जांजगीर-चांपा: शादी कराने के नाम पर 5.65 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने 4 महिलाओं समेत 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में शादी का रिश्ता कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का साइबर थाना पुलिस ने सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने चार महिलाओं और एक पुरुष समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर पीड़ितों से शादी का झांसा देकर कुल 5.65 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है। यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते प्रकोप और मोबाइल विज्ञापनों के जरिए आम लोगों को शिकार बनाने के नए तरीकों को उजागर करता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह गिरोह मोबाइल पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों के माध्यम से अपने शिकार की तलाश करता था। आरोपी मोबाइल फोन पर ऐसे विज्ञापन प्रसारित करते थे, जिनमें शादी कराने या उपयुक्त जीवनसाथी खोजने का दावा किया जाता था। जो लोग इन विज्ञापनों से प्रभावित होकर उनसे संपर्क करते थे, उन्हें यह गिरोह अपना निशाना बना लेता था। शादी का लालच देकर आरोपी पहले पीड़ितों का विश्वास जीतते थे और उसके बाद विभिन्न बहानों से उनसे रुपये ऐंठते थे। रजिस्ट्रेशन शुल्क, रिश्ता पक्का करने की रकम और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ितों से किस्तों में पैसे लिए जाते थे।
जब पीड़ितों को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है और न तो कोई शादी का रिश्ता तय हो रहा है और न ही उनके द्वारा दिए गए पैसे वापस मिल रहे हैं, तब उन्होंने इसकी शिकायत जांजगीर-चांपा जिले के साइबर थाने में दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी सुराग और मोबाइल विज्ञापनों के डेटा के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस की टीम ने डिजिटल साक्ष्यों और सूचनाओं के विश्लेषण के बाद इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया और पांच आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि इस प्रकार के ठगी के मामलों में महिलाओं की संलिप्तता साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे बदलते तरीकों को दर्शाती है। महिलाओं को सामने रखकर यह गिरोह पीड़ितों का आसानी से विश्वास जीत लेता था, क्योंकि शादी के मामलों में महिलाओं की मध्यस्थता को लोग अधिक विश्वसनीय मानते हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे विस्तृत पूछताछ की है।
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने अब तक पीड़ितों से कुल 5.65 लाख रुपये की ठगी की है। हालांकि, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन आरोपियों ने अन्य लोगों को भी इसी तरह अपना शिकार बनाया है। यह आशंका जताई जा रही है कि गिरोह के और भी शिकार हो सकते हैं जिन्होंने बदनामी या अन्य कारणों से अभी तक पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई है। इसलिए साइबर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी इस गिरोह द्वारा ठगी की गई हो, तो वे तुरंत साइबर थाने में संपर्क करें ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
यह घटना मोबाइल विज्ञापनों और ऑनलाइन मैट्रिमोनियल सेवाओं के नाम पर हो रही धोखाधड़ी के प्रति लोगों को सतर्क करती है। वर्तमान समय में स्मार्टफोन के व्यापक उपयोग के कारण साइबर अपराधी विभिन्न प्रकार के आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों तक पहुंच बना रहे हैं। शादी जैसे संवेदनशील और भावनात्मक विषयों का लाभ उठाकर ठग सीधे-सादे लोगों को अपनी जाल में फंसा रहे हैं।
साइबर थाना पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम देकर साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा जो जनता की गाढ़ी कमाई को ठगने का काम कर रहा है। जांजगीर-चांपा पुलिस ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे मोबाइल पर दिखने वाले अनजान विज्ञापनों पर आसानी से भरोसा न करें और शादी या किसी भी अन्य संबंध में लेन-देन करने से पहले पूरी तरह से जांच-पड़ताल कर लें।
पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन या मोबाइल विज्ञापनों के माध्यम से शादी का रिश्ता तलाश रहा है, तो उसे संबंधित एजेंसी या व्यक्ति की वैधता की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए। बिना सत्यापन के किसी भी अनजान खाते में पैसे ट्रांसफर करने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ितों को तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या नजदीकी साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते उनके पैसे को सुरक्षित करने और आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सके।

