Kerala CM Suspense Vs Congress; KC Venugopal VD Satheesan

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10 दिन की माथापच्ची के बाद आखिर कांग्रेस ने केरलम का CM तय कर लिया। राज्य में पार्टी के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन नए CM होंगे। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल और सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला भी दावेदार थे।

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केरलम के साथ 4 मई को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी के चुनाव नतीजे आए थे। चारों राज्यों में नए CM की शपथ हो गई, लेकिन केरलम को अब तक CM नहीं मिला था। इसके लिए बीते 5 दिन से मीटिंग चल रही थीं। राहुल और प्रियंका गांधी भी एक्टिव हुए, इसके बाद नाम फाइनल हुआ। सीनियर लीडर जयराम रमेश, अजय माकन और दीपा दासमुंशी ने 14 मई को वीडी सतीशन के नाम का ऐलान किया।

10 दिन में क्या-क्या हुआ

सोर्स बताते हैं कि हाईकमान केसी वेणुगोपाल को CM बनाना चाहता था, लेकिन सतीशन और सबसे अनुभवी लीडर रमेश चेन्नीथला इसके विरोध में थे। कांग्रेस समर्थक सतीशन के साथ थे, लेकिन विधायकों का समर्थन वेणुगोपाल को था।

3 दिन राहुल एक्टिव रहे, रात तीन बजे तक खड़गे के घर मीटिंग

पार्टी सोर्स के मुताबिक, केरलम का CM तय करने के लिए 12 मई की देर रात करीब 3 बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के घर मीटिंग हुई। राहुल गांधी 3 दिन से केरलम के कांग्रेस नेताओं, समर्थकों, दावेदारों और सहयोगी पार्टियों से बात कर रहे थे। फिर भी मामला फंसा रहा। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी भी नेताओं से बात कर रही थीं। सोर्स दावा करते हैं कि प्रियंका चाहती थीं कि सतीशन CM बनें।

सोर्स का दावा: राहुल चाहते थे, CM हाईकमान की ओर से थोपा हुआ न लगे

सोर्स बताते हैं कि सिर्फ विधायकों की संख्या के आधार पर फैसला करना होता, तो नतीजों के बाद 2 दिन में ही CM चुन लेते। हाईकमान विधायकों, पार्टी के नेताओं और समर्थकों की राय जानने की कोशिश कर रहा था।

राहुल गांधी दिल्ली से CM चुनकर नहीं भेजना चाहते थे। वे चाहते थे कि सबकी सहमति से फैसला हो। सहयोगी दलों और सिविल सोसायटी की भी राय ली गई। राहुल गांधी 3 दिन में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ और पूर्व अध्यक्षों से अलग-अलग मिले।

इसके बाद ये तीन सिनेरियो बने…

1. 50% सहमति वेणुगोपाल के नाम पर

राहुल गांधी की पहली पसंद केसी वेणुगोपाल थे, लेकिन उनके लिए कांग्रेस नेताओं का फीडबैक अच्छा नहीं था। राहुल गांधी कोई चूक नहीं होने देना चाहते थे, इसलिए सबसे मिलकर नाम तय करने में जुटे रहे।

वेणुगोपाल विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े थे। वे CM बनते, तो उनके लिए उपचुनाव होता। वेणुगोपाल केरल की अलप्पुझा सीट से सांसद हैं। उन्हें इस्तीफा देकर, फिर विधायक चुनकर आना होता, यानी पार्टी को दो सीटों पर चुनाव में उतरना पड़ता। अभी ये रिस्क लेना आसान नहीं होता।

2. 40% सहमति सतीशन के नाम पर

वीडी सतीशन 5 साल से विपक्ष के नेता थे। लेफ्ट सरकार को घेरते रहे। सतीशन के चेहरे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन UDF ने चुनाव लड़ा। उनका ग्राउंड कनेक्ट अच्छा है। 22 सीटें जीतने वाली सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग भी सतीशन के नाम पर राजी थी। अगर हाईकमान किसी और का नाम फाइनल करता, तो गठबंधन पर आंच आ सकती थी।

पहले कांग्रेस में सतीशन के नाम पर सहमति बनी थी, इसलिए केसी वेणुगोपाल को चुनाव नहीं लड़ाया गया। चुनाव के बाद विधायकों ने केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया, उससे सतीशन की सरकार चलाने की क्षमता पर सवाल भी उठा, लेकिन आखिर हाईकमान ने उनका नाम फाइनल कर दिया।

3. 10% सहमति रमेश चेन्नीथला के नाम पर

राज्य के सबसे सीनियर लीडर रमेश चेन्नीथला का नाम तीसरे नंबर पर था। अगर केसी वेणुगोपाल रमेश चेन्नीथला का समर्थन कर देते, तो समीकरण बदल जाते। सतीशन भी वरिष्ठ होने की वजह से चेन्नीथला का विरोध नहीं कर पाते और विधायकों का समर्थन चेन्नीथला के पक्ष में चला जाता, लेकिन उनके नाम पर सहमति नहीं बन पाई।

वायनाड में पोस्टर- राहुल-प्रियंका यहां से दोबारा नहीं जीत पाओगे

कांग्रेस में टूट का एक संकेत वायनाड से मिला। ये 15 साल में कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट है। 2019 में राहुल गांधी अमेठी से हारे, लेकिन वायनाड से 4.3 लाख वोट से जीते। अब यहां पोस्टर लगे हैं- राहुल और प्रियंका वायनाड को भूल जाओ, यहां फिर नहीं जीतोगे। वायनाड अगला अमेठी होगा।

ये पोस्टर कांग्रेस समर्थकों ने लगाए थे। उन्होंने हाईकमान को चेताया कि केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया, तो ठीक नहीं होगा।

वायनाड के अलावा केरलम में अलग-अलग शहरों में ऐसे पोस्टर लगाए गए थे। इनमें लिखा है कि अगर केसी वेणुगोपाल को CM बनाया तो ये बड़ी गलती होगी।

वायनाड के अलावा केरलम में अलग-अलग शहरों में ऐसे पोस्टर लगाए गए थे। इनमें लिखा है कि अगर केसी वेणुगोपाल को CM बनाया तो ये बड़ी गलती होगी।

एक्सपर्ट: कांग्रेस के पास अच्छे मैनेजर नहीं, इसलिए राहुल-प्रियंका फंसे

  • बहुमत के बाद भी CM तय करने में 10 दिन लगने पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि कांग्रेस में अब कोई मैनेजर नहीं है। पहले अहमद पटेल या गुलाम नबी आजाद जैसे नेता सब तैयारी कर लेते थे और CM का चुनाव हो जाता था। केरलम के मामले में राहुल-प्रियंका फंस गए क्योंकि उनके पास इसका अनुभव नहीं है।
  • रशीद कहते हैं कि कांग्रेस ने राज्यों में CM चुनने का कोई फॉर्मूला नहीं बनाया है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और कर्नाटक में यही दुविधा रही। आज तक तय नहीं हो पाया कि कांग्रेस जीते हुए राज्यों में CM कैसे चुनेगी।

वहीं, कांग्रेस को लंबे वक्त तक कवर करने वाले जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं कि हाईकमान के सामने संकट था कि विधायकों की सुने या समर्थकों की। इसलिए पूरी प्रक्रिया में समय लगा।

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