Sat, 10 Oct 202612:02 PM
Sat, Oct 10, 2026Updated 12:02 PM IST
होम › मध्य प्रदेश

इंदौर: भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट मामले में टीआई समेत 7 पुलिसकर्मी सस्पेंड, विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों ने देर रात घेरा एरोड्रम थाना

WhatsAppFacebookX

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तनाव का एक गंभीर मामला सामने आया है। इंदौर के विधानसभा क्षेत्र-3 में एक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ता और एक आम नागरिक के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किए जाने की घटना ने देर रात बड़ा रूप ले लिया। इस पूरे मामले को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों में भारी आक्रोश देखा गया। नाराज समर्थकों ने देर रात बड़ी संख्या में एरोड्रम थाने का घेराव किया और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर तत्काल कार्रवाई करते हुए एरोड्रम थाना प्रभारी (टीआई) सहित कुल सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद इंदौर के विधानसभा क्षेत्र-3 के अंतर्गत आने वाले एरोड्रम थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि पुलिस ने एक भाजपा कार्यकर्ता और एक आम नागरिक के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया। पुलिस की इस कथित ज्यादती की खबर जैसे ही इलाके में फैली, भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त हो गया। पीड़ितों के साथ हुई इस घटना से नाराज विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक और भाजपा के अन्य कार्यकर्ता देर रात ही बड़ी तादाद में एरोड्रम थाने पहुंच गए।

देर रात थाने में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे समर्थकों ने थाने का घेराव कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखे नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों की मुख्य मांग थी कि मारपीट और अभद्र व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। देर रात थाने के बाहर जमा हुई भीड़ और बढ़ते तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके और किसी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। समर्थकों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों द्वारा किए गए इस विरोध प्रदर्शन और थाना घेराव ने इंदौर के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन ने बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाए। एरोड्रम थाने में हुई इस घटना की जिम्मेदारी तय करते हुए थाना प्रभारी (टीआई) सहित कुल सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन सात पुलिसकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई ने देर रात थाने पर डटे समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं को कुछ हद तक संतुष्ट किया, हालांकि पूरी घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब इंदौर में पुलिस और आम नागरिकों या राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच इस तरह का टकराव देखने को मिला हो। हालांकि, इस बार मामला इसलिए ज्यादा सुर्खियों में रहा क्योंकि इसमें एक विधायक के समर्थकों ने सीधे तौर पर थाने का घेराव किया और प्रशासन को तुरंत सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने जैसा बड़ा कदम उठाना पड़ा। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा करना है, लेकिन अगर पुलिसकर्मी ही आम लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और अभद्रता पर उतर आएंगे, तो आम जनता अपनी शिकायत लेकर किसके पास जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने इंदौर के पुलिस प्रशासन के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। एक ओर जहां पुलिसकर्मियों पर आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट के गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर देर रात थाने का घेराव करने की घटना ने कानून व्यवस्था के प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए हैं। निलंबित किए गए सात पुलिसकर्मियों में थाना प्रभारी का शामिल होना यह दर्शाता है कि उच्च अधिकारियों ने इस मामले में निचले स्तर पर हुई चूक को बेहद गंभीरता से लिया है। फिलहाल, निलंबन की कार्रवाई के बाद थाने पर जमा भीड़ छंट गई है, लेकिन इस घटना की गूंज इंदौर की राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में अभी कुछ समय तक बनी रहने की संभावना है।

इस मामले में अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पुलिस और भाजपा कार्यकर्ता तथा आम नागरिक के बीच विवाद की शुरुआत कैसे हुई और किन परिस्थितियों में मारपीट की नौबत आई। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। इंदौर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा इस मामले की गहनता से समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले में सभी पक्षों की जानकारी को संतुलित रूप से प्रस्तुत करता है और आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं करता है।