भारत में गर्मी का मतलब अब सिर्फ दोपहर की झुलसाने वाली धूप नहीं रह गया है। अब सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती। रात 11 बजे भी दीवारें गर्म रहती हैं, पंखे गर्म हवा फेंकते हैं और कूलर-एसी भी कई बार बेअसर लगते हैं।
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वैज्ञानिक इसे ‘वार्म नाइट्स’ कहते हैं। इन गर्म रातों का असर सीधे दिल, किडनी और नींद पर पड़ रहा है। देश के 734 जिलों में से 57% जिले अब हाई या बहुत हाई हीट रिस्क जोन में आ चुके हैं, जहां करीब 76% आबादी रहती है।
तो आखिर ये वार्म नाइट्स क्या हैं, क्यों बढ़ रही हैं और इससे बचने का रास्ता क्या है; भास्कर एक्सप्लेनर में 6 जरूरी सवालों के जवाब…
सवाल-1: ‘वार्म नाइट’ क्या है और यह पहले से अलग क्यों है?
जवाब: भारतीय मौसम विभाग, यानी IMD के मुताबिक जब रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाए, तो उसे ‘वार्म नाइट’ कहते हैं। अगर यह फासला इससे भी ज्यादा हो, तो मामला ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में आ जाता है।
पहले हीट वेव का मतलब था- दिन में 40°C पार करने वाली लू। उससे बचने के तरीके थे- छांव, पानी, घर के अंदर रहो। लेकिन वार्म नाइट में घर भी दुश्मन बन जाता है।
दिनभर कंक्रीट की दीवारें और सीमेंट की छत धूप को अपने अंदर सोखती रहती हैं। जब सूरज ढलता है, तो वही गर्मी धीरे-धीरे बाहर निकलने लगती है। ठीक उस वक्त जब आप सोने की कोशिश कर रहे होते हैं।
नतीजा? रात 11 बजे भी दीवार को हाथ लगाओ, तो वह गर्म मिलती है और पंखे आग उगलते हैं। पिछले कुछ सालों में वार्म नाइट्स तेजी से बढ़ी हैं…
- 2025 में पब्लिश साइंस डायरेक्ट की स्टडी बताती है कि 1980 से 2020 के बीच भारत में वार्म नाइट्स की संख्या हर दशक में 8 दिन तक बढ़ गई है, खासकर उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में।
- काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर, यानी CEEW 2025 के मुताबिक, बड़े शहरों में यह तेजी से बढ़ रही है। पिछले एक दशक में देश के 70% जिलों में गर्मियों में 5 से ज्यादा वार्म नाइट्स बढ़ी हैं, जबकि गर्म दिनों में ऐसी बढ़ोतरी सिर्फ 28% जिलों में हुई है।
- 2012 से 2022 के बीच गर्मियों में बहुत गर्म रातों की संख्या तेजी से बढ़ी हैं। मुंबई में 15, बेंगलुरु में 11, भोपाल में 7, जयपुर में 7 और दिल्ली में 6 रातें ज्यादा गर्म रही हैं।
- 2025 ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। फरवरी 2025 में ही 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रात का तापमान सामान्य से कम से कम 1°C ऊपर दर्ज हुआ। इनमें से 22 राज्यों में तापमान 3°C से 5°C तक अधिक था। पिछले एक दशक में भारतीय शहरों में वार्म नाइट्स की संख्या 32% बढ़ चुकी है।

सवाल-2: बढ़ती वार्म नाइट्स के पीछे असली वजह क्या है? जवाबः रात की बढ़ती गर्मी के लिए 3 बड़ी वजहें जिम्मेदार हैं…
60% जिम्मेदारी कंक्रीट की इमारतें और सड़कें
- मिट्टी और घास पर पड़ी धूप तुरंत रिफ्लेक्ट हो जाती है। लेकिन कंक्रीट और सीमेंट उसे घंटों तक भीतर बंद रखते हैं।
- शहर में ऊंची इमारतें हवा के रास्ते को रोक देती हैं, जिससे गर्मी गलियों के बीच ही कैद होकर रह जाती है। इसे ‘अर्बन हीट आइलैंड’ कहते हैं।
- भोपाल-कटक जैसे तेजी से बढ़ रहे शहरों में रात के समय यह प्रभाव हर दशक में 0.13 से 0.18 डिग्री तक बढ़ रहा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कानपुर, गुरुग्राम और लखनऊ जैसे शहर इसकी सबसे बड़ी चपेट में हैं।
हवा में बढ़ती नमी और उमस
- CEEW के मुताबिक उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पिछले 10 साल में नमी का स्तर 10% बढ़ा है।
- दिल्ली, जयपुर और कानपुर जैसे शहर, जो कभी सूखी गर्मी के लिए जाने जाते थे, अब उमस की चपेट में हैं। यहां नमी 40% से बढ़कर 50% तक पहुंच गई है।
- नमी बढ़ने से पसीना नहीं सूखता, जिससे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है। इससे असल तापमान से 3 से 5°C ज्यादा गर्मी लगती है।
ग्लोबल वार्मिंग और पेड़ों की कमी
