कुदरा में हेमचंद्र विक्रमादित्य का 470वां विजय दिवस मनाया गया, वक्ताओं ने 22 युद्ध जीतने की याद दिलाई

बिहार के कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड स्थित लालापुर में हिंदुओं के अंतिम सम्राट कहे जाने वाले हेमचंद्र विक्रमादित्य, जिन्हें आम तौर पर हेमू के नाम से जाना जाता है, का 470वां विजय दिवस बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। यह भव्य कार्यक्रम कुदरा के शगुन लॉन, लालापुर में आयोजित किया गया। इस विशेष आयोजन का संचालन अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा की ओर से किया गया, जिसमें समाज के बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और महान योद्धा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा के जिलाध्यक्ष राजदेव प्रसाद गुप्ता ने की। उनके मार्गदर्शन में पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ। वहीं, मंच का संचालन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता मंगल गुप्ता ने किया। मंच संचालन के दौरान उन्होंने उपस्थित जनसमूह को हेमू के जीवन, उनके संघर्षों और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में शामिल हुए वक्ताओं ने अपने संबोधनों में सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य की वीरगाथा का विस्तृत वर्णन किया।
कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधित करने वाले वक्ताओं ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हेमू ने अपने जीवनकाल में लगातार 22 युद्ध लड़े और उन सभी में विजय प्राप्त की। वक्ताओं ने बताया कि यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उस समय की कठिन राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों में यह एक अद्वितीय शौर्य का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि हेमू की सैन्य रणनीति, नेतृत्व क्षमता और अदम्य साहस ने उन्हें भारतीय इतिहास के सबसे महान योद्धाओं की श्रेणी में स्थापित किया है। 22 युद्धों में निरंतर जीत हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा और युद्ध कौशल का स्पष्ट प्रमाण है।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में उपस्थित लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी से अपील की कि वे सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य के आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि आज के समय में हेमू के जीवन से प्रेरणा लेने की अत्यंत आवश्यकता है। उनके आदर्शों में देशभक्ति, साहस, न्यायप्रियता और समाज के प्रति समर्पण जैसे गुण शामिल हैं। वक्ताओं ने आह्वान किया कि हमें अपने पूर्वजों की इस गौरवशाली विरासत को भूलना नहीं चाहिए, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। हेमू के पदचिह्नों पर चलकर ही समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव हो सकता है।
अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के भीतर ऐतिहासिक जागरूकता पैदा करना और अपने गौरवशाली अतीत से लोगों को जोड़ना था। महासभा के जिलाध्यक्ष राजदेव प्रसाद गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। महासभा लगातार ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज को एकजुट करने और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को सम्मान देने का कार्य करती रही है। कुदरा के शगुन लॉन में आयोजित यह कार्यक्रम इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
कार्यक्रम में मंच संचालन कर रहे भाजपा नेता मंगल गुप्ता ने भी हेमू के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास में ऐसे कई वीर योद्धा हुए हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। हेमचंद्र विक्रमादित्य उन्हीं महान विभूतियों में से एक हैं, जिन्होंने सोलहवीं शताब्दी में एक सामान्य पृष्ठभूमि से उठकर सम्राट का पद प्राप्त किया। उनके इस सफर में अनेक चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने अपने दृढ़ निश्चय और वीरता से हर बाधा को पार किया।
इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार, हेमचंद्र विक्रमादित्य का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उनकी प्रतिभा और कर्मठता ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया जहां उन्होंने दिल्ली के सिंहासन पर अधिकार किया। उन्हें हिंदू धर्म के अंतिम सम्राट के रूप में भी इतिहास में दर्ज किया गया है। 470 वर्ष पूर्व प्राप्त की गई उनकी विजय को याद करने के लिए ही हर वर्ष विजय दिवस के रूप में आयोजन किए जाते हैं। कुदरा के लालापुर में मनाया गया यह 470वां विजय दिवस इसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास था।
इस अवसर पर कुदरा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शगुन लॉन पहुंचे। कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने हेमू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उपस्थित जनसमूह में एक विशेष उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली। लोगों ने वक्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना और हेमू के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन शांतिपूर्ण वातावरण में हुआ।
कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड में अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक घटना बन गया। राजदेव प्रसाद गुप्ता और मंगल गुप्ता सहित सभी आयोजकों के प्रयासों से यह 470वां विजय दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल हेमचंद्र विक्रमादित्य की स्मृति को ताजा किया, बल्कि समाज में एकता और ऐतिहासिक गौरव की भावना को भी सुदृढ़ किया।

