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Mon, Oct 12, 2026Updated 4:01 PM IST
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करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग को लेकर डेरा बाबा नानक में संगत ने की सामूहिक अरदास, वाघा बॉर्डर खुलने पर भी बंद रखने पर उठाए सवाल

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वंदे भारत न्यूज़, गुरदासपुर। पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सिख श्रद्धालुओं और संगत द्वारा पाकिस्तान में स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग को लेकर एक सामूहिक अरदास का आयोजन किया गया। लंबे समय से चली आ रही सिख श्रद्धालुओं की आस्था और उनकी लगातार की जा रही मांग को ध्यान में रखते हुए दर्शन अभिलाषी संस्था के नेताओं और बड़ी संख्या में पहुंची संगत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित दर्शन स्थल पर इकट्ठा होकर यह विशेष अरदास की। इस दौरान संगत ने डेरा बाबा नानक में सीमा की बाड़ के पास खड़े होकर ही श्री करतारपुर साहिब की दिशा में अपना मुख करके वाहेगुरु के चरणों में प्रार्थना की और कॉरिडोर को शीघ्र खोले जाने की गुहार लगाई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दर्शन अभिलाषी संस्था के पदाधिकारियों और सिख संगत ने इस मौके पर स्पष्ट रूप से कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भावनाओं और मांगों को सरकारों तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब सिख समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक महत्व का स्थल है, जहां सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन का अंतिम समय बिताया था। इसी कारण दुनिया भर के सिख श्रद्धालुओं की गहरी आस्था इस स्थान से जुड़ी हुई है। संगत का कहना था कि वे रोज़ाना सीमा पर आकर दूर से ही गुरुद्वारे के दर्शन करते हैं, लेकिन कॉरिडोर बंद होने के कारण वे वहां जाकर मत्था टेकने से वंचित हैं।

इस सामूहिक अरदास कार्यक्रम के दौरान संगत और दर्शन अभिलाषी संस्था के नेताओं ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब वाघा-अटारी बॉर्डर को खोल दिया गया है और वहां दोनों देशों के बीच आवाजाही शुरू हो चुकी है, तो फिर करतारपुर कॉरिडोर को अभी तक बंद क्यों रखा गया है। उन्होंने इस बात पर गहरी निराशा व्यक्त की कि अन्य मार्गों पर यातायात और गतिविधियां सामान्य होने के बावजूद श्रद्धालुओं के लिए इस विशेष कॉरिडोर को नहीं खोला जा रहा है। संगत ने पूछा कि क्या धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं की भावनाओं को अन्य मामलों से कम महत्व दिया जा रहा है। उनका तर्क था कि यदि सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर वाघा बॉर्डर को खोलना संभव है, तो करतारपुर कॉरिडोर को खोलने में भी कोई व्यवहारिक कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

ज्ञात हो कि करतारपुर कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक पहल के तहत बनाया गया था, जिसका उद्देश्य भारतीय सिख श्रद्धालुओं को बिना वीजा के पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन करने की सुविधा प्रदान करना था। डेरा बाबा नानक से लेकर पाकिस्तान की सीमा में स्थित गुरुद्वारे तक यह कॉरिडोर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। हालांकि, कुछ समय से यह कॉरिडोर बंद पड़ा है, जिसके कारण श्रद्धालुओं को भारी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। कई बार विभिन्न सिख संगठनों और संस्थाओं द्वारा इसे खोलने की मांग की जाती रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया नहीं गया है।

दर्शन अभिलाषी संस्था के नेताओं ने इस अवसर पर कहा कि उनकी यह अरदास केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह लाखों सिख श्रद्धालुओं की उस पीड़ा और व्याकुलता का प्रतीक है जो वे हर दिन गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन न कर पाने के कारण महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि संगत ने पूरी श्रद्धा और शांति के साथ वाहेगुरु से प्रार्थना की है कि जल्द से जल्द ऐसे हालात बनें ताकि कॉरिडोर को दोबारा खोला जा सके और श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के गुरुद्वारा साहिब में जाकर माथा टेक सकें।

डेरा बाबा नानक के दर्शन स्थल पर आयोजित इस अरदास में शामिल हुए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पिछले काफी समय से इस मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों तक पहुंच सुनिश्चित करना हर श्रद्धालु का अधिकार है और इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ के पास खड़े होकर करतारपुर साहिब की ओर देखना और वहीं से प्रार्थना करना श्रद्धालुओं की मजबूरी बन गई है, जिसे वे जल्द से जल्द समाप्त होते देखना चाहते हैं।

इस संबंध में फिलहाल भारत या पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर वर्तमान में कोई कूटनीतिक बातचीत चल रही है या नहीं। हालांकि, संगत और दर्शन अभिलाषी संस्था ने उम्मीद जताई है कि उनकी इस शांतिपूर्ण अरदास और लगातार उठाई जा रही मांग का संज्ञान लिया जाएगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और पाकिस्तान के साथ बातचीत कर कॉरिडोर को फिर से शुरू करवाने की दिशा में पहल करें, ताकि सिख श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो सके और उन्हें अपने पवित्र स्थल के दर्शन करने का अवसर मिल सके।