कचरे में दबा सम्मान: क्या यही है हमारी ‘स्वच्छता दीदियों’ की इंसानियत?


जो हाथ हर सुबह उठकर हमारे शहर की गंदगी साफ करते हैं, आज वही हाथ खुद कचरे के ढेर में बैठने को मजबूर दिखे। नगर निगम की भारी अमानवीयता तब सामने आई, जब ‘स्वच्छता दीदियों’ को कचरे से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली के ऊपर बैठाकर ले जाया गया।
यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था और मरती हुई इंसानियत पर एक करारा तमाचा है। क्या शहर को स्वच्छ रखने वालों की सेहत, सुरक्षा और आत्मसम्मान की कोई कीमत नहीं है?
महापौर संजू देवी राजपूत ने जांच के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन सवाल अब भी कायम है—क्या सिर्फ एक-दो ड्राइवरों पर गाज़ गिराकर सुपरवाइजर और जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से बच निकलेंगे?
इन स्वच्छता वीरों को सजा नहीं, सम्मान और सुरक्षा की ज़रूरत है!

