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Thu, Oct 15, 2026Updated 1:20 PM IST
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जालोर: भीनमाल में 230 बालिकाओं का चरण पूजन कर किया सम्मान, नारी वंदन महायज्ञ बना आकर्षण का केंद्र

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जालोर, राजस्थान | रिपोर्ट: प्रियंक दवे

राजस्थान के जालोर जिले के भीनमाल में बालिकाओं के सम्मान और नारी गरिमा का संदेश देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। अनकी बाई घमंडीराम गोवानी कवि माघ बाल मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में आयोजित नारी वंदन महायज्ञ में 230 बालिकाओं का चरण पूजन कर उन्हें चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रमेश चंदन ट्रस्ट, अनकी बाई घमंडीराम गोवानी के मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पखवाड़े के अवसर पर किया गया।

गुरुजनों ने चरण पूजन कर दिया सम्मान का संदेश

कार्यक्रम में शिक्षकों ने बालिकाओं के चरण पखारे और कुंकुम, चंदन व अक्षत से पूजन कर उन्हें चुनरी ओढ़ाई। इस आयोजन के माध्यम से बालिकाओं के प्रति सम्मान, समानता और समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का संदेश दिया गया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं के आत्मसम्मान को बढ़ावा देना और समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना

यह आयोजन राजस्थान राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के स्थानीय संघ भीनमाल, मीना-राजू मंच और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय वडलीनाडी, नवापुरा चौपावतान के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

आयोजकों ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना से जोड़ते हुए संस्कार, सामाजिक सहभागिता और बालिका सम्मान पर जोर दिया। कार्यक्रम में बालिकाओं को समाज की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए उनके अधिकारों, गरिमा और भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

स्काउट-गाइड पदाधिकारियों का रहा मार्गदर्शन

इस आयोजन में सवाई सिंह राठौड़, सीओ स्काउट जालोर; निंबाराम चौधरी, सहायक कमिश्नर; और प्रेमाराम बंजारा, संरक्षक भारत स्काउट्स एवं गाइड्स भीनमाल का मार्गदर्शन रहा। आयोजकों ने बताया कि जिले में संचालित सह-शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

भीनमाल में आयोजित इस कार्यक्रम ने बालिकाओं के सम्मान और नारी गरिमा के मुद्दे को केंद्र में रखा। 230 बालिकाओं के सामूहिक चरण पूजन के जरिए आयोजकों ने समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि बालिकाओं का सम्मान और उनके प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवार, विद्यालय और समाज की साझा जिम्मेदारी है।

जालोर से प्रियंक दवे की रिपोर्ट।