मधुबनी के डॉ. कुणाल कौशल को गुवाहाटी में मिला सम्मान, ई-रक्तकोश प्रणाली के प्रशिक्षण में बिहार से केवल दो चिकित्सकों का हुआ था चयन

मधुबनी। वंदे भारत न्यूज़। जिले के स्वास्थ्य विभाग और विशेषकर सदर अस्पताल के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। मधुबनी सदर अस्पताल स्थित रक्त केंद्र (ब्लड बैंक) के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुणाल कौशल को असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें ई-रक्तकोश (E-Raktkosh) डिजिटल ब्लड रिकॉर्ड सिस्टम से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में उनकी भागीदारी और बेहतर प्रदर्शन के लिए दिया गया। इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण के लिए पूरे बिहार राज्य से केवल दो डॉक्टरों का ही चयन किया गया था, जिसमें डॉ. कुणाल कौशल का नाम शामिल रहा। यह चयन मधुबनी जिले के साथ-साथ समूचे बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. कुणाल कौशल वर्तमान में मधुबनी सदर अस्पताल के रक्त केंद्र में चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके कार्यक्षेत्र में रक्त संग्रहण, उसके सुरक्षित भंडारण और जरूरतमंद मरीजों तक सही समय पर रक्त पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी शामिल रहती है। इसी कार्यक्षेत्र में तकनीकी दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर ई-रक्तकोश प्रणाली का प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। इस प्रशिक्षण के लिए देश भर के विभिन्न राज्यों से योग्य चिकित्सकों का चयन किया गया। बिहार राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूरे प्रदेश से मात्र दो डॉक्टरों को चुना गया, जिसमें डॉ. कुणाल कौशल ने अपनी जगह बनाई।
गुवाहाटी में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रक्तदान और रक्त भंडारण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाना है। ई-रक्तकोश (E-Raktkosh) एक ऐसी ऑनलाइन प्रणाली है, जिसके माध्यम से ब्लड बैंक में खून का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाता है। अब तक कई जगहों पर रक्त का ब्योरा पारंपरिक या मैनुअल तरीके से रखा जाता रहा है, जिसमें त्रुटियों की संभावना अधिक होती है और आंकड़ों को तुरंत प्राप्त करना कठिन होता है। इस प्रशिक्षण में डॉक्टरों को यही सिखाया गया कि कैसे खून के हर यूनिट का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दर्ज किया जाए, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में रक्त की उपलब्धता की सटीक जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सके।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. कुणाल कौशल ने खून का रिकॉर्ड डिजिटल रखने की विस्तृत ट्रेनिंग ली। इस ट्रेनिंग में रक्तदाताओं के आंकड़ों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करने, रक्त के विभिन्न ग्रुप्स की उपलब्धता का रियल-टाइम ट्रैकिंग, रक्त की समाप्ति तिथि (एक्सपायरी डेट) का स्वचालित प्रबंधन और अस्पतालों के बीच रक्त के हस्तांतरण की डिजिटल प्रक्रिया जैसे अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया। ई-रक्तकोश प्रणाली के लागू होने से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि ब्लड बैंक में खून की कोई कमी न हो और जो रक्त उपलब्ध है, उसका सर्वोत्तम उपयोग किया जा सके। इसके अलावा, रक्त से संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने में भी यह डिजिटल प्रणाली अत्यंत कारगर साबित होगी।
गुवाहाटी में हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की समाप्ति पर डॉ. कुणाल कौशल को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और सीखने की लगन के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। बिहार जैसे बड़े राज्य से केवल दो प्रतिभागियों में से एक के रूप में उनका चयन होना और फिर वहां सम्मान प्राप्त करना, उनकी पेशेवर क्षमताओं का स्पष्ट प्रमाण है। डॉ. कौशल ने इस प्रशिक्षण के दौरान जो तकनीकी ज्ञान और अनुभव प्राप्त किए हैं, उसे अब वे मधुबनी सदर अस्पताल के रक्त केंद्र में लागू करेंगे।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ई-रक्तकोश जैसी प्रणालियों से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आती है, बल्कि मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में भी भारी सुधार होता है। जब रक्त का पूरा ब्योरा कंप्यूटरीकृत होगा, तो डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मैन्युअल रजिस्टर खोजने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। आपातकालीन स्थिति में, जैसे कि दुर्घटनाओं या प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर, मरीजों को तुरंत सही ग्रुप का रक्त उपलब्ध कराना बहुत आसान हो जाएगा।
डॉ. कुणाल कौशल के इस सम्मान से मधुबनी सदर अस्पताल के अन्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों में भी नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हुआ है। अस्पताल प्रबंधन और जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक गौरवशाली क्षण है कि उनके यहां पदस्थ एक चिकित्सा पदाधिकारी ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रशिक्षण के बाद मधुबनी सदर अस्पताल का रक्त केंद्र ई-रक्तकोश प्रणाली को अपनाने वाले जिले के अग्रणी स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल हो जाएगा। हालांकि, इस प्रणाली को पूरी तरह से लागू करने की सटीक समयसीमा के बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रशिक्षण पूरा हो जाने के बाद इसके शीघ्र क्रियान्वयन की संभावना व्यक्त की जा रही है।
डॉ. कुणाल कौशल द्वारा प्राप्त किए गए इस ज्ञान का लाभ भविष्य में न केवल सदर अस्पताल, बल्कि जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को भी मिल सकता है। यदि यह डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम सफलतापूर्वक लागू होता है, तो रक्तदान शिविरों के आयोजन और रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि दाताओं को अपने द्वारा किए गए रक्तदान का डिजिटल प्रमाणपत्र और रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। यह कदम बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।

