ फायर ऑफिसर राहुल कुमार के मुताबिक, करीब 5-7 फ्लैट आग की चपेट में आए, जिनमें से कुछ खाली पड़े थे। बाकी फ्लैट्स में फंसे लोगों को दरवाजा तोड़कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना में किसी की जान नहीं गई।
- कुमार के मुताबिक, हादसे की वजह जानने के लिए AC का कंप्रेसर फटने और शॉर्ट सर्किट होने के एंगल पर जांच की जा रही है।

फायर ब्रिगेड के पहुंचने तक सामने की बिल्डिंग के मौजूद लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की।
सवाल-2: आखिर ज्यादा गर्मी में AC फट क्यों जाता है?
जवाब: सबसे पहले समझिए कि AC काम कैसे करता है…

अब समझते हैं कि गर्मी में AC के सिस्टम में क्या गड़बड़ी होती है, जिससे यह ब्लास्ट हो जाता है…
1. कंप्रेसर का ओवरहीट होना
गर्मियों में बाहर का तापमान 45°C+ होता है। AC का कंप्रेसर आउटडोर यूनिट में होने के कारण पहले से ही गर्म हवा में काम करता है। लगातार बिना रुके चलने से कंप्रेसर ज्यादा गर्म हो जाता है। दबाव इतना बढ़ जाता है कि वह फट जाता है।
2. रेफ्रिजरेंट गैस का रिसाव
AC में R-22 या R-410A जैसी गैस होती है। यह कमरे की गर्मी को बाहर ले जाने का काम करती है, जिससे कमरा ठंडा हो जाए। यह गैस ज्वलनशील होती है, यानी हल्की सी चिंगारी से भी आग पकड़ सकती है। अगर पाइप या वॉल्व में लीकेज हो जिससे गैस बाहर आ रही है, तो आग लग सकती है।
3. शॉर्ट सर्किट और खराब वायरिंग
खराब वायरिंग और एक ही ओवरलोडेड सॉकेट का इस्तेमाल शॉर्ट सर्किट की सबसे बड़ी वजह है। गर्मियों में घर के सभी AC, पंखे, फ्रिज एक साथ चलते हैं, जिससे बिजली का बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट हो सकता है।
4. पुराने AC का समय पर मैनटेनेंस न होना
बिना सर्विसिंग के AC के फिल्टर बंद हो जाते हैं। AC के अंदर एक ब्लोअर फैन होता है, जो फिल्टर के जरिए हवा खींचता है। धूल के कारण अगर यह बंद हो जाए, तो फैन को हवा खींचने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है। इससे मोटर गर्म हो जाती है और लाग लग सकती है।
जब हवा फैन तक आती ही नहीं तो रेफ्रिजरेंट गैस उसे ठंडी नहीं कर पाती। कंप्रेसर को लगता है कि कमरा अभी भी गर्म है और वह भी ज्यादा ताकत से काम करने लगता है। इससे भी कंप्रेसर फटने का खतरा होता है।
5. हाईराइज बिल्डिंग में आग का तेजी से फैलना
हाईराइज बिल्डिंग में आग नीचे से ऊपर तेजी से जाती है क्योंकि गर्म हवा हमेशा ऊपर उठती है। इसे स्टैक इफेक्ट कहा जाता है। अगर बिल्डिंग में लिफ्ट शाफ्ट खुला हो, AC डक्ट्स जुड़े हों, वेंटिलेशन सिस्टम कमजोर हो या फायर डोर सही से बंद न हों, तो पूरा ढांचा चिमनी की तरह काम करने लगता है।
सवाल-3: क्या इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी है?
जवाब: पिछले कुछ महीनों में AC ब्लास्ट के कई मामले सामने आ चुके हैं।
फरीदाबाद, 8 सितंबर 2025: AC ब्लास्ट से परिवार के 3 लोग, पालतू कुत्ते की मौत
- ग्रीन फील्ड कॉलोनी की एक 4 मंजिला इमारत के पहले फ्लोर पर AC फटा, जिसकी आग दूसरे फ्लोर तक पहुंची।
- आग की वजह से दूसरे फ्लोर पर रहने वाले एक ही परिवार के 3 लोगों और एक पालतू कुत्ते की दम घुटने से मौत हो गई।
- जांच में सामने आया कि एसी के कंप्रेसर पर लोड बढ़ने की वजह से हादसा हुआ।

