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Sat, Oct 10, 2026Updated 10:37 AM IST
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मध्य प्रदेश: उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने OSD दीपम रायचुरा को हटाया, 930 करोड़ की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया द्वारा एक करोड़ रुपये रिश्वत देने का दावा

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब भोपाल के कारोबारी किशन मोदी से कथित तौर पर 13.50 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी मोहित गोगिया का नाम उपमुख्यमंत्री के कार्यालय से जुड़कर सामने आया। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) दीपम रायचुरा को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह कार्रवाई कथित तौर पर 930 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के उस सनसनीखेज बयान के बाद चर्चा का विषय बनी, जिसमें उसने दावा किया है कि उसने ओएसडी दीपम रायचुरा को एक करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी।

उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा अपने ही ओएसडी को पद से हटाए जाने का फैसला राज्य की राजनीति में एक बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मोहित गोगिया ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा था कि उसने दीपम रायचुरा को एक करोड़ रुपये की रिश्वत के तौर पर दिए थे। इस दावे के सार्वजनिक होते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई और उपमुख्यमंत्री कार्यालय को तत्काल कदम उठाना पड़ा। हालांकि, इस रिश्वत के दावे और ओएसडी की भूमिका को लेकर अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है, लेकिन सरकार ने किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतते हुए दीपम रायचुरा को उनके पद से मुक्त कर दिया है।

इस पूरे प्रकरण की जड़ में खड़ा मोहित गोगिया कोई आम व्यक्ति नहीं है। उसके खिलाफ भोपाल के प्रतिष्ठित कारोबारी किशन मोदी से धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहित गोगिया ने किशन मोदी से कथित तौर पर 13.50 करोड़ रुपये की ठगी की है। यह रकम इतनी बड़ी है कि इसने शहर के व्यापारिक वर्ग में भी भारी चिंता पैदा कर दी है। किशन मोदी जैसे स्थापित कारोबारी के साथ हुई इस धोखाधड़ी ने गोगिया की कार्यप्रणाली और उसके नेटवर्क पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मोहित गोगिया केवल 13.50 करोड़ रुपये की ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ कुल 930 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप सामने आए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यदि ये आरोप सत्य साबित होते हैं, तो यह मध्य प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय धोखाधड़ियों में से एक हो सकती है। 930 करोड़ रुपये की ठगी का मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसे लेकर जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

गोगिया की जीवनशैली और उसके वित्तीय स्रोतों को लेकर भी अब चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि भोपाल शहर के कम से कम 8 प्रमुख और प्रतिष्ठित क्लबों में मोहित गोगिया का पैसा लगा हुआ है या वह इनका सदस्य रहा है। शहर के आठ क्लबों में उसकी मौजूदगी और वहां लगा उसका पैसा इस बात का संकेत देता है कि उसने समाज के उच्च वर्ग और प्रभावशाली लोगों के बीच अपनी गहरी पैठ बना रखी थी। भोपाल के क्लब अक्सर राजनेताओं, नौकरशाहों और बड़े कारोबारियों के मिलने-जुलने का केंद्र माने जाते हैं, ऐसे में इन क्लबों में गोगिया की सक्रियता उसके राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों की ओर भी इशारा करती है।

ओएसडी दीपम रायचुरा को पद से हटाए जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर इस ठगी के मामले में और भी लोगों की संलिप्तता थी? मोहित गोगिया द्वारा एक करोड़ रुपये रिश्वत देने का जो दावा किया गया है, वह केवल एक ओएसडी तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, इसकी जांच होना बेहद जरूरी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भले ही त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने ओएसडी को हटा दिया हो, लेकिन विपक्ष और आम जनता इस बात की मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

भोपाल के कारोबारी किशन मोदी से 13.50 करोड़ रुपये की ठगी से लेकर 930 करोड़ रुपये के महाघोटाले के आरोपों तक, और फिर उपमुख्यमंत्री के ओएसडी को एक करोड़ रुपये की रिश्वत दिए जाने के दावे ने मध्य प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। फिलहाल, मोहित गोगिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है और दीपम रायचुरा के पद से हटाए जाने के बाद जांच एजेंसियां क्या नए खुलासे करती हैं, यह देखना बाकी है। यह मामला अभी अपने शुरुआती दौर में है और आने वाले दिनों में इसमें कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, उसे पाठकों तक पहुंचाया जाएगा।