मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 4.46 फीसदी की बढ़ोतरी, पीजी प्रथम वर्ष को अब मिलेंगे 81,126 रुपये; एक अप्रैल 2026 से लागू होगा आदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) कर रहे जूनियर डॉक्टरों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। प्रदेश सरकार ने जूनियर डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 4.46 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इस बढ़ोतरी के बाद पीजी प्रथम वर्ष के जूनियर डॉक्टरों को अब हर महीने 81,126 रुपये का स्टाइपेंड प्राप्त होगा। सरकारी आदेश के अनुसार, बढ़ी हुई स्टाइपेंड राशि एक अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी। यह फैसला भोपाल स्थित राज्य सचिवालय से जारी किया गया है और इसे प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस बढ़ोतरी का सीधा लाभ उन सभी जूनियर डॉक्टरों को मिलेगा जो प्रदेश के विभिन्न शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमडी, एमएस और डिप्लोमा सहित अन्य पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। स्टाइपेंड में 4.46 प्रतिशत की यह वृद्धि महंगाई भत्ते और अन्य सेवा नियमों के तहत की गई है। पीजी प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए नया स्टाइपेंड 81,126 रुपये प्रति माह तय किया गया है। हालांकि, द्वितीय और तृतीय वर्ष के जूनियर डॉक्टरों के संशोधित स्टाइपेंड की अलग-अलग राशि उनके वर्तमान वेतनमान में इसी प्रतिशत की वृद्धि के आधार पर तय होगी, क्योंकि उच्च वर्षों में पहले से ही स्टाइपेंड की राशि अधिक होती है।
ज्ञात हो कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पढ़ने वाले जूनियर डॉक्टर अपनी पढ़ाई के दौरान अस्पतालों में मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी वार्ड और ऑपरेशन थिएटर में सीनियर डॉक्टरों के साथ काम करते हैं। उनकी ड्यूटी कई बार 24 घंटे तक की शिफ्ट में भी होती है। ऐसे में उनके द्वारा दी जा रही कड़ी मेहनत और सेवाओं को देखते हुए समय-समय पर उनके स्टाइपेंड में संशोधन किया जाता रहा है। राज्य सरकार का यह ताजा फैसला जूनियर डॉक्टरों के मनोबल को बढ़ाने और उन्हें बेहतर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है। प्रदेश के लगभग हर संभाग में शासकीय मेडिकल कॉलेज संचालित हैं या नए कॉलेजों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन सभी संस्थानों में हजारों की संख्या में जूनियर डॉक्टर पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं। एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाली इस नई दर के बाद, प्रदेश के राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, लेकिन सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस बढ़ोतरी के लिए आवश्यक प्रावधान किए जाने की संभावना है।
सरकार के इस ऐलान के बाद जूनियर डॉक्टरों में संतोष का माहौल है। मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टरों के संगठनों ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय से महंगाई में लगातार इजाफा हो रहा था, जिसके चलते पुराने स्टाइपेंड में गुजारा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा था। 4.46 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी उनकी आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी। विशेषकर उन जूनियर डॉक्टरों के लिए यह राहत भरी खबर है जो दूसरे शहरों से आकर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा जैसे शहरों में स्थित मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं और जिन्हें किराए के मकानों में रहकर अपना खर्च चलाना पड़ता है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल उन्हीं जूनियर डॉक्टरों पर लागू होगी जो राज्य सरकार द्वारा संचालित और मान्यता प्राप्त शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में नामांकित हैं। निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले पीजी छात्रों के स्टाइपेंड का ढांचा अलग होता है और वह संबंधित संस्थानों तथा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के दिशानिर्देशों पर निर्भर करता है। शासकीय कॉलेजों में स्टाइपेंड का भुगतान सीधे राज्य के खजाने से बैंक खातों में किया जाता है, इसलिए एक अप्रैल 2026 से नई दर पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कोषागार और लेखा विभाग को भी आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश भर में जूनियर डॉक्टरों की कार्य परिस्थितियों और उनके मुआवजे को लेकर नियमित रूप से चर्चा होती रहती है। केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें समय-समय पर अपने यहां के जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में संशोधन करती रहती हैं। मध्यप्रदेश द्वारा 4.46 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने से यह प्रदेश अन्य राज्यों के समकक्ष बना रहेगा। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी एक अप्रैल 2026 से ही जूनियर डॉक्टरों को बढ़ी हुई राशि का लाभ मिलना शुरू हो जाए, ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी से उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े। भोपाल से जारी इस सरकारी अधिसूचना के बाद अब सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और अधीक्षकों को अपने यहां कार्यरत जूनियर डॉक्टरों के वेतन बिल नई दर के अनुसार तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