फरीदाबाद हादसे के चलते फ्लैट के भीतर मौजूद फर्नीचर और कपड़े जलकर राख हो गए।
तेलंगाना, 25 जनवरी: हॉस्टल में AC ब्लास्ट, 6 लड़कियां बेहोश हुई
- मेडचल-मलयगिरी जिले के नाइन एजुकेशन हॉस्टल में शॉर्ट सर्किट के कारण AC ब्लास्ट हुआ।
- आग की वजह से हॉस्टल में रहने वाली 6 लड़कियां बेहोश हो गईं और 15 अन्य लड़कियों को सांस लेने में परेशानी हुई।

तेलंगाना हादसे में घायल 6 लड़कियों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। ये लड़कियां AC ब्लास्ट के बाद लगी आग के चलते बेहोश हो गई थीं।
विजयवाड़ा, 25 अप्रैल: शॉर्ट सर्किट से AC का कंप्रेसर फटा
- पंडित नेहरू बस स्टैंड पर शॉर्ट सर्किट की वजह से AC ब्लास्ट हुआ और आग लग गई।
- आग पर कुछ ही समय में काबू पा लिया गया और जान-माल की कोई हानि नहीं हुई।
नोएडा, 28 अप्रैल: मेन स्विच बंद न करने से AC ब्लास्ट हुआ
- नोएडा के सैक्टर-75 की मैक्सब्लिस वाइटहाउस सोसाइटी के 24वें फ्लोर पर मौजूद एक फ्लैट में AC ब्लास्ट के बाद आग लग गई।
- जांच में सामने आया कि परिवार के सदस्य ने AC को रिमोट से तो बंद किया लेकिन मेन स्विच से बंद करना भूल गए। इससे AC में पावर सप्लाई जारी रही। वोल्टेज बढ़ने से AC गर्म हुआ और ब्लास्ट हो गया। हादसे में किसी की जान नहीं गई।
सवाल-4: गर्मी बढ़ने पर अचानक AC में ब्लास्ट न हो, इसके लिए क्या सावधानी जरूरी?
जवाब: गर्मी में अचानक AC ब्लास्ट न हो इसके लिए कुछ सावधानियां रखी जा सकती हैं…
- हर 2-3 घंटे में 15 मिनट के लिए AC बंद कर दें, ताकि कंप्रेसर ओवरहीट न हो। अगर पूरी रात AC चलाते हैं तो 15 मिनट के ब्रेक के लिए अलार्म सेट कर दें।
- AC का तापमान जितना कम रखेंगे, कंप्रेसर पर उतना ज्यादा दबाव बनेगा। ओवरहीट होने से आग लगने का खतरा बढ़ेगा। इसलिए AC का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखें।
- AC को कभी एक्सटेंशन लाइन या मल्टी-प्लग से न जोड़े। इसके लिए अलग बिजली लाइन ही रखें, ताकि सॉकेट ओवरलोड न हो।
- अगर कोई पुरानी या खुली वायरिंग है तो उसे तुरंत बंद कराएं। ढीले सॉकेट न रहने दें। AC का समय पर मेंटेनेंस कराएं।
- AC की आउटडोर यूनिट को छाया में रखें। हो सके तो इसके ऊपर शेड लगवाए, ताकि धूप में इसका तापमान और न बढ़े।
- किसी भी तरह की आवाज या बदबू आ रही हो तो AC तुरंत बंद करें। ठीक न हो तो रिपेयर करने वाले को बुलाएं।
- मिनिएचर सर्किट ब्रेकर यानी MCB जरूर लगाए। यह AC को ओवरलोड से बचाता है। अगर अचानक करंट सप्लाई आए तो MCB ट्रिप होकर बिजली सप्लाई काट देता है, जिससे शॉर्ट सर्किट या ओवर हीटिंग का खतरा टल जाता है।
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रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास
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