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Mon, Oct 12, 2026Updated 5:09 PM IST
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कटिहार: अवैध आरा मिलों पर छापेमारी करने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक, गाड़ियों के शीशे तोड़े; 3 मिलें सील

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बिहार के कटिहार जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिले के मनिहारी थाना क्षेत्र के मनोहरपुर इलाके में अवैध आरा मिलों पर कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम को स्थानीय ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। इस दौरान उग्र हुए ग्रामीणों ने वन विभाग की गाड़ियों के शीशे भी तोड़ दिए। मामले की सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान तीन अवैध आरा मिलों को बंद करा दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला कटिहार जिले के मनिहारी थाना क्षेत्र अंतर्गत मनोहरपुर का है। वन विभाग की एक टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि मनोहरपुर इलाके में कुछ लोग बिना किसी वैध अनुमति के अवैध रूप से आरा मिलों का संचालन कर रहे हैं। इन अवैध आरा मिलों के माध्यम से पेड़ों की कटाई की जा रही थी, जो वन अधिनियम और पर्यावरण नियमों का सीधा उल्लंघन था। इसी सूचना के आधार पर वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी टीम तैयार की और अवैध आरा मिलों पर छापेमारी करने के लिए मनोहरपुर की ओर रवाना हुए।

जैसे ही वन विभाग की टीम मनोहरपुर पहुंची और अवैध आरा मिलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया, वहां पहले से मौजूद स्थानीय लोगों ने इसका तीव्र विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई और उन्होंने वन विभाग की टीम का रास्ता रोक लिया। विरोध करने वाले ग्रामीणों का कहना था कि वे इस कार्रवाई को नहीं होने देंगे। जब वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें समझाने और कानूनी प्रक्रिया के बारे में बताने का प्रयास किया, तो ग्रामीण और अधिक उग्र हो गए।

इस तनाव के बीच स्थिति तेजी से बिगड़ गई और उग्र ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को वहीं बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने न केवल टीम को रोककर रखा, बल्कि उनके साथ अभद्रता भी की गई। इस हिंसक विरोध के दौरान ग्रामीणों ने वन विभाग की सरकारी गाड़ियों पर हमला बोल दिया और गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने की इस घटना से साफ जाहिर होता है कि ग्रामीण किस हद तक उग्र हो चुके थे और वे वन विभाग की कानूनी कार्रवाई को रोकने के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार थे।

वन विभाग की टीम के बंधक बनाए जाने और गाड़ियों में तोड़फोड़ की सूचना जैसे ही उच्च अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को मिली, तुरंत हरकत में आते हुए मनिहारी थाने की पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया। चूंकि ग्रामीणों की भीड़ काफी बड़ी और आक्रामक थी, इसलिए स्थिति को संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। पुलिस के पहुंचने के बाद ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का लंबा दौर चला और बड़ी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।

हालांकि, इस भारी विरोध और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने अपना लक्ष्य पूरी तरह नहीं छोड़ा। छापेमारी के दौरान वन विभाग की टीम ने मनोहरपुर में चल रही कुल तीन अवैध आरा मिलों का पता लगाया और उन्हें बंद करा दिया। इन तीनों मिलों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया गया है, ताकि भविष्य में वहां कोई अवैध कटाई या आरा मिल का संचालन न हो सके। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध आरा मिलों के खिलाफ उनका अभियान लगातार जारी रहेगा और चाहे जो भी बाधा आए, कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस घटना के बाद मनिहारी थाना क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस प्रशासन द्वारा इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना दोबारा न घटे। वन विभाग की टीम पर हुए हमले, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। अभी तक इस मामले में किसी विशिष्ट व्यक्ति की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस उपद्रवी ग्रामीणों की पहचान करने में जुटी हुई है।

गौरतलब है कि बिहार के कई जिलों में, विशेषकर सीमांचल और पूर्णिया प्रमंडल के क्षेत्रों में, अवैध आरा मिलों का संचालन एक बड़ी समस्या रहा है। ये मिलें न केवल वनों की अवैध कटाई को बढ़ावा देती हैं, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाती हैं। वन विभाग समय-समय पर ऐसे अवैध धंधों के खिलाफ छापेमारी करता रहता है, लेकिन मनोहरपुर में हुई यह घटना दर्शाती है कि अवैध आरा मिल संचालकों और स्थानीय लोगों के बीच किस प्रकार का गठजोड़ हो सकता है, जिसके चलते वे सरकारी अधिकारियों पर हमला करने से भी नहीं चूकते।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य के निर्वहन से रोकना, उन्हें बंधक बनाना और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। फिलहाल, पुलिस और वन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं और आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं।