Thu, 08 Oct 20265:02 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 5:02 PM IST
होम › बिहार

कैमूर में मंत्री संतोष सुमन का बड़ा बयान: सक्षम लोग स्वेच्छा से छोड़ें आरक्षण, SC-ST वर्ग को मिले वास्तविक लाभ

WhatsAppFacebookX

बिहार के कैमूर जिले में आयोजित ‘गरीब चौपाल’ कार्यक्रम के दौरान राज्य के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक न्याय को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि समाज के जो लोग अब सक्षम हो चुके हैं, उन्हें स्वेच्छा से आरक्षण का लाभ त्याग देना चाहिए, ताकि इसका वास्तविक फायदा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उन वंचित वर्गों तक पहुंच सके जो आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। मंत्री सुमन ने强调 किया कि आरक्षण का मूल उद्देश्य समाज के सबसे पिछड़े और शोषित तबकों को न्याय दिलाना है, न कि इसे एक स्थायी सुविधा के रूप में देखना।

कैमूर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संतोष सुमन ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की विचारधारा और कार्यशैली पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘गरीब चौपाल’ कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य गरीबों और वंचितों की समस्याओं को उनकी दहलीज पर सुनना और उनका समयबद्ध समाधान निकालना है। मंत्री ने कहा कि पार्टी का मकसद केवल राजनीतिक बयानबाजी करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें उनका हक दिलवाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार जानकारी के अभाव या प्रशासनिक बाधाओं के कारण पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता, जिसे दूर करने के लिए ऐसे चौपाल कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

मंत्री संतोष सुमन के इस बयान को बिहार की मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरक्षण को लेकर अक्सर राजनीतिक बहस होती रही है, लेकिन किसी मंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से ‘सक्षम लोगों’ द्वारा स्वेच्छा से आरक्षण छोड़ने की अपील करना यह दर्शाता है कि सरकार और सहयोगी दलों का ध्यान अब आरक्षण के भीतर के सूक्ष्म असमानताओं को दूर करने पर केंद्रित हो रहा है। SC और ST वर्गों के भीतर कुछ समुदायों या परिवारों ने दशकों में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में प्रगति की है, जबकि कई अन्य अभी भी अत्यंत पिछड़ी स्थिति में हैं। मंत्री का इशारा स्पष्ट रूप से इसी आंतरिक असंतुलन को सुधारने की दिशा में है, ताकि आरक्षण का लाभ उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसे इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

‘गरीब चौपाल’ कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने उपस्थित ग्रामीणों और लाभार्थियों से सीधा संवाद भी किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि लघु जल संसाधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की योजनाएं बिना किसी भेदभाव के पात्र लाभार्थियों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि वंचितों तक न्याय पहुंचाना ही हमारी सरकार और पार्टी का सर्वोच्च लक्ष्य है। संतोष सुमन ने यह भी रेखांकित किया कि सामाजिक न्याय केवल सरकारी नौकरियों या शिक्षण संस्थानों में सीटों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सामाजिक सम्मान, आर्थिक स्वावलंबन और गरिमापूर्ण जीवन जीने के अवसरों में भी परिलक्षित होना चाहिए।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के नेता के तौर पर संतोष सुमन ने अपनी पार्टी की भूमिका को एक ‘सेतु’ के रूप में परिभाषित किया जो आम जनता और प्रशासन के बीच की खाई को पाटने का काम करती है। उन्होंने कहा कि गरीब चौपाल जैसे कार्यक्रमों से न केवल लोगों की शिकायतों का निदान होता है, बल्कि प्रशासन को भी फीडबैक मिलता है कि किस योजना में क्या खामियां हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है। यह प्रक्रिया लोकतंत्र को अधिक समावेशी और उत्तरदायी बनाने में सहायक है। मंत्री ने दोहराया कि जब तक समाज के अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति विकास का लाभ नहीं उठा लेता, तब तक हमारा कार्य अधूरा है।

आरक्षण पर दिए गए उनके बयान के व्यापक सामाजिक प्रभावों की चर्चा भी होने लगी है। जानकारों का मानना है कि यदि सक्षम वर्ग स्वप्रेरणा से आरक्षण का लाभ त्यागते हैं, तो इससे सामाजिक सद्भाव मजबूत होगा और आरक्षण विरोधी तनावों में कमी आएगी। साथ ही, इससे SC-ST वर्गों के भीतर समानता बढ़ेगी और वास्तविक जरूरतमंदों को अवसर मिल सकेंगे। हालांकि, यह पूरी तरह से एक नैतिक अपील है और इसके लिए कोई वैधानिक अनिवार्यता नहीं है, लेकिन एक जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसा बयान देना सामाजिक चेतना को जागृत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

कैमूर का यह दौरा और गरीब चौपाल कार्यक्रम मंत्री संतोष सुमन के क्षेत्रीय जुड़ाव और जमीनी समस्याओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। लघु जल संसाधन मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारियों का सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के कल्याण से है, इसलिए ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से वे सीधे लाभार्थियों से जुड़कर योजनाओं की क्रियान्वयन स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी और सरकार का एजेंडा स्पष्ट है: गरीबी उन्मूलन, सामाजिक न्याय और सबका साथ-सबका विकास। आरक्षण पर उनकी टिप्पणी इसी व्यापक एजेंडे का एक अभिन्न अंग है, जो यह सुनिश्चित करना चाहती है कि संवैधानिक प्रावधानों का लाभ वास्तव में उन तक पहुंचे जिनके लिए ये बनाए गए थे।