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Mon, Oct 12, 2026Updated 10:55 AM IST
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महाराष्ट्र MPSC परीक्षा सुधार के लिए कमेटी गठित, तुकाराम मुंढे बने सचिव; 10 दिन से चल रहा अभ्यर्थियों का प्रदर्शन खत्म

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पुणे/मुंबई। वंदे भारत न्यूज़। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में व्याप्त अनियमितताओं और पेपर लीक की जांच तथा व्यवस्था में सुधार के लिए रविवार को एक विशेष कमेटी के गठन की घोषणा की है। इस कमेटी में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद पुणे में पिछले 10 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे MPSC अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। हालांकि, कमेटी के चेयरमैन को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार वे फिलहाल छुट्टी पर चले गए हैं, जिससे इस समिति की तत्काल कार्यवाही को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं।

महाराष्ट्र में राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को लेकर बीते कई दिनों से भारी विवाद चल रहा था। अभ्यर्थियों का आरोप था कि MPSC की परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं, जिससे मेहनती और योग्य छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इन शिकायतों और आरोपों के बीच पुणे में अभ्यर्थियों ने बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। यह प्रदर्शन लगातार 10 दिनों तक चला, जिसमें राज्य भर से हजारों की संख्या में MPSC की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं शामिल हुए। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग थी कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए, पेपर लीक की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अभ्यर्थियों के बढ़ते दबाव और 10 दिनों तक चले लगातार आंदोलन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को अहम कदम उठाते हुए MPSC में सुधार के लिए एक विशेष कमेटी बनाने का निर्णय लिया। सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा करना, पेपर लीक से जुड़ी शिकायतों की जांच करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुझाव देना है। इस कमेटी में सबसे महत्वपूर्ण नियुक्ति फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे की सचिव के रूप में की गई है। तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र प्रशासनिक सेवा के एक बेहद सख्त और ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उनके नाम को इस कमेटी में शामिल किए जाने से अभ्यर्थियों में काफी हद तक विश्वास जगा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी।

सरकार द्वारा कमेटी गठित करने और तुकाराम मुंढे को सचिव बनाए जाने की खबर मिलते ही पुणे में 10 दिनों से डटे अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली। अपनी मुख्य मांग पूरी होने के संकेत मिलने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने प्रदर्शन इसलिए खत्म किया है क्योंकि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से लिया है और जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। हालांकि, छात्रों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कमेटी की रिपोर्ट समय पर नहीं आती है या कार्रवाई में देरी होती है, तो वे फिर से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प और चर्चा का विषय यह भी है कि इस नवगठित सुधार कमेटी के चेयरमैन फिलहाल छुट्टी पर चले गए हैं। कमेटी के गठन की घोषणा होते ही चेयरमैन का छुट्टी पर जाना राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी छुट्टी पहले से तय थी या कमेटी गठित होने के बाद उन्होंने छुट्टी ली है। स्रोतों के अनुसार, चेयरमैन के छुट्टी पर होने के बावजूद कमेटी के सचिव तुकाराम मुंढे अपने कामकाज की शुरुआत करेंगे और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) राज्य में ग्रुप ए, ग्रुप बी और ग्रुप सी की श्रेणी के सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है। हर साल लाखों युवा इन परीक्षाओं में बैठते हैं। ऐसे में जब पेपर लीक जैसे गंभीर आरोप लगते हैं, तो यह न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करता है, बल्कि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। तुकाराम मुंढे जैसे अनुभवी अधिकारी को सचिव बनाया जाना सरकार की उस मंशा को दर्शाता है कि वह इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, अब सभी की निगाहें इस कमेटी की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में सचिवालय किस तरह से पेपर लीक की जड़ों तक पहुंचता है और MPSC की परीक्षा प्रणाली में क्या-क्या बड़े सुधार लागू करने की सिफारिश करता है। चेयरमैन के छुट्टी से लौटने के बाद कमेटी का पूरा ढांचा कैसे काम करेगा, इस पर भी प्रशासनिक विशेषज्ञों की नजर रहेगी। फिलहाल, 10 दिन के लंबे संघर्ष के बाद अभ्यर्थियों को सरकार के इस कदम से कुछ उम्मीद जरूर मिली है।