Thu, 08 Oct 20265:05 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 5:05 PM IST
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मध्य प्रदेश में बंधक बनाए गए गोपालगंज के 10 मजदूरों का रेस्क्यू: गांव के युवक ने एक लाख रुपये में बेचा, वीडियो वायरल होने पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने लिया एक्शन

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बिहार के गोपालगंज जिले से एक बार फिर प्रवासी मजदूरों के साथ धोखाधड़ी और शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। गोपालगंज जिले के 10 मजदूरों को बेहतर मजदूरी का झांसा देकर मध्य प्रदेश ले जाया गया, जहां उन्हें रतलाम जिले के दुर्गम पहाड़ी इलाके में बंधक बनाकर रखा गया था। इन सभी मजदूरों को मात्र एक लाख रुपये में बेच दिया गया था। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मजदूरों की मदद मांगते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने तत्काल संज्ञान लिया और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए सभी 10 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू करवाया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, गोपालगंज जिले के रहने वाले इन 10 मजदूरों को उनके ही गांव के एक युवक ने रोजगार दिलाने के नाम पर घर से बाहर निकाला था। आरोपी युवक ने इन मजदूरों को यह भरोसा दिलाया था कि मध्य प्रदेश में उन्हें काम के बदले अच्छी मजदूरी मिलेगी, जिससे उनके परिवारों का गुजर-बसर बेहतर तरीके से हो सकेगा। गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे इन मजदूरों ने उस युवक की बातों पर विश्वास कर लिया और वे उसके साथ मध्य प्रदेश के लिए निकल गए। हालांकि, मजदूरों को यह नहीं पता था कि उनका भविष्य अत्यंत खतरे में है और उन्हें रोजगार के बजाय बंधुआ मजदूरी के नर्क में धकेला जाने वाला है।

गोपालगंज से निकलने के बाद इन सभी मजदूरों को मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक पहाड़ी और दुर्गम इलाके में ले जाया गया। वहां पहुंचने के बाद मजदूरों के साथ जो कुछ हुआ, वह बेहद चौंकाने वाला था। आरोप है कि जिस युवक ने उन्हें काम दिलाने का वादा किया था, उसने ही इन सभी 10 मजदूरों को वहां एक लाख रुपये की कुल राशि में बेच दिया। इसके बाद मजदूरों को बंधक बना लिया गया और उनसे कठिन परिश्रम करवाया जाने लगा। उन्हें न तो उचित मजदूरी दी जा रही थी और न ही स्वतंत्र रूप से अपने घर लौटने या किसी से बात करने की अनुमति थी। ये मजदूर पूरी तरह से असहाय स्थिति में फंस गए थे।

बंधक बनाए गए मजदूरों ने किसी तरह अपनी व्यथा को एक वीडियो के जरिए दर्ज किया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया ताकि उनकी पुकार अपने गांव और प्रशासन तक पहुंच सके। इस वीडियो में मजदूरों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि कैसे उन्हें झूठा लालच देकर लाया गया और फिर एक लाख रुपये में बेचकर बंधक बना लिया गया है। मजदूरों ने वीडियो के माध्यम से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से उन्हें इस कैद से मुक्त करवाने की गुहार लगाई। यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, इसने स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया और लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।

वीडियो वायरल होने की सूचना जब बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री और गोपालगंज क्षेत्र से जुड़े नेता मिथिलेश तिवारी तक पहुंची, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना किसी देरी के तुरंत एक्शन लिया। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि मजदूरों को हर हाल में सुरक्षित निकाला जाए। मंत्री के सीधे हस्तक्षेप और निर्देश के बाद प्रशासनिक मशीनरी तेजी से सक्रिय हुई। गोपालगंज प्रशासन ने मध्य प्रदेश के रतलाम जिला प्रशासन और पुलिस से संपर्क साधा। दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर एक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

इस संयुक्त कार्रवाई के तहत रतलाम के पहाड़ी इलाके में पहुंचकर सभी 10 मजदूरों को बंधक मुक्त कराया गया। रेस्क्यू किए गए सभी मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। प्रशासन द्वारा मजदूरों को उनके गृह जिले गोपालगंज वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। मजदूरों के परिजनों को भी इस बात की सूचना दी गई है कि उनके लोग अब सुरक्षित हैं और उन्हें बंधक बनाने वालों के चंगुल से छुड़ा लिया गया है।

इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके शोषण के मुद्दे को गंभीरता से सामने ला दिया है। बिहार से हर साल हजारों की संख्या में मजदूर बेहतर रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में जाते हैं, लेकिन कई बार दलालों और बिचौलियों के जाल में फंसकर वे मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी का शिकार हो जाते हैं। गोपालगंज के इस मामले में गांव के ही एक युवक द्वारा अपने ही लोगों को बेच देने की घटना ने समाज में गहरा सदमा पहुंचाया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की त्वरित कार्रवाई से हालांकि मजदूरों की जान बच गई और वे सुरक्षित अपने घर लौट पाएंगे, लेकिन ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस द्वारा आरोपी युवक और मजदूरों को खरीदने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।