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Sun, Oct 11, 2026Updated 11:18 AM IST
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मध्य प्रदेश में पटवारियों को स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अभियोजन से छूट, राजस्व विभाग ने जारी किए निर्देश; सोमवार से शुरू होगा काम

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भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के पटवारियों को बड़ी राहत देते हुए स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्री के मामलों में अभियोजन (प्रॉसीक्यूशन) से छूट का महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिया है। इस नए सरकारी आदेश के बाद अब स्वामित्व योजना में निष्पादक (एक्जीक्यूटर) बनाए गए पटवारियों के खिलाफ रजिस्ट्री कराने के दौरान किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न होने या अपराधिक स्थिति बनने पर सीधे तौर पर मामला दर्ज नहीं हो सकेगा। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पटवारी संघ के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक अहम मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने तत्काल प्रभाव से इसके औपचारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। इस फैसले के बाद लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत पटवारियों ने राहत की सांस ली है और उन्होंने सोमवार से अपना कामकाज फिर से शुरू करने की घोषणा कर दी है।

बता दें कि मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियों को कानूनी दस्तावेजों से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत गांवों में घरों और जमीनों की ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए मैपिंग की जाती है और उसके आधार पर संपत्ति कार्ड (प्रॉपर्टी कार्ड) तैयार किए जाते हैं। इन संपत्ति कार्डों के आधार पर जब रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाती है, तो उसमें पटवारियों को निष्पादक यानी एक्जीक्यूटर की भूमिका दी गई थी। पटवारियों का मुख्य कार्य भू-अभिलेखों का संधारण करना, खसरा-खतौनी का रखरखाव करना और राजस्व संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना होता है। लेकिन स्वामित्व योजना में उन्हें सीधे रजिस्ट्री प्रक्रिया का हिस्सा बनाए जाने के बाद से वे लगातार चिंतित थे।

पटवारी संघ की ओर से यह तर्क दिया जा रहा था कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में कई बार पारिवारिक विवाद, भाई-बहनों या रिश्तेदारों के बीच संपत्ति को लेकर मतभेद सामने आते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति रजिस्ट्री से असंतुष्ट होता है या उसे लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह सीधे तौर पर निष्पादक की भूमिका निभा रहे पटवारी के खिलाफ ही धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े या अन्य आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करा देता था। पटवारियों का कहना था कि वे केवल सरकारी आदेशों का पालन कर रहे हैं और उनके पास यह जांचने का कोई वैधानिक अधिकार या तकनीकी क्षमता नहीं होती कि संपत्ति पर किसी अन्य का दावा है या नहीं। इसी डर और कानूनी उलझनों के कारण पटवारियों ने स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री का काम रोक दिया था, जिससे प्रदेश भर में इस योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा था।

इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी। इस बैठक में पटवारी संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याओं और कानूनी पेचीदगियों का विस्तार से ब्योरा पेश किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि बिना अभियोजन से सुरक्षा (प्रॉसीक्यूशन एग्जेम्प्शन) के वे इस योजना में निष्पादक की जिम्मेदारी नहीं निभा सकते। पटवारियों ने तर्क दिया कि जब तक उन्हें यह आश्वासन नहीं मिलता कि अच्छी नीयत से किए गए सरकारी कार्य के लिए उन्हें कानूनी उत्पीड़न का शिकार नहीं होना पड़ेगा, तब तक वे इस प्रक्रिया में शामिल होने में असमर्थ हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पटवारी संघ की बातों को गंभीरता से सुना और उनकी समस्याओं को समझा। इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद प्रदेश के राजस्व विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए औपचारिक निर्देश जारी कर दिए। राजस्व विभाग द्वारा जारी किए गए इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री प्रक्रिया में निष्पादक (एक्जीक्यूटर) के रूप में कार्य करने वाले पटवारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार के विवाद या अपराधिक स्थिति उत्पन्न होने पर पूर्व अनुमति के बिना कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। यह छूट विशेष रूप से स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से जुड़े मामलों के लिए दी गई है, ताकि पटवारी बिना किसी कानूनी दबाव या भय के अपना सरकारी दायित्व निभा सकें।

राजस्व विभाग के इस आदेश के जारी होते ही पटवारी संघ ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है। संघ के पदाधिकारियों ने सभी जिलों के पटवारियों को निर्देशित किया है कि सरकार ने उनकी मुख्य मांग को मान लिया है, इसलिए अब काम बंद रखने का कोई औचित्य नहीं है। इसके परिणामस्वरूप, पटवारियों ने यह ऐलान किया है कि वे आगामी सोमवार से स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री और अन्य राजस्व संबंधी कार्य फिर से सामान्य रूप से शुरू कर देंगे।

ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में पटवारी राजस्व व्यवस्था की सबसे निचली और महत्वपूर्ण इकाई माने जाते हैं। ग्रामीण अंचल में भूमि रिकॉर्ड, फसल सर्वेक्षण, सीमांकन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका अत्यंत अहम होती है। जब पटवारियों ने स्वामित्व योजना में काम रोकने का फैसला किया था, तो इसका सीधा असर आम ग्रामीणों पर पड़ रहा था, जिन्हें अपने घरों के कानूनी दस्तावेज और संपत्ति कार्ड प्राप्त करने में देरी हो रही थी। अब सरकार के इस नए आदेश और पटवारियों द्वारा सोमवार से काम शुरू करने के फैसले के बाद स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री प्रक्रिया में आई रुकावट दूर होने की उम्मीद है और आम नागरिकों को समय पर संपत्ति कार्ड मिलने का रास्ता साफ हो गया है।