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Mon, Oct 12, 2026Updated 1:20 PM IST
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लुधियाना: सीएम ऑफिस की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने ताजपुर रोड स्थित क्लीनिक पर की छापेमारी, बिना बिल की दवाइयां जब्त

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वन्दे भारत न्यूज़, लुधियाना। पंजाब के लुधियाना जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए ताजपुर रोड स्थित जीवन सिंह नगर इलाके में संचालित एक क्लीनिक पर अचानक छापेमारी की है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएम ऑफिस) से प्राप्त एक लिखित शिकायत और जिला सिविल सर्जन के स्पष्ट निर्देशों के आधार पर की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्लीनिक का गहन निरीक्षण किया और जांच के दौरान पाई गई अनियमितताओं के आधार पर बिना बिल की दवाइयां जब्त कर ली हैं। इसके साथ ही, दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उनके सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लुधियाना के ताजपुर रोड पर स्थित जीवन सिंह नगर इलाके में एक क्लीनिक संचालित किया जा रहा था। इस क्लीनिक के खिलाफ मुख्यमंत्री कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय से यह शिकायत जब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संज्ञान लिया गया। जिला सिविल सर्जन ने इस शिकायत के आधार पर संबंधित क्लीनिक की जांच के लिए विशेष आदेश जारी किए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर अचानक छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया।

छापेमारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिक में रखी दवाइयों और अन्य चिकित्सा सामग्री की बारीकी से जांच की। इस जांच में पाया गया कि क्लीनिक में कई दवाइयां ऐसी मौजूद थीं, जिनके खरीद के कोई वैध बिल या रसीदें उपलब्ध नहीं थीं। नियमानुसार किसी भी चिकित्सा केंद्र या क्लीनिक में उपयोग की जाने वाली दवाइयों की खरीद के प्रमाण पत्र और बिल रखना अनिवार्य होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दवाइयां मान्यता प्राप्त और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही खरीदी गई हैं। बिना बिल की दवाइयां मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन दवाइयों को अपने कब्जे में ले लिया और उन्हें जब्त कर लिया गया।

दवाइयों को जब्त करने के अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की सुरक्षा और दवाइयों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए जब्त की गई दवाइयों के सैंपल भी लिए हैं। इन सैंपलों को विस्तृत जांच के लिए संबंधित प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्लीनिक में मरीजों को दी जा रही दवाइयां मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं। यदि जांच में दवाइयों की गुणवत्ता में कोई कमी या मिलावट पाई जाती है, तो क्लीनिक संचालक के खिलाफ और भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों और चिकित्सा क्षेत्र में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ लगातार सख्ती बरत रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुंची शिकायत पर त्वरित कार्रवाई यह दर्शाती है कि प्रशासन जनता की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर पूरी तरह सतर्क है। आम लोगों की शिकायतों पर उच्च स्तर से संज्ञान लिया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ बिना किसी देरी के कदम उठाए जा रहे हैं।

स्रोत के अनुसार, फिलहाल क्लीनिक संचालक की ओर से इस छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अपनी प्राथमिक जांच पूरी कर ली है और जब्त की गई दवाइयों तथा लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। सिविल सर्जन के निर्देशों पर हुई इस कार्रवाई से ताजपुर रोड और जीवन सिंह नगर इलाके में संचालित अन्य क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर संचालकों में भी हड़कंप की स्थिति देखी गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार की छापेमारी अभियान जारी रहेंगे। जो भी क्लीनिक या चिकित्सा केंद्र नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी अनियमितता या अवैध चिकित्सा गतिविधि की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय को दें, ताकि लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। वन्दे भारत न्यूज़ की यह रिपोर्ट उपलब्ध स्रोत जानकारी पर आधारित है और मामले की आगे की जांच रिपोर्ट आने पर और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।