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Mon, Oct 12, 2026Updated 10:55 AM IST
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INDIA ब्लॉक आज कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक निकालेगा मार्च, 2 किमी पैदल चलकर CEC के इस्तीफे की मांग करेगा विपक्ष

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नई दिल्ली। INDIA ब्लॉक आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के सांसद कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालेंगे। यह मार्च लगभग दो किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें विपक्षी सांसद पैदल चलकर चुनाव आयोग और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग करेंगे। स्रोत सामग्री के अनुसार, यह विपक्ष द्वारा महज छह दिनों के भीतर किया जाने वाला पांचवां प्रदर्शन है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर कितने आक्रामक रुख में हैं।

राहुल गांधी इस पूरे मार्च का नेतृत्व करेंगे और उनके साथ INDIA ब्लॉक के अन्य घटक दलों के सांसद भी शामिल रहेंगे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन ‘SIR’ के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध स्रोत सामग्री में ‘SIR’ शब्द के पूर्ण विस्तार या इसके विशिष्ट संदर्भ को लेकर कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन यह तय है कि यही वह मुख्य मुद्दा है जिसके आधार पर विपक्ष ने आज के मार्च की रूपरेखा तैयार की है। विपक्षी दलों का मानना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और इसी कारण वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं।

मार्च की शुरुआत दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक और ऐतिहासिक केंद्र कनॉट प्लेस से होगी। यहां से विपक्षी सांसदों का जत्था पैदल ही लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय करते हुए देश की सर्वोच्च न्यायालय, यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगा। सुप्रीम कोर्ट को गंतव्य के रूप में चुनना इस बात का प्रतीक है कि विपक्ष अपने इस विरोध को संवैधानिक और न्यायिक दायरे में रखते हुए अपनी बात रखना चाहता है। दो किलोमीटर का यह पैदल मार्च विपक्षी एकता और उनके आक्रोश को प्रदर्शित करने का एक जरिया माना जा रहा है।

इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह है कि यह पिछले छह दिनों में विपक्ष द्वारा किया जाने वाला लगातार पांचवां प्रदर्शन है। इतने कम समय में पांच बार सड़कों पर उतरना यह दर्शाता है कि INDIA ब्लॉक के घटक दल इस मुद्दे पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं हैं। विपक्षी खेमे में इसे लेकर भारी रोष व्याप्त है और वे लगातार सरकार तथा चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। छह दिन में पांच प्रदर्शन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की चिंता और आक्रामकता का एक बड़ा उदाहरण है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जो इस मार्च की अगुवाई कर रहे हैं, हाल के दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में आज का यह मार्च विपक्षी एकता की एक और तस्वीर पेश करेगा, क्योंकि इसमें केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि INDIA ब्लॉक में शामिल अन्य दलों के सांसद भी कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। सभी विपक्षी सांसदों की मौजूदगी यह संदेश देने के लिए पर्याप्त है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन की साझा मांग है।

दिल्ली पुलिस और प्रशासन के लिए भी ऐसे लगातार विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। कनॉट प्लेस से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का रास्ता राजधानी का एक अत्यंत संवेदनशील और व्यस्त क्षेत्र है। ऐसे में दो किलोमीटर लंबे इस पैदल मार्च के दौरान यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की आवश्यकता होती है। हालांकि, स्रोत सामग्री में सुरक्षा व्यवस्था या पुलिस की तैयारियों को लेकर कोई विशिष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतने बड़े राजनीतिक आयोजन के मद्देनजर प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बरती जाना स्वाभाविक है।

विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भारतीय राजनीति में एक बेहद गंभीर विषय है। चुनाव आयोग भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। जब विपक्षी दलों का एक बड़ा गुट खुले तौर पर इस संस्था के प्रमुख के इस्तीफे की मांग करता है, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों को रेखांकित करता है। विपक्ष का तर्क है कि चुनाव आयोग की वर्तमान स्थिति संतोषजनक नहीं है और ‘SIR’ के विरोध में उठाया गया यह कदम लोकतंत्र को बचाने की दिशा में एक जरूरी पहल है।

कुल मिलाकर, आज का यह मार्च INDIA ब्लॉक की बढ़ती मुखरता और संगठित विरोध का प्रमाण है। कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक का दो किलोमीटर का यह सफर केवल एक भौतिक दूरी नहीं है, बल्कि यह विपक्ष द्वारा अपनी बात को सशक्त ढंग से रखने का एक राजनीतिक प्रयास है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों का यह जत्था जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा, तब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस लगातार पांचवें प्रदर्शन का सरकार और चुनाव आयोग पर क्या असर पड़ता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक पारा और ऊपर चढ़ने की पूरी संभावना है, क्योंकि विपक्ष पीछे हटने के किसी संकेत नहीं दे रहा है।