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Sat, Oct 10, 2026Updated 10:38 AM IST
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गरीयाबंद: मैथ्स का काम नहीं करने पर राज्यपाल से सम्मानित शिक्षक ने छात्रा को जड़े थप्पड़, विवाद बढ़ने पर मांगी माफी

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छत्तीसगढ़ के गरीयाबंद जिले से शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल में पदस्थ शिक्षक द्वारा एक छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट करने का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि शिक्षक ने छात्रा को इसलिए थप्पड़ जड़ दिए क्योंकि उसने गणित (मैथ्स) का दिया गया कार्य पूरा नहीं किया था। यह घटना तब और अधिक चर्चा का विषय बन गई जब यह जानकारी सामने आई कि उक्त शिक्षक राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं। इस मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे क्षेत्र में शिक्षकों द्वारा दी जाने वाली सजा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला गरीयाबंद जिले के एक स्कूल का है। स्कूल में पदस्थ शिक्षक भागचंद चतुर्वेदी पर आरोप लगा है कि उन्होंने एक छात्रा के साथ मारपीट की। बताया जा रहा है कि छात्रा को गणित विषय का कोई कार्य दिया गया था, जिसे वह पूरा नहीं कर सकी। कार्य पूरा न होने से नाराज होकर शिक्षक भागचंद चतुर्वेदी ने कथित तौर पर गुस्से में आकर छात्रा को थप्पड़ जड़ दिए। शिक्षक द्वारा एक बच्ची के साथ इस प्रकार की शारीरिक दंड की कार्रवाई से स्कूल परिसर और इलाके में हड़कंप मच गया। बच्चों के साथ स्कूलों में होने वाले ऐसे व्यवहार को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त हो गया है।

इस विवाद के सामने आने और मामले के तूल पकड़ने के बाद शिक्षक भागचंद चतुर्वेदी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। शिक्षक ने स्पष्ट रूप से यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने गुस्से में आकर छात्रा को मारा था। उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद जताते हुए कहा कि वे गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख सके, जिसके कारण उनसे यह गलती हुई। हालांकि, एक शिक्षक का इस तरह खुलेआम गुस्से में आकर किसी बच्ची को थप्पड़ मारना और बाद में इसे स्वीकार करना, शिक्षण पेशे की गरिमा और बाल संरक्षण कानूनों के तहत एक गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।

इस मामले को और अधिक गंभीर बनाता है यह तथ्य कि आरोपी शिक्षक भागचंद चतुर्वेदी कोई साधारण शिक्षक नहीं हैं, बल्कि वे राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं। राज्यपाल जैसे उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सम्मानित किया जाना एक शिक्षक के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। ऐसे में एक सम्मानित शिक्षक द्वारा छात्रा के साथ इस तरह का व्यवहार समाज और शिक्षा विभाग दोनों के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा करता है। लोगों का कहना है कि जो शिक्षक राज्यपाल से सम्मान प्राप्त कर चुका हो, उससे ऐसी संयमित और आदर्श व्यवहार की उम्मीद की जाती है, न कि बच्चों पर हाथ उठाने की।

वहीं, दूसरी ओर पीड़ित छात्रा के परिवार वालों का दर्द भी इस घटना से साफ झलक रहा है। छात्रा के परिजनों ने बताया कि इस घटना के बाद से बच्ची सहमी हुई है और उसकी दिनचर्या पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। परिवार वालों का कहना है कि शिक्षक द्वारा थप्पड़ मारे जाने के बाद से बच्ची ठीक से खाना-पीना नहीं कर रही है। उसे सदमा लगा है और वह डरी हुई अवस्था में है। बच्ची के खाने-पीने में आई इस कमी से साफ है कि शारीरिक दंड का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करता है। छोटे बच्चों के मन पर ऐसी घटनाओं का असर लंबे समय तक रह सकता है, जिसकी भरपाई करना बेहद मुश्किल होता है।

इस घटना के बाद स्कूल में भी कुछ बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, स्कूल में बच्चे झाड़ू लगाते हुए देखे गए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बच्चों से झाड़ू लगवाना किसी सजा के तौर पर किया जा रहा है या यह स्कूल की नियमित स्वच्छता गतिविधियों का हिस्सा है। लेकिन इस पूरे विवाद के बीच बच्चों से इस तरह का काम करवाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत बच्चों से शारीरिक श्रम करवाने और उन्हें शारीरिक दंड देने पर सख्त प्रतिबंध है। ऐसे में स्कूल प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।

ज्ञात हो कि भारत में बच्चों को स्कूलों में शारीरिक दंड देने पर कानूनन रोक है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग समय-समय पर इस तरह के मामलों पर सख्त दिशानिर्देश जारी करते रहे हैं। इसके बावजूद ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों से इस प्रकार की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

गरीयाबंद के इस मामले में अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस घटना पर क्या ठोस कार्रवाई करता है। क्या केवल शिक्षक द्वारा माफी मांग लेने से यह मामला शांत हो जाएगा, या फिर विभाग की ओर से किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी? फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों के प्रशिक्षण और उनके व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है।