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Fri, Oct 9, 2026Updated 7:46 AM IST
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किशनगंज: मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन में तीन शिक्षकों की कथित फर्जी बहाली, BEO की जांच रिपोर्ट में खुलीं कई गड़बड़ियां, DEO को सौंपी गई रिपोर्ट

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बिहार के किशनगंज जिले से मदरसा शिक्षा प्रणाली में एक बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। ठाकुरगंज नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन, जिसका आधिकारिक मदरसा संख्या 528 है, वहां तीन शिक्षकों की कथित तौर पर फर्जी बहाली किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया था। इस मामले ने अब पूरी तरह से तूल पकड़ लिया है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन तीनों शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच खंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) द्वारा की गई। जांच के दौरान प्रथम दृष्टया कई अनियमितताएं और गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसके बाद बीईओ ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को सौंप दी है, ताकि इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मामले की शुरुआत तब हुई जब किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर पंचायत अंतर्गत संचालित मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन (मदरसा संख्या-528) में कार्यरत तीन शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया गया कि इन तीनों शिक्षकों की बहाली नियमों को ताक पर रखकर और फर्जी तरीके से की गई है। मदरसों में सरकारी अनुदान और मान्यता के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति होती है, ऐसे में किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़ा न केवल शिक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है, बल्कि सरकारी खजाने के दुरुपयोग का भी मामला बन जाता है। इन्हीं आरोपों के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे।

जांच की जिम्मेदारी संबंधित प्रखंड के खंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को सौंपी गई थी। बीईओ ने मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन पहुंचकर दस्तावेजों, नियुक्ति पत्रों और अन्य संबंधित कागजातों का बारीकी से सत्यापन किया। जांच प्रक्रिया के दौरान बीईओ ने प्रथम दृष्टया पाया कि इन तीनों शिक्षकों की बहाली में कई अनियमितताएं पाई गई हैं। हालांकि, स्रोत जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये अनियमितताएं किन विशिष्ट दस्तावेजों या नियमों के उल्लंघन से जुड़ी हैं, लेकिन इतना तय है कि जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बाद ही यह रिपोर्ट उच्च अधिकारियों तक भेजी गई है। प्रथम दृष्टया अनियमितताएं मिलने का मतलब है कि शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों में दम हो सकता है और नियुक्ति प्रक्रिया में मानकों की अनदेखी की गई है।

जांच पूरी करने और गड़बड़ियों की पहचान करने के बाद, खंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट तैयार की और उसे किशनगंज के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को सौंप दिया है। डीईओ को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब इस पूरे मामले की अगली कड़ी जिला स्तर पर शुरू होगी। डीईओ द्वारा इस रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा और उसके आधार पर आगे की विभागीय या प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी। यदि डीईओ स्तर पर भी इन अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

बिहार में मदरसा शिक्षा बोर्ड और राज्य शिक्षा विभाग के तहत संचालित मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति एक संवेदनशील विषय रहा है। सरकार द्वारा मदरसों को मान्यता देने और शिक्षकों को वेतन देने की व्यवस्था है, लेकिन समय-समय पर फर्जी नियुक्तियों और कागजों पर हेराफेरी के मामले सामने आते रहे हैं। किशनगंज जिला, जो कि बिहार का सीमावर्ती और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है, वहां मदरसों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में ठाकुरगंज नगर पंचायत के मदरसा संख्या-528 में हुई इस कथित फर्जी बहाली ने पूरे जिले के मदरसा प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे प्रकरण में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) इस रिपोर्ट पर क्या अंतिम फैसला लेंगे या कार्रवाई की क्या समयसीमा तय की जाएगी। साथ ही, यह भी जानकारी उपलब्ध नहीं है कि आरोपी तीनों शिक्षकों की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए कोई सफाई दी गई है या नहीं। चूंकि बीईओ की रिपोर्ट में ‘प्रथम दृष्टया’ अनियमितताओं का जिक्र है, इसलिए इसे अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आगे की जांच और डीईओ के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियुक्ति वास्तव में फर्जी थी या इसमें कोई प्रशासनिक चूक हुई थी।

वहीं, स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस खबर को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है, क्योंकि यदि शिक्षकों की नियुक्ति ही फर्जी तरीके से हुई है, तो शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ना स्वाभाविक है। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही डीईओ कार्यालय से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की जानकारी मिलेगी, उसे अपडेट किया जाएगा। फिलहाल, बीईओ की जांच रिपोर्ट डीईओ को सौंपे जाने के बाद यह मामला विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।