लुधियाना स्ट्रीट लाइट घोटाला: कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्व OSD समेत तीन आरोपियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से मिली राहत, 65 लाख के कथित गबन मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक

चंडीगढ़/लुधियाना। पंजाब के लुधियाना जिले के गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर हुए 65 लाख रुपये के कथित गबन और भ्रष्टाचार मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में शामिल तीनों आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की आगे की कानूनी कार्रवाई पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी है। इन तीनों आरोपियों में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्व ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) संदीप सिंह संधू का नाम भी शामिल है। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है और आरोपियों को अस्थायी तौर पर बड़ी राहत मिली है।
इस पूरे मामले की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ की एकल पीठ के समक्ष हुई। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने तीनों आरोपियों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर विस्तार से सुनवाई करने के बाद यह अंतरिम आदेश जारी किए हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले में अगली सुनवाई नहीं होती और कोई नया निर्देश नहीं दिया जाता, तब तक तीनों आरोपियों के खिलाफ इस भ्रष्टाचार मामले में कोई भी दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
आरोपियों की ओर से अदालत में जो पक्ष रखा गया, उसके अनुसार उनके खिलाफ जानबूझकर परेशान करने के इरादे से कार्रवाई की जा रही थी। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के समक्ष यह गंभीर आरोप भी लगाया कि उन पर इस मामले में सप्लीमेंट्री चालान (पूरक आरोप पत्र) दाखिल करने के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा था। आरोपियों का कहना था कि बिना पर्याप्त साक्ष्यों और कानूनी औचित्य के उन पर पूरक चालान का बोझ डालने की कोशिश की जा रही है, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
यह मामला मूल रूप से लुधियाना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लुधियाना के गांवों में स्ट्रीट लाइट (सड़क की बत्तियां) लगाने के लिए सरकारी खजाने से करीब 65 लाख रुपये जारी किए गए थे। हालांकि, बाद में यह आरोप सामने आया कि इन फंडों का उपयोग उनके निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया और इस राशि का कथित रूप से गबन कर लिया गया। इसी कथित घोटाले के आधार पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल के दौरान उनके OSD रहे संदीप सिंह संधू सहित तीन लोगों को आरोपी बनाया गया था।
पंजाब की राजनीति में OSD की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। मुख्यमंत्री के OSD सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यों, फाइलों के निस्तारण और सरकारी योजनाओं की निगरानी में शामिल होते हैं। ऐसे में, जब किसी पूर्व OSD का नाम किसी वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के मामले में सामने आता है, तो यह न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील हो जाता है। संदीप सिंह संधू कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके विशेष अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। अब इस मामले में उन्हें हाईकोर्ट से मिली राहत को राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भ्रष्टाचार के मामलों में सप्लीमेंट्री चालान एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। जब जांच एजेंसी को अपनी प्राथमिक जांच के बाद कुछ नए तथ्य, सबूत या अन्य आरोपियों की संलिप्तता का पता चलता है, तो वह मूल आरोप पत्र के अलावा पूरक चालान अदालत में पेश करती है। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में यही तर्क दिया कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए उन पर दबाव बनाया जा रहा था। अदालत ने इस तर्क को संज्ञान में लेते हुए फिलहाल स्थिति को यथावत रखने और आरोपियों के खिलाफ कोई नई कठोर कार्रवाई न करने का आदेश दिया है।
लुधियाना पंजाब का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर है, लेकिन इसके साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कई चुनौतियां रही हैं। गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना ग्रामीण विकास और सुरक्षा के लिहाज से शुरू की गई थी ताकि रात के समय ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी न हो। 65 लाख रुपये की यह राशि इसी योजना के तहत आवंटित की गई थी। कथित गबन के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी इसकी काफी चर्चा हुई थी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के इस अंतरिम आदेश के बाद यह देखना होगा कि जांच एजेंसियां अपना अगला कदम कैसे उठाती हैं। चूंकि अदालत ने आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है, इसलिए जांच एजेंसी को अब अदालत के अगले आदेश का इंतजार करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन जब भी यह मामला फिर से जस्टिस संजय वशिष्ठ की अदालत में सूचीबद्ध होगा, तब जांच एजेंसी और याचिकाकर्ताओं दोनों को अपने-अपने पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में सामने आए कई प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में से एक है। पूर्व OSD संदीप सिंह संधू और अन्य दो आरोपियों को मिली यह कानूनी राहत फिलहाल अस्थायी है और मामले का अंतिम निपटारा अदालत के अंतिम फैसले पर ही निर्भर करेगा। ग्रामीण विकास योजनाओं में होने वाले कथित घोटालों को लेकर आम जनता और प्रशासन दोनों की नजरें अब इस मामले की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

