मानसा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी में चढ़ावे की गिनती को लेकर विवाद, SGPC टीम और ग्रामीणों में तनाव

पंजाब के मानसा जिले में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी में आज उस समय माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया, जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की एक बड़ी टीम वहां पहुंची। यह पूरा विवाद गुरुद्वारे में रखे गए चढ़ावे की गिनती और दान पेटी यानी गोलक उठाने को लेकर शुरू हुआ। स्थानीय ग्रामीणों ने SGPC की टीम का कड़ा विरोध किया, जिसके कारण गुरुद्वारा परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल पैदा हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस घटनाक्रम से इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों की भारी भीड़ गुरुद्वारा साहिब की ओर दौड़ पड़ी।
ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, SGPC की टीम अचानक और बिना किसी पूर्व सूचना के करीब 30 गाड़ियों के काफिले में गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी पहुंची। इन वाहनों में बड़ी संख्या में लोग सवार थे। ग्रामीणों का दावा है कि इन गाड़ियों में आए कुछ लोगों के पास राइफलें और डंडे भी मौजूद थे। इस तरह से भारी तादाद में और हथियारों के साथ टीम के पहुंचने से स्थानीय संगत और गांव वालों में भय और रोष का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि SGPC की टीम का मुख्य उद्देश्य गुरुद्वारे में रखे गए गोलकों यानी दान पेटियों को उठाना था, जिसे लेकर उन्होंने सीधे तौर पर आपत्ति जताई।
जैसे ही SGPC की टीम ने गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश कर गोलक उठाने का प्रयास किया, वहां पहले से मौजूद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने इसका तीव्र विरोध करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट मत था कि गुरुद्वारे का चढ़ावा और उसकी गिनती का काम स्थानीय स्तर पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर से इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना और राइफल-डंडे लेकर पहुंचना किसी भी धार्मिक स्थल की शांति और मर्यादा के अनुकूल नहीं है। इस विरोध के बाद दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक की स्थिति उत्पन्न हो गई और माहौल बेहद गर्मा गया।
गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी मानसा जिले का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सिख धार्मिक स्थल है। इस गुरुद्वारे की अपनी अलग पहचान है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे से गुरुद्वारे के लंगर, प्रशासन और अन्य धार्मिक कार्यों का संचालन होता रहा है। ऐसे में चढ़ावे की गिनती और गोलकों के नियंत्रण को लेकर उठा यह विवाद न केवल प्रशासनिक बल्कि धार्मिक और सामाजिक रूप से भी बेहद संवेदनशील मामला बन गया है। स्थानीय संगत का मानना है कि ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनकी सहमति अनिवार्य होनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान गुरुद्वारा परिसर में तनाव इतना अधिक बढ़ गया कि आसपास के अन्य गांवों के लोगों को भी इसकी जानकारी मिली और वे भी गुरुद्वारा साहिब की तरफ आने लगे। 30 गाड़ियों में आए लोगों और स्थानीय ग्रामीणों के आमने-सामने होने से स्थिति किसी भी वक्त बिगड़ सकती थी। हालांकि, ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए शांतिपूर्ण लेकिन कड़े तरीके से अपने विरोध को दर्ज कराया और गोलक उठाने के प्रयास का विरोध किया।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) पंजाब और अन्य राज्यों में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रबंधन, देखभाल और संचालन के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च संस्था है। SGPC समय-समय पर विभिन्न गुरुद्वारों में जाकर चढ़ावे की गिनती, ऑडिट और प्रबंधन संबंधी कार्य करती रही है। हालांकि, कई बार स्थानीय प्रबंधक कमेटियों या ग्रामीणों के साथ चढ़ावे के नियंत्रण और गिनती के अधिकार को लेकर इस तरह के मतभेद सामने आते रहे हैं। मानसा के इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे में हुई आज की घटना भी इसी कड़ी का हिस्सा बताई जा रही है, जहां स्थानीय लोगों ने SGPC की कार्यप्रणाली और उनके पहुंचने के तरीके पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।
इस विवाद के बाद गुरुद्वारा साहिब बाबा भाई बहलो जी में चढ़ावे की गिनती का काम प्रभावित हुआ है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि SGPC की टीम ने ग्रामीणों के विरोध के बाद कोई वैकल्पिक कदम उठाया है या फिर टीम को बिना गोलक उठाए ही वापस लौटना पड़ा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की गई या क्या सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों ने इस घटना को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर इस प्रकार से बड़ी संख्या में लोगों का हथियारों के साथ पहुंचना पूरी संगत की आस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। उन्होंने मांग की है कि गुरुद्वारे के मामलों में स्थानीय संगत की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, SGPC की तरफ से इस विशेष घटना पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, इसलिए उनकी ओर से गोलक उठाने के पीछे का सटीक कारण या उनकी प्रतिक्रिया अभी अज्ञात है।
मानसा जिले में हुई इस घटना ने एक बार फिर गुरुद्वारा प्रबंधन और चढ़ावे के नियंत्रण को लेकर चल रहे विवादों को सतह पर ला दिया है। पंजाब में गुरुद्वारों का प्रबंधन हमेशा से ही एक संवेदनशील विषय रहा है और संगत की भावनाएं इसके साथ गहराई से जुड़ी होती हैं। ऐसे में ग्रामीणों और SGPC टीम के बीच हुए इस टकराव ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपने ऐतिहासिक गुरुद्वारे की मर्यादा और चढ़ावे के सही उपयोग को लेकर पूरी तरह सजग हैं और वे किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएंगे। फिलहाल पूरे मामले पर सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।