- 2015 पेरिस समझौते में तय हुआ था कि हम धरती के तापमान को 1.5°C से ज्यादा नहीं बढ़ने देंगे।
- करीब 250 साल पहले जब दुनिया में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां, गाड़ियां और कोयले का धुआं नहीं था। तब धरती का जो तापमान था, वैज्ञानिक उसे ‘बेसलाइन’ या ‘नॉर्मल’ मानते हैं।
- लेकिन 2026 में धरती नॉर्मल से 1.44 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म हो चुकी है। कनाडा की सरकारी एजेंसी ECCC की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 इस खतरे के निशान के बेहद करीब होगा।
- 2026 लगातार 13वां ऐसा साल होगा, जब दुनिया का तापमान नॉर्मल से 1 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होगा। हालांकि 1.5 डिग्री सेल्सियस पार करने की संभावना सिर्फ 12% है।
- साल के अंत में अल-नीनो की वापसी की संभावना है। इसका सीधा मतलब है कि 2027 में गर्मी के ऐसे रिकॉर्ड टूटेंगे, जो हमने पिछले 100 सालों में नहीं देखे।

2015 में पेरिस जलवायु सम्मेलन हुआ था। भारत 2 अक्टूबर 2016 को समझौते में शामिल हुआ और दुनिया का 62वां देश बना।
सवाल-3: रातें गर्म होने से सेहत पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: CEEW यानी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायर्नमेंट एंड वाटर के मुताबिक, रात की गर्मी एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करती है…
शरीर की कूलिंग प्रणाली ठप हो जाती है: मानव शरीर का तापमान 37°C होता है। रात में बाहर ठंडक होती है, तो शरीर को ठीक होने का वक्त मिलता है। लेकिन रात का तापमान 25°C से नीचे न गिरे, तो शरीर खुद को रिकवर नहीं कर पाता। इसे ‘हीट स्ट्रेस’ कहते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2100 तक अत्यधिक गर्म रातों से मौत का खतरा लगभग छह गुना बढ़ जाएगा।
दिल पर सीधा हमला: जब शरीर रात में ठंडा नहीं होता, तो दिल को शरीर का तापमान कम करने के लिए लगातार अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और नींद के दौरान ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ या हार्ट फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
नींद की बर्बादी: जब रात का तापमान 27°C से ऊपर जाता है, तो नींद के सबसे जरूरी हिस्से- REM स्लीप और डीप स्लीप बर्बाद होने लगते हैं। दिन की भीषण गर्मी के बाद गर्म रातें नींद की फिजियोलॉजी को सीधे बाधित करती हैं, जिससे स्वास्थ्य के गंभीर खतरे पैदा होते हैं। याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन… ये सब गर्म रातों की लंबी कीमत हैं।
सवाल-4: वार्म नाइट्स से आर्थिक असर क्या होगा?
जवाब: गर्म रातें सेहत के साथ-साथ हमारे और देश के आर्थिक विकास में दिक्कतें खड़ी कर सकती हैं…
- एसी की बढ़ती डिमांड: कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर यानी IECC के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 1.5 करोड़ नए एसी खरीदे जा रहे हैं। अगले 10 सालों में भारत में लोग 13 से 15 करोड़ नए AC खरीदेंगे, जो बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में सबसे ज्यादा है।

भारत में कुल बिजली खपत में घरेलू सेक्टर की हिस्सेदारी 2012-13 के 22% से बढ़कर 2022-23 में 25% हो गई।
- बिजली संकट: कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी का अनुमान है कि 2035 तक भारत की 30% बिजली सिर्फ एसी चलाने में खर्च होगी। सिर्फ AC की वजह से बिजली की मांग 2030 तक 120 गीगावाट और 2035 तक 180 गीगावाट तक बढ़ जाएगी। इससे गर्मियों में बड़े शहरों में लंबी बिजली कटौती हो सकती है, क्योंकि ग्रिड इतना लोड नहीं झेल पाएंगे।
- जीडीपी में 4.5% तक की गिरावट: CEEW की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस मजदूर को अगले दिन कड़ी धूप में काम करना है, अगर वह रात को गर्म कमरे में सो नहीं पाएगा, तो उसकी प्रोडक्टिविटी घटेगी। इससे 2030 तक भारत की जीडीपी को 4.5% का नुकसान हो सकता है और काम के घंटे कम होंगे।
सवाल-5: क्या वार्म नाइट्स से कूलर-एसी हमें बचा लेंगे?
