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जबलपुर: छात्र की आत्महत्या के मामले में निलंबित शिक्षक संतोष पटेल का स्कूल में पढ़ाने का दावा, कलेक्टर ने दी जांच की जानकारी

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वन्दे भारत न्यूज़ | जबलपुर

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सगड़ा-छपनी स्थित शासकीय स्कूल में पदस्थ शिक्षक संतोष पटेल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस शिक्षक पर एक छात्र की आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment) का आरोप लगा था, जिसके बाद उसे जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि, अब ग्रामीणों का दावा है कि जेल जाने और निलंबित होने के बावजूद यह शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आ रहा है, बच्चों को पढ़ा रहा है और यही नहीं, बल्कि छात्रों के साथ टूर पर भी गया है। इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जबलपुर के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने इस विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि सगड़ा-छपनी शासकीय स्कूल में पदस्थ शिक्षक संतोष पटेल जेल जाने के बाद भी स्कूल आ रहा था। कलेक्टर ने बताया कि इस मामले में शिक्षक को निलंबित किया जा चुका है और उसके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के अनुसार, निलंबन की कार्रवाई के बावजूद वह शिक्षक आज भी स्कूल आ रहा है, बच्चों को पढ़ा रहा है और उनके साथ शैक्षणिक भ्रमण यानी टूर पर भी जा रहा है। प्रशासन की ओर से इस बात को बेहद गंभीरता से लिया गया है और जांच जारी है।

इस मामले में ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने जो दावे किए हैं, वे अत्यंत चिंताजनक हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सस्पेंड होने के बाद भी शिक्षक संतोष पटेल रोजाना सुबह करीब 11 बजे स्कूल आता है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निलंबन के आदेश लागू होने के बाद भी वह बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा था और हाल ही में छात्रों को लेकर टूर पर भी गया था। ग्रामीणों के इन दावों ने प्रशासनिक तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर सीधे तौर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं, जबलपुर के संयुक्त संचालक (Joint Director – JD) शिक्षा विभाग ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि शिक्षक संतोष पटेल के खिलाफ निलंबन का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उनका यह बयान कलेक्टर के उस दावे से थोड़ा अलग प्रतीत होता है, जिसमें कलेक्टर ने शिक्षक को पहले ही निलंबित बताया था। जेडी द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने की बात कहने से यह साफ होता है कि विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया किस चरण में है, इसे लेकर अधिकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में कुछ अंतर दिखाई दे रहा है।

यह पूरा विवाद मूल रूप से एक छात्र की आत्महत्या के मामले से जुड़ा है। शिक्षक संतोष पटेल पर आरोप है कि उसने एक छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाया था। इस गंभीर आरोप के तहत पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शिक्षक को गिरफ्तार किया था और उसे जेल भेजा गया था। छात्र की आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला अपने आप में बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इसमें एक शिक्षक और छात्र के बीच के विश्वास और जिम्मेदारी के रिश्ते का सीधा उल्लंघन शामिल है। ऐसे में जब कोई शिक्षक इस तरह के संगीन अपराध में जेल जाकर लौटे और फिर उसी स्कूल में पढ़ाता हुआ पाया जाए, तो अभिभावकों और ग्रामीणों में स्वाभाविक रूप से रोष और भय पैदा होना लाजिमी है।

शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, यदि किसी सरकारी कर्मचारी या शिक्षक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज होता है और उसे जेल जाना पड़ता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए। निलंबन अवधि के दौरान संबंधित व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने या किसी भी प्रकार की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधि में भाग लेने की अनुमति नहीं होती है। लेकिन सगड़ा-छपनी शासकीय स्कूल में जो स्थिति सामने आई है, वह इन सभी नियमों की खुली धज्जियां उड़ाती प्रतीत होती है।

अब देखना यह होगा कि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर चल रही विभागीय जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि निलंबन के बाद भी शिक्षक स्कूल कैसे आ रहा था, स्कूल के अन्य कर्मचारियों या प्रधानपाठक ने उसे क्यों नहीं रोका, और छात्रों को टूर पर ले जाने की अनुमति किसने दी। यदि जांच में ग्रामीणों के दावे सही पाए गए, तो न केवल शिक्षक संतोष पटेल के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

इस घटनाक्रम ने जबलपुर जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वन्दे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल, विभागीय जांच जारी है और इसके निष्कर्ष आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।