जबलपुर: एक्सपायरी ग्लूकोज चढ़ाने से युवक की मौत, फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार; स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल किया सील

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल पहुंचे एक युवक की एक्सपायरी (अवधि समाप्त) ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाने के बाद मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहे व्यक्ति के पास चिकित्सा संबंधी कोई वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं था। वह पूरी तरह से फर्जी डॉक्टर बनकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा था। मामले में कटंगी पुलिस ने शनिवार को आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खैरी अस्पताल को सील कर दिया है।
मृतक युवक की पहचान शेखर के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शेखर को पेट में तेज दर्द की शिकायत थी। इसी परेशानी के चलते वह इलाज के लिए जबलपुर के खैरी स्थित अस्पताल पहुंचा था। अस्पताल में उसका इलाज सतीश साहू नामक व्यक्ति कर रहा था। शेखर की हालत को देखते हुए उसे ग्लूकोज की ड्रिप लगाई गई। हालांकि, ड्रिप लगाने के मात्र आधे घंटे के भीतर ही शेखर की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। युवक की इतनी जल्दी हुई मौत ने परिजनों और अन्य मरीजों को स्तब्ध कर दिया।
घटना के बाद जब मामले की गहराई से जांच की गई, तो एक और भयावह सत्य सामने आया। शेखर को जो ग्लूकोज की ड्रिप लगाई गई थी, वह एक्सपायरी यानी उसकी उपयोग की अवधि समाप्त हो चुकी थी। माना जा रहा है कि एक्सपायरी दवा और ग्लूकोज चढ़ाए जाने के कारण ही युवक की जान चली गई। किसी भी चिकित्सकीय मानक के अनुसार, एक्सपायरी दवाओं या ग्लूकोज का उपयोग मरीजों पर करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि यह सीधे तौर पर जीवन के लिए खतरा पैदा करता है। खैरी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही ने स्पष्ट कर दिया कि वहां मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा था।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि अस्पताल में मरीजों का इलाज करने वाले सतीश साहू के पास चिकित्सा क्षेत्र की कोई भी वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं था। जांच के दौरान यह पाया गया कि वह बिना किसी योग्यता के फर्जी तरीके से डॉक्टर बनकर अस्पताल में बैठता था और मरीजों का इलाज करता था। बिना किसी मेडिकल ट्रेनिंग और योग्यता के मरीजों को दवाइयां देना और ड्रिप चढ़ाना सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। सतीश साहू की इस अनियंत्रित और अज्ञानतापूर्ण चिकित्सा पद्धति ने शेखर जैसे युवक की जान ले ली।
घटना की सूचना मिलने के बाद कटंगी पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए शनिवार को आरोपी सतीश साहू के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह फर्जी डॉक्टर कितने समय से इस अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहा था और क्या पूर्व में भी ऐसी किसी घटना की जानकारी सामने आई है या नहीं। पुलिस ने मामले में आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
उधर, इस घटना के तुरंत बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी खैरी अस्पताल पहुंचकर निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल में व्याप्त अनियमितताओं, एक्सपायरी दवाओं के इस्तेमाल और फर्जी डॉक्टर द्वारा इलाज किए जाने की पुष्टि होने के बाद अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। अब इस अस्पताल में किसी भी प्रकार की चिकित्सा गतिविधि संचालित नहीं की जा सकेगी। स्वास्थ्य विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि आम जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे संस्थानों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
यह पूरा मामला जिले और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की नियामक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास मेडिकल की कोई उपाधि नहीं है, वह कैसे एक अस्पताल चला रहा था और मरीजों को दवाइयां दे रहा था, यह जांच का विषय है। साथ ही, अस्पतालों में एक्सपायरी दवाओं और ग्लूकोज की उपलब्धता और उनके उपयोग पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। शेखर की मौत ने उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि केवल पेट दर्द के इलाज के लिए गए उनके बेटे की जान फर्जी डॉक्टर और एक्सपायरी दवा की भेंट चढ़ गई।
वंदे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट में स्पष्ट है कि जबलपुर के खैरी अस्पताल में हुई यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में फैले फर्जीवाड़े और घोर लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। फिलहाल, कटंगी पुलिस आरोपी सतीश साहू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है और स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर अपनी प्राथमिक कार्रवाई पूरी कर ली है। देखना होगा कि आगे चलकर इस मामले में दोषियों को कितनी सख्त सजा मिलती है और ऐसे फर्जी अस्पतालों के खिलाफ प्रशासन क्या बड़ी मुहिम चलाता है।

