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Sun, Oct 11, 2026Updated 3:09 PM IST
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लुधियाना की सेंट्रल और बोरस्टल जेल में नशीले पदार्थों की बड़ी बरामदगी, हेरोइन और नशीले कैप्सूल जब्त; दो पेस्को कर्मचारियों सहित छह आरोपी

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लुधियाना। पंजाब के लुधियाना जिले में स्थित सेंट्रल जेल और बोरस्टल जेल से एक ही दिन हुई चेकिंग के दौरान नशीले पदार्थों की दो बड़ी बरामदगी सामने आई है। इस कार्रवाई ने जेल के भीतर सक्रिय नशा तस्करी के नेटवर्क को उजागर किया है। पुलिस ने दोनों मामलों में कुल छह लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें बिजली बोर्ड यानी पेस्को (PESCO) के दो कर्मचारी भी शामिल हैं। इन दोनों पेस्को कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लुधियाना की सेंट्रल जेल और बोरस्टल जेल में एक ही दिन विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस चेकिंग के दौरान अधिकारियों को दोनों जेलों में नशीले पदार्थ मिले। सेंट्रल जेल में तलाशी के दौरान हेरोइन बरामद की गई, जबकि बोरस्टल जेल में नशीले कैप्सूल जब्त किए गए। एक ही दिन में दोनों प्रमुख जेलों से नशीले पदार्थों की यह बरामदगी बेहद चौंकाने वाली मानी जा रही है। यह स्पष्ट करता है कि जेल की ऊंची दीवारों के पीछे भी नशे का कारोबार किस तरह फल-फूल रहा है और तस्कर किस प्रकार सुरक्षा घेरे को भेदकर अंदर तक प्रतिबंधित वस्तुएं पहुंचाने में कामयाब हो रहे हैं।

इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों जेलों से जुड़े मामलों में कुल छह व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। इन आरोपियों में सबसे ध्यान खींचने वाला पहलू यह है कि इनमें बिजली विभाग यानी पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पेस्को) के दो कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस ने इन दोनों पेस्को कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। माना जा रहा है कि ये कर्मचारी जेल में बिजली संबंधी काम या रखरखाव के बहाने अंदर आते-जाते थे और इसी सुविधा का दुरुपयोग करके वे नशीले पदार्थों की तस्करी में संलिप्त थे। हालांकि, बाकी चार आरोपियों की भूमिका और उनकी पहचान को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता का खुलासा होने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पेस्को कर्मचारियों की गिरफ्तारी यह इशारा करती है कि नशा तस्करों ने जेल के भीतर अपना नेटवर्क चलाने के लिए बाहरी एजेंसियों और उनके कर्मचारियों की मदद लेनी शुरू कर दी है। बिजली कर्मचारी जेल परिसर में नियमित रूप से काम के लिए प्रवेश करते हैं, जिसके कारण उनकी चेकिंग में ढिलाई का फायदा उठाया जा सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या ये पेस्को कर्मचारी किसी बड़े नशा तस्करी रैकेट का हिस्सा थे या उन्होंने व्यक्तिगत लाभ के लिए यह कदम उठाया था।

पंजाब में नशे की समस्या पहले से ही एक गंभीर चुनौती रही है और जेलों के भीतर नशीले पदार्थों की बरामदगी की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। लेकिन लुधियाना की सेंट्रल और बोरस्टल जेल में एक ही दिन दो अलग-अलग बरामदगी होना और उसमें सरकारी कर्मचारियों का नाम आना इसे एक संगठित अपराध की श्रेणी में ला देता है। जेल में बंद अपराधी कई बार बाहर बैठे अपने साथियों के साथ मिलकर ऐसे नेटवर्क चलाते हैं, जिसमें नशे की खेप जेल के अंदर पहुंचाई जाती है और वहां से बाहर भी सप्लाई की जाती है।

पुलिस ने दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। जांच टीम अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हेरोइन और नशीले कैप्सूल जेल के अंदर कैसे पहुंचे और इनका असली मालिक कौन है। गिरफ्तार किए गए दोनों पेस्को कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे नशा तस्करी नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या जेल के किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत से यह काम हो रहा था।

इस घटना के बाद जेल प्रशासन के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने की जरूरत महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जेल में प्रवेश करने वाले सभी बाहरी कर्मचारियों, चाहे वे किसी भी सरकारी विभाग या निजी एजेंसी के हों, उनकी सघन तलाशी होनी चाहिए। इसके अलावा, जेल के अंदर नियमित और आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि ऐसे नेटवर्क को पनपने से रोका जा सके। लुधियाना पुलिस की इस कार्रवाई को नशा तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि जेलों को नशा मुक्त बनाने के लिए अभी और भी कड़े एवं प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। फिलहाल, पुलिस द्वारा आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।