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Sat, Oct 10, 2026Updated 12:51 PM IST
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ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान की बड़ी कार्रवाई: फार्मर रजिस्ट्री और सीएम हेल्पलाइन में लापरवाही पर 19 पटवारी निलंबित

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में शासकीय योजनाओं और राजस्व विभाग से जुड़े कार्यों में हीलाहवाली करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिला कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के सख्त निर्देशों और स्पष्ट मार्गदर्शन के बाद जिला प्रशासन के अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए कुल 19 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से किसानों की फार्मर रजिस्ट्री और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निराकरण में बरती गई गंभीर लापरवाही के कारण की गई है। प्रशासनिक स्तर पर एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पटवारियों के निलंबन को जिले में राजस्व अमले के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्वालियर जिला प्रशासन द्वारा पिछले कुछ समय से शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और राजस्व संबंधी कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही थी। इस समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई पटवारी अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं। विशेष रूप से किसानों से जुड़ी फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं और देरी पाई गई। राज्य सरकार द्वारा किसानों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में पहुंचाने और उन्हें सरकारी सुविधाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाया गया है। इसके बावजूद, निलंबित किए गए इन 19 पटवारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में इस कार्य को प्राथमिकता नहीं दी, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

फार्मर रजिस्ट्री के अलावा, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर प्राप्त होने वाली जनशिकायतों के निराकरण में भी इन पटवारियों की भूमिका संतोषजनक नहीं पाई गई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन राज्य सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपनी समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाते हैं। इस प्रणाली में राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, समीक्षा के दौरान पाया गया कि इन पटवारियों ने हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को लंबित रखा या उनका निराकरण बिना उचित जांच के ही कर दिया। इस तरह की कार्यप्रणाली से न केवल प्रशासन की छवि खराब हो रही थी, बल्कि आम जनता और किसानों में असंतोष भी बढ़ रहा था।

जब यह मामला कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता या हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने अनुभागों में ऐसे कर्मचारियों की पहचान करें जो अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी और तत्परता से नहीं कर रहे हैं। कलेक्टर के इन सख्त निर्देशों के परिपालन में एसडीएम ने जांच प्रक्रिया पूरी की और दोषी पाए गए 19 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई ग्वालियर जिले में राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाइयों में से एक है। एक साथ 19 पटवारियों का निलंबन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जिला प्रशासन अब कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। राजस्व विभाग का ढांचा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रशासन की रीढ़ माना जाता है। पटवारी इस व्यवस्था की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, क्योंकि भू-अभिलेखों के रखरखाव से लेकर किसानों की फसल रिपोर्टिंग और विभिन्न प्रमाण पत्रों के सत्यापन तक का कार्य उन्हीं के माध्यम से संपन्न होता है। यदि इस स्तर पर लापरवाही बरती जाए, तो इसका सीधा असर जनता पर पड़ता है।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों और पटवारियों में भी हड़कंप मना हुआ है। माना जा रहा है कि इस बड़े एक्शन के बाद अन्य पटवारी और राजस्व कर्मचारी अपने कार्यों को लेकर अधिक सतर्क और जिम्मेदार हो जाएंगे। फार्मर रजिस्ट्री और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसे संवेदनशील मामलों में अब तेजी से काम होने की उम्मीद जताई जा रही है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन की मंशा के अनुरूप काम न करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। वंदे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट में प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से यह पुष्टि हुई है कि निलंबित पटवारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी प्रस्तावित है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। हालांकि, विभागीय जांच के विस्तृत आदेशों की औपचारिक घोषणा अभी प्रशासन द्वारा की जानी शेष है।