ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि लोग पैनिक में रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं। देशभर के शहरों-कस्बों से LPG के लिए लंबी कतारें दिख रही हैं। आलम ये है कि लोग अब रेस्टोरेंट में जाकर मेन्यू से पहले पूछते हैं-
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ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक कैसे पहुंची, देश में कितने दिन की LPG बची है और अगर जंग खिंची तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब…
सवाल-1: LPG क्या है और भारत को इसकी कितनी जरूरत है?
जवाबः LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है- प्रोपेन और ब्यूटेन। इसका इस्तेमाल रसोई गैस के रूप में होता है।
LPG कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सीधे जमीन से निकलती है। ये पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से तैयार होती है। जैसे- दही से घी निकालने में मट्ठा भी बनता है। ऐसे ही ऑयल रिफाइनरी और नेचुरल गैस की प्रोसेसिंग में LPG बनती है।
इसी तरह एक और अहम गैस है LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस। इसके नेचुरल गैस के भंडार होते हैं। इसका इस्तेमाल बिजली, फर्टिलाइजर बनाने और इंडस्ट्रीज में होता है।

अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत में 30.8 मिलियन मीट्रिक टन यानी MMT एलपीजी की खपत हुई। घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से रोजाना औसतन 65 लाख सिलेंडर। LPG का 88% इस्तेमाल घरेलू और 12% कॉमर्शियल होता है। देश में 33.21 करोड़ एक्टिव कनेक्शन हैं।
सवाल-2: भारत के जरूरत की गैस कहां से आती है?
जवाबः भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG खरीददार है। ईरान जंग से पहले 67% एलपीजी विदेशों से आती थी, लेकिन 11 मार्च को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि 60% LPG विदेशों से इम्पोर्ट हो रही है। बाकी की गैस घरेलू रिफाइनरियां बना रही हैं।
गैस सप्लाई करने के दो तरीके होते हैं- शिप और पाइपलाइन। भारत में शिप्स के जरिए गैस इम्पोर्ट होती है। खाड़ी, अफ्रीकी और अमेरिकी देशों से LPG और LNG खरीदी जाती है…

सवाल-3: गैस आने के बाद भारत में उसका डिस्ट्रीब्यूशन कैसे होता है?
जवाबः LPG और LNG से लदे जहाज जैसे ही बंदरगाह पर पहुंचते हैं, प्रोडक्ट्स के हिसाब से उन्हें अलग-अलग कर प्लांट्स में भेज दिया जाता है।
लाल-नीले सिलेंडर में भरी जाती है LPG
- एलपीजी को बंदरगाह के बड़े टैंकों से पाइपलाइनों और रेल-वैगनों से बॉटलिंग प्लांट्स तक भेजा जाता है।
- इसका ज्यादातर हिस्सा लाल सिलेंडरों में भरा जाता है। फिर ट्रकों से डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद घरों में डिलीवरी की जाती है।
- कुछ LPG नीले सिलेंडरों में भरी जाती है, जो कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए होती हैं। इन्हें डिस्ट्रीब्यूटर्स होटलों, रेस्टोरेंट्स वगैरह में सप्लाई करते हैं।
- भारत में सरकारी और प्राइवेट कंपनियां एलपीजी का कारोबार करती है। रसोई गैस का 90% मार्केट शेयर IOCL (इंडेन), BPCL (भारत गैस) और HPCL (HP गैस) के पास है।
पाइपलाइंस से ट्रांसपोर्ट होती है LNG
- LNG को पोर्ट पर रिगैसिफिकेशन टर्मिनल में गर्म करके फिर से गैस बनाया जाता है। इसके बाद इसे नेशनल गैस ग्रिड की पाइपलाइनों से उद्योगों और शहरों तक भेजा जाता है।
- LNG को अलग-अलग प्रेशर पर अलग-अलग कामों में इस्तेमाल किया जाता है…CNG: ये एलएनजी को 200 से 250 बार के हाई-प्रेशर पर दबाने पर तैयार होती है। इसीलिए ये कॉम्प्रेस्ड नेचुरल गैस कहलाती है। इसका इस्तेमाल कार, ट्रक, ऑटो वगैरह में फ्यूल के तरह किया जाता है।PNG: इसे कम दबाव वाली पाइपलाइनों से सीधे सप्लाई किया जाता है। इसीलिए ये प्रेशराइज्ड नेचुरल गैस कहा जाता है। इसका इस्तेमाल घरेलू रसोइयों में किया जाता है।
- LNG के कारोबार में GAIL (India) Limited सबसे बड़ी सरकारी कंपनी है, जिसके पास देश की 70% पाइपलाइंस हैं। रिलायंस, अडाणी, पेट्रोनट LNG जैसे प्राइवेट प्लेयर्स भी इसका करोबार करते हैं।
- 21% LNG सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन यानी CGD को मिलती है, जो CNG और PNG सप्लाई करती है। देशभर में 8609 CNG स्टेशन और 1.62 करोड़ PNG कनेक्शन हैं।
- वहीं 30% गैस यूरिया और 13% बिजली बनाने में इस्तेमाल होता है। बाकी गैस अन्य उद्योगों में उपयोग होती है।
इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, ‘भारत के लिए अच्छी बात है कि यह किल्लत उर्वरकों के इस्तेमाल के ऑफ-सीजन में हुई है। खेती अभी हो नहीं रही है और किसानों को फिलहाल फर्टिलाइजर्स की जरूरत नहीं है।’
सवाल-4: होर्मुज बंद होने से भारत की गैस सप्लाई पर कितना असर पड़ा है?
जवाबः ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में UAE, कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे दर्जनभर खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। इसके चलते यहां के गैस प्लांट का प्रोडक्शन बंद हो गया या प्रभावित हुआ।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे।

यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से भारत की विदेश एलपीजी सप्लाई का 90% और एलएनजी का 70% खरीदता है। यहां से शिप महज 4-5 दिन में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाते हैं।
ये सारा शिपमेंट होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आता है, लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। 1 मार्च से पहले इस जलमार्ग से रोजाना औसतन 153 शिप्स निकलते थे, लेकिन अब ये आंकड़ा 13 के करीब है।
11 मार्च को शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 28 जहाज हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 क्रू मेंबर हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट पर 4 जहाज हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। जंग शुरू होने के बाद 12 मार्च को पहली बार एक टैंकर होर्मुज के रास्ते मुंबई बंदरगाह पहुंचा है।

11 मार्च को विदेश, पेट्रोलियम, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
सवाल-5: भारत के पास कितने दिन की LPG मौजूद है?
जवाबः भारत के पास इमरजेंसी के लिए 2 LPG स्टोरेज हैं, जहां कुल 1.4 लाख टन LPG स्टोर है। 80 हजार टन LPG कर्नाटक के मंगलुरू में और 60 हजार टन आंध्र प्रदेश के विशाखापतनम में स्टोर है।
कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट्स और भरे जा चुके सिलेंडरों में भी काफी एलपीजी जमा है। हालांकि देश की जरूरतों के हिसाब से ये काफी कम है।
वहीं, LNG के मामले में भारत के पास कोई स्पेशल स्टोरेज नहीं है। क्योंकि इसका सेटअप महंगा और कठिन है। इसके लिए क्रायोजेनिक यानी बेहद ठंडे टैंकर्स की जरूरत होती है। ऐसे में जितनी LNG गैस ग्रिड, पाइपलाइंस और बंदरगाहों के रिगैसिफिकेशन टर्मिनल्स में है, केवल उतनी ही LNG देश में मौजूद है।
अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास 25-30 दिन की LPG और 10 दिन की LNG बची है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि घरों तक गैस की डिलीवरी ज्यादातर सामान्य है और औसत डिलीवरी समय करीब ढाई दिन है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें।

सवाल-6: मौजूद गैस के संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है?
जवाबः सरकार की ओर से गैस-तेल की कमी को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं…
1. सप्लाई रूट्स बदलना: पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, ‘हम करीब 40 देशों से क्रूड इम्पोर्ट करते हैं। तेल कंपनियों ने अलग-अलग सोर्सेस से तेल मंगाया है। इसके कारण हमारा 70% क्रूड इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्ते आ रहा है। ये पहले 55% था।’
2. घरेलू उत्पादन बढ़ाना: पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक घरेलू प्रोडक्शन 28% बढ़ा है। रोजाना 50 लाख घरेलू LPG सिलेंडर बांटे जा रहे हैं।
3. होर्मुज के लिए बातचीत: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बीते कुछ दिनों में 3 बार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बात की है। वहीं, 12 मार्च की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की। भारत चाहता है कि मिडिल-ईस्ट में हालात सामान्य हों और भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की छूट मिले।
4. आवश्यक वस्तु अधिनियम: LPG सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1995’ लागू किया है। साथ ही अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता तय की गई है। रसोई गैस को पहली प्राथमिकता दी गई है। वहीं कॉमर्शियल गैस हर महीने की औसतन सप्लाई की 20% ही डिलीवर की जा रही है।
ग्लोबल एनर्जी थिंकटैंक एम्बर के एनालिस्ट और भारत की सरकारी तेल-गैस कंपनी के पूर्व अधिकारी दत्तत्रेय दास मानते हैं कि जंग शुरू होने बाद एक हफ्ते तक हालात अनिश्चित थे और तब सरकार ने LPG को तरजीह नहीं दी। सरकार की गलती है कि उसने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश देने में 7 दिनों की देरी की।

घरेलू सिलेंडर भरवाने के लिए गैस एजेंसियों के बाहर खड़े लोग।
सवाल-7: अगर जंग लंबी छिड़ी, तो भारत कहां से गैस लाएगा?
जवाबः केंद्र सरकार नए गैस सप्लायर्स से डील कर रही है। अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से से LPG खरीदी जा रही है।
शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, करीब 2.2 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लिए जहाज इस हफ्ते के आखिर तक भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया और कई अफ्रीकी देशों से भी सरकार भी गैस कारोबार कर सकती है।
अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आमतौर पर यहां से शिपमेंट आने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके चलते LPG की घरेलू खपत में कुछ समय की किल्लत हो सकती है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा कि खाड़ी देशों के अलावा अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी गैस के कार्गो लाने की व्यवस्था की जा रही है। रूस को 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए गए हैं।
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भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। आदित्य गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। वहां अफरा-तफरी मची थी। काफी मशक्कत के बाद एक सिलेंडर मिला। पूरी खबर पढ़िए…