जवाब: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारत में सिर्फ 24% घरों में एसी या कूलर है। शहरों में यह 40% है, गांवों में महज 15%।
पश्चिम बंगाल और बिहार में तो सिर्फ 5% घरों में एसी हैं। ये वही राज्य हैं जहां गर्मी सबसे ज्यादा सितम ढाती है।
लेकिन एसी भी कोई जादू की छड़ी नहीं है। एसी कमरे को ठंडा करता है, लेकिन बाहर की हवा को और गर्म। यानी एसी चलाने से हम खुद तो बच जाते हैं, पर पूरे शहर की गर्मी बढ़ती जाती है।

राजस्थान के कोटा में 19 अप्रैल को दिन का तापमान 42°C पहुंच गया, जबकि बिहार के बक्सर में 20 अप्रैल को गर्मी के कारण 10 स्टूडेंट स्कूल में बेहोश हो गए।
सवाल-6: वार्म नाइट्स से निपटने के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब: CEEW ने अपनी रिपोर्ट में भारत सरकार से सिफारिश की है कि कुछ जरूरी सुझाव अपने हीट एक्शन प्लान में शामिल करें…
1. ज्यादातर प्लान सिर्फ दिन की लू पर फोकस करते हैं। जबकि अब गर्म रातों, भारी उमस को भी प्लान में शामिल करना होगा। राज्यों को मौसम विभाग के पूर्वानुमान और आंकड़ों का इस्तेमाल कर बिजली की मांग और बीमारियों से लड़ने की तैयारी करनी चाहिए।
2. साल 2024 से लू को स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड यानी SDMF के तहत फंडिंग के लिए शामिल किया गया है। राज्य इस पैसे का इस्तेमाल कर कूलिंग शेल्टर और अलर्ट सिस्टम बना सकते हैं। इसके अलावा शहरों में पेड़-पौधे या हरियाली बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं।
3. जिन राज्यों के आधे से ज्यादा जिले हीट की वजह से हाई-रिस्क पर हैं, उन इलाकों को ‘राज्य-विशिष्ट आपदा’ घोषित करनी चाहिए। ऐसा करने से SDRF का अतिरिक्त 10% फंड अनलॉक हो जाता है, जिसका इस्तेमाल गर्मी से होने वाली मौतों, खेती के नुकसान और इमरजेंसी ट्रेनिंग के लिए किया जा सकता है।
4. जैसे ही तापमान एक तय सीमा को पार करे, मजदूरों के खातों में तुरंत पैसा पहुंच जाए ताकि उन्हें भीषण गर्मी में काम न करना पड़े। नगालैंड और अहमदाबाद (SEWA) में यह प्रयोग सफल हो चुका हैं।
5. अगर भारत अगले 10 साल में AC की एनर्जी एफिशिएंसी को दोगुना कर दे, तो उपभोक्ताओं के 2.2 लाख करोड़ रुपए बच सकते हैं। इससे न केवल लोगों के बिजली बिल कम होंगे, बल्कि पावर ग्रिड पर दबाव भी कम होगा और गंभीर पावर कट की स्थिति से बचा जा सकेगा।
वार्म नाइट्स के दौरान आपको ORS, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ पीते रहना चाहिए, जिससे शरीर की कूलिंग प्रणाली को मदद मिले। रात को सोने से पहले छत और दीवार पर पानी छिड़कें, इससे कंक्रीट की संग्रहीत गर्मी जल्दी निकलती है। सूती और हल्के कपड़े पहनें। बुजुर्गों और बच्चों पर खास ध्यान दें।
यह स्टोरी दैनिक भास्कर में फेलोशिप कर रहे आकाश कुमार ने लिखी है।
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