Thu, 08 Oct 202612:56 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 12:56 PM IST
होम › पंजाब

मानसा: गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी में चढ़ावे की गिनती को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने SGPC टीम का किया विरोध

WhatsAppFacebookX

पंजाब के मानसा जिले में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी में आज उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की एक बड़ी टीम वहां पहुंची। यह विवाद गुरुद्वारे में चढ़ावे की गिनती और दानपात्रों (गोलक) को उठाने की प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ। प्राप्त जानकारी के अनुसार, SGPC की लगभग 30 गाड़ियों में सवार होकर बड़ी संख्या में लोग गुरुद्वारा साहिब पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि इस टीम के सदस्य राइफल और डंडे लेकर आए थे, जिससे स्थानीय लोगों में भारी रोष और असुरक्षा की भावना पैदा हुई। ग्रामीणों ने SGPC टीम द्वारा गोलकें उठाने के प्रयास का खुलकर विरोध किया, जिसके कारण माहौल अत्यंत तनावपूर्ण हो गया।

घटनाक्रम के अनुसार, SGPC की टीम गुरुद्वारे में मौजूद दानपात्रों को अपने कब्जे में लेने या उन्हें उठाने के उद्देश्य से पहुंची थी। हालांकि, स्थानीय निवासियों और गुरुद्वारे से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों का कहना है कि बिना उचित सहमति या पूर्व सूचना के इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षाबलों और कर्मचारियों का आगमन अनुचित था। उनका आरोप है कि टीम के पास हथियार और लाठियां थीं, जो एक धार्मिक स्थल पर शांतिपूर्ण माहौल के लिए खतरनाक और अपमानजनक माना गया। इस कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और टीम को गोलकें उठाने से रोक दिया। दोनों पक्षों के बीच तनाव को देखते हुए क्षेत्र में कुछ समय के लिए अशांति का माहौल बना रहा।

यह विवाद केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह पंजाब में गुरुद्वारों के प्रबंधन और चढ़ावे की आय को लेकर चल रहे लंबे समय से विवादों की एक कड़ी है। SGPC और स्थानीय प्रबंधकीय कमेटियों या ग्रामीणों के बीच ऐसे टकराव पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी मानसा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। ऐसे में, चढ़ावे की गिनती और उसके प्रबंधन को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद न केवल प्रशासनिक समस्या है, बल्कि यह श्रद्धालुओं की आस्था और स्थानीय समुदाय की भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का विरोध इस बात का संकेत है कि वे गुरुद्वारे के प्रबंधन और वित्तीय मामलों में अपनी भूमिका और अधिकारों को लेकर संवेदनशील हैं।

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि SGPC टीम का इतने बड़े पैमाने पर आगमन और उनके पास हथियारों की मौजूदगी ने स्थानीय लोगों को आशंकित कर दिया। धार्मिक स्थलों पर आम तौर पर शांति और सेवा का वातावरण अपेक्षित होता है, इसलिए सुरक्षा उपकरणों के साथ टीम का आगमन कई लोगों को असंगत लगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि SGPC टीम के पास हथियार क्यों थे या क्या यह उनकी मानक परिचालन प्रक्रिया का हिस्सा था। वहीं, दूसरी ओर SGPC का पक्ष अभी तक पूरी तरह से सामने नहीं आया है कि उन्होंने इस विशेष कार्रवाई के लिए इतनी बड़ी टीम क्यों भेजी थी। चढ़ावे की गिनती एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन जब इसे लेकर विरोध और तनाव उत्पन्न होता है, तो यह प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वास की कमी की ओर इशारा करता है।

इस घटना ने एक बार फिर पंजाब में गुरुद्वारा प्रबंधन के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। स्थानीय स्तर पर ऐसे विवादों का समाधान निकालना आवश्यक है ताकि धार्मिक स्थलों की गरिमा और शांति बनी रहे। यदि प्रबंधन और स्थानीय समुदाय के बीच संवादहीनता या अविश्वास है, तो इसके परिणाम इस प्रकार के तनावपूर्ण दृश्यों के रूप में सामने आ सकते हैं। फिलहाल, मानसा पुलिस और प्रशासन की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण हो जाती है कि वे कैसे दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करें और भविष्य में ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति को रोकें। ग्रामीणों द्वारा किए गए विरोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी एकतरफा कार्रवाई को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।

आज की इस घटना ने यह भी रेखांकित किया है कि धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में स्थानीय हितधारकों की भागीदारी और सहमति कितनी महत्वपूर्ण है। जब भी कोई बाहरी एजेंसी या केंद्रीय निकाय किसी स्थानीय संस्था के मामलों में हस्तक्षेप करता है, तो उसे स्थानीय संवेदनाओं और परंपराओं का सम्मान करना अनिवार्य होता है। मानसा के गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी में हुआ यह टकराव इसी संतुलन की कमी का परिणाम प्रतीत होता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाता है या यह और अधिक जटिल रूप धारण करता है। फिलहाल, क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सभी पक्षों की निगाहें इस मामले के अगले विकासक्रम पर टिकी हैं।