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Mon, Oct 12, 2026Updated 12:18 PM IST
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जालंधर कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह का AAP नेताओं पर तीखा हमला, शपथ ग्रहण समारोह में इस्तेमाल की आपत्तिजनक भाषा; चन्नी को बताया चालाक

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वंदे भारत न्यूज़, जालंधर। पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद सामने आ गया है, जिसके केंद्र में जालंधर कैंट से कांग्रेस विधायक और हाल ही में नियुक्त किए गए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह हैं। परगट सिंह ने अपने ताजपोशी यानी शपथ ग्रहण समारोह के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए उनके लिए ‘खस्सी’ यानी नपुंसक जैसे हार्ड शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी ‘चालाक’ बताकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। यह पहली बार है जब परगट सिंह ने इस तरह का एग्रेसिव भाषण दिया और इतने कड़े शब्दों का प्रयोग किया है।

सूत्रों के अनुसार, दो अक्टूबर से पहले तक परगट सिंह अपनी राजनीतिक बयानबाजी में काफी सधे हुए शब्दों का इस्तेमाल करते रहे हैं। वे अपनी बात को संयमित तरीके से रखने के लिए जाने जाते थे। हालांकि, सूबा प्रधान के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उनका तेवर पूरी तरह बदला हुआ दिखा। इस समारोह में उन्होंने अचानक आक्रामक रुख अपना लिया और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के नेताओं पर सीधा और कड़ा प्रहार किया। उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच बहस छिड़ गई है।

परगट सिंह ने अपने भाषण के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं को संबोधित करते हुए ‘खस्सी’ शब्द का प्रयोग किया, जिसका अर्थ नपुंसक होता है। पंजाब की राजनीति में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल बेहद असामान्य माना जाता है, खासकर तब जब कोई व्यक्ति किसी प्रमुख राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के पद की शपथ ले रहा हो। उनके इस बयान ने विपक्षी दलों को हमला करने का मौका दे दिया है। आम आदमी पार्टी की ओर से परगट सिंह के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी गई है और इसे उनकी भाषाई मर्यादा के उल्लंघन के रूप में पेश किया जा रहा है।

इसके अलावा, परगट सिंह ने अपने भाषण में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह चन्नी का भी जिक्र किया। उन्होंने चन्नी को ‘चालाक’ बताया। हालांकि, उन्होंने किस संदर्भ में यह बात कही, इसकी पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन एक ही मंच से अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विपक्षी दल दोनों पर इस तरह की टिप्पणी करना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों का कहना है कि उनके इस बयान से पार्टी के भीतर भी कुछ असहजता देखने को मिल सकती है, क्योंकि चन्नी पंजाब कांग्रेस में एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परगट सिंह के इस बदले हुए तेवर के पीछे प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कार्यकर्ताओं में जोश भरने की रणनीति हो सकती है। पंजाब में कांग्रेस इस समय विपक्ष की भूमिका में है और आम आदमी पार्टी की सरकार पर लगातार हमलावर रहने की जरूरत महसूस कर रही है। ऐसे में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ने सत्ताधारी दल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया होगा। लेकिन जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया गया, उससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या राजनीतिक विरोध को व्यक्त करने के लिए इस स्तर के शब्दों का प्रयोग उचित है?

आम आदमी पार्टी ने परगट सिंह के इस भाषण पर कड़ी आपत्ति जताई है। AAP नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के नए सूबा प्रधान ने अपने पहले ही बड़े संबोधन में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, वह कांग्रेस पार्टी की सोच और उनकी राजनीतिक संस्कृति को दर्शाता है। AAP की तरफ से इसे लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा जा रहा है और कहा जा रहा है कि विपक्ष में होने के बावजूद कांग्रेस नेताओं का संयम पूरी तरह टूट चुका है।

दूसरी ओर, दो अक्टूबर से पहले के परगट सिंह के राजनीतिक करियर पर नजर डालें तो वे हमेशा से एक क्रिकेटर से राजनेता बने नेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। जालंधर कैंट से विधायक के रूप में उन्होंने जनता के मुद्दों को उठाया है, लेकिन उनकी भाषा कभी इस हद तक आक्रामक या विवादित नहीं रही थी। शपथ ग्रहण समारोह में आए इस अचानक बदलाव ने उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों को चौंका दिया है।

पंजाब की राजनीति में भाषा और बयानबाजी का हमेशा से बड़ा असर रहा है। चुनावी मौसम हो या सत्ता संघर्ष, नेताओं के शब्द अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं। परगट सिंह का यह भाषण भी अब पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर चुका है। देखना यह होगा कि कांग्रेस हाईकमान इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या परगट सिंह अपने इस आक्रामक तेवर को आगे भी जारी रखते हैं या फिर पार्टी उन्हें संयमित भाषा का इस्तेमाल करने की सलाह देती है। फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर जालंधर सहित पूरे पंजाब में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और सभी दलों की निगाहें इस विवाद के अगले मोड़ पर टिकी हुई हैं।