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Fri, Oct 9, 2026Updated 6:42 PM IST
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मध्य प्रदेश में 9 जिलों के पटवारियों पर कार्रवाई का विरोध: मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला, PRC दफ्तर में बुलाई गई बैठक

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भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना से जुड़े विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है। स्वामित्व योजना में निष्पादक यानी एग्जीक्यूटर की भूमिका से खुद को अलग करने की मांग कर रहे पटवारियों पर प्रदेश के नौ जिलों में कलेक्टरों द्वारा की जा रही कार्रवाई का मामला अब सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। पटवारियों के सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने और राजस्व कार्य ठप होने की स्थिति को देखते हुए गुरुवार को एक बार फिर प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय, भोपाल में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक जारी तनाव को कम करने और कोई रास्ता निकालने के मकसद से आयोजित की गई है।

वांडे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पटवारी संघ लगातार इस बात की मांग कर रहा है कि स्वामित्व योजना के तहत उन्हें निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए। पटवारियों का कहना है कि इस योजना के तहत उन पर काम का अत्यधिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे उनके नियमित राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसी मांग को लेकर पटवारियों ने विरोध का रास्ता अपनाया था। हालांकि, इस विरोध के बीच प्रदेश के नौ जिलों के कलेक्टरों ने पटवारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी। कलेक्टरों की इस कार्रवाई ने पटवारियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया और उन्होंने इसे अपनी मांगों को दबाने का प्रयास बताया।

नौ जिलों में कलेक्टरों द्वारा की गई कार्रवाई के बाद पटवारियों ने अपना विरोध और तेज कर दिया। इन प्रभावित जिलों में पटवारियों ने सामूहिक रूप से कामकाज बंद कर दिया, जिससे वहां का राजस्व शटडाउन हो गया। पटवारियों के काम रोक देने से आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों की रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी, नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व संबंधी जरूरी काम पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और आम लोगों को अपने जरूरी दस्तावेजों के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन पटवारियों के हड़ताल पर रहने के कारण कोई काम नहीं हो पा रहा है।

पटवारियों के सड़कों पर उतरकर विरोध करने और नौ जिलों में राजस्व कार्य पूरी तरह से ठप होने की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह मामला राज्य के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गया। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टरों की कार्रवाई और उसके बाद उपजे विवाद की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को दी गई। मुख्यमंत्री स्तर पर मामले का संज्ञान लिया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है, ताकि राजस्व व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके और आम जनता को हो रही परेशानी दूर की जा सके।

इसी क्रम में गुरुवार को भोपाल स्थित प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल को बैठक के लिए बुलाया गया। यह बैठक पहले भी हो चुकी है, लेकिन पिछले दिनों नौ जिलों में कलेक्टरों की कार्रवाई और उसके बाद पटवारियों द्वारा किए गए कार्य बहिष्कार के चलते एक बार फिर वार्ता की जरूरत महसूस की गई। माना जा रहा है कि इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच विस्तार से चर्चा होगी। प्रशासन की ओर से पटवारियों की मांगों पर विचार किया जाएगा और साथ ही यह भी समझाया जाएगा कि स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका क्यों जरूरी है। वहीं, पटवारी संघ के प्रतिनिधि भी अपनी मांगों और कलेक्टरों द्वारा की गई कार्रवाई पर अपना पक्ष रखेंगे।

स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को स्पष्ट करना और गांवों के मैपिंग व सर्वेक्षण के आधार पर लोगों को उनके आवासीय क्षेत्रों का वैध अधिकार प्रदान करना है। इस योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के माध्यम से गांवों का नक्शा तैयार किया जाता है। मध्य प्रदेश में इस योजना के निष्पादन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग के कर्मचारियों, विशेषकर पटवारियों पर दी गई है। पटवारियों का तर्क है कि वे पहले से ही कई प्रकार के राजस्व और सरकारी कार्यों में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में स्वामित्व योजना जैसे बड़े और तकनीकी कार्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी उनके लिए संभव नहीं है।

गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में हुई इस बैठक के परिणाम पर पूरे प्रदेश के राजस्व कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई हैं। यदि इस बैठक में कोई ठोस समाधान निकलता है, तो नौ जिलों में चल रहा राजस्व शटडाउन खत्म हो सकता है और पटवारी वापस अपने काम पर लौट सकते हैं। लेकिन अगर बातचीत बेनतीजा रहती है, तो पटवारी संघ अपने आंदोलन को और तेज कर सकता है, जिससे प्रदेश भर में राजस्व व्यवस्था चरमरा सकती है। फिलहाल, प्रशासन और पटवारी संघ दोनों ही इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। वांडे भारत न्यूज़ इस मामले पर आगे की अपडेट्स पर नजर बनाए हुए है।