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Mon, Oct 12, 2026Updated 10:53 AM IST
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महाराष्ट्र सरकार ने MPSC में सुधार के लिए गठित की कमेटी, तुकाराम मुंढे को सचिव नियुक्त; 5 महीने से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी

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मुंबई। वंदे भारत न्यूज़। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा प्रणाली और कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार लाने के उद्देश्य से रविवार को एक विशेष समिति का गठन किया है। इस महत्वपूर्ण समिति में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब एमपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी पिछले पांच महीनों से अधिक समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार के इस कदम को लंबे समय से आंदोलनरत छात्रों की मांगों के प्रति एक ठोस प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

महाराष्ट्र में राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का असंतोष पिछले कई महीनों से चरम पर था। पुणे सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में हजारों की संख्या में एमपीएससी के उम्मीदवार सड़कों पर उतर आए थे और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ये अभ्यर्थी पिछले लगभग पांच महीनों से निरंतर आंदोलन कर रहे थे। उनका कहना था कि एमपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और अन्य कई बुनियादी सुधारों की अत्यंत आवश्यकता है। छात्रों के इस लंबे और निरंतर चल रहे आंदोलन ने अंततः राज्य सरकार को इस दिशा में गंभीरता से सोचने और ठोस कदम उठाने के लिए बाध्य किया है।

रविवार को राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, एमपीएससी में जरूरी सुधारों की सिफारिश करने और उसकी वर्तमान कार्यप्रणाली की समीक्षा करने के लिए इस विशेष समिति का गठन किया गया है। इस समिति की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह होगी कि वह आयोग की मौजूदा परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रिया और परिणाम घोषित करने में लगने वाले समय सहित सभी पहलुओं का गहन अध्ययन करे और सरकार को अपने सुझाव प्रस्तुत करे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस समिति का मुख्य उद्देश्य एमपीएससी को और अधिक पारदर्शी, कुशल और अभ्यर्थियों के अनुकूल बनाना है, ताकि भविष्य में इस तरह के आंदोलनों की नौबत न आए।

इस नवगठित सुधार समिति में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को सचिव नियुक्त किया गया है। तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के प्रशासनिक हल्कों में एक बेहद सख्त, ईमानदार और कुशल अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उनके नाम पहले से ही प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की छवि जुड़ी हुई है। सरकारी तंत्र में उनकी साख को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार ने जानबूझकर इस अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है। तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में इस समिति से अपेक्षा की जा रही है कि वह बिना किसी दबाव के परीक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर करेगी और व्यावहारिक समाधान सुझाएगी।

अभ्यर्थियों के आंदोलन का केंद्र मुख्य रूप से पुणे शहर रहा है। पुणे को महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, जहां राज्य के कोने-कोने से लाखों छात्र एमपीएससी और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। पिछले पांच महीनों से पुणे की सड़कों पर डटे इन अभ्यर्थियों ने सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए कई तरीके अपनाए। उनका प्रमुख आरोप था कि परीक्षा परिणाम घोषित होने में अत्यधिक देरी होती है, जिससे उनकी उम्र सीमा निकल जाती है और उनका पूरा करियर प्रभावित होता है। इसके अलावा, पाठ्यक्रम में बदलाव, रिक्तियों की संख्या और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे भी उनके आंदोलन के मुख्य बिंदु रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तुकाराम मुंढे की अध्यक्षता वाली यह समिति कितनी जल्दी अपना काम शुरू करती है और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपती है। हालांकि, समिति के गठन की घोषणा के बाद भी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी इसे कितना पर्याप्त मानते हैं या वे अपना प्रदर्शन वापस लेंगे या नहीं। कुछ छात्र संगठनों का मानना है कि समिति का गठन एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि एमपीएससी में सुधार की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जा रहा है और युवाओं के भविष्य से कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। तुकाराम मुंढे जैसे अनुभवी और कड़क छवि वाले अधिकारी को सचिव बनाए जाने से सरकार की मंशा पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं। अब देखना यह होगा कि यह सुधार समिति अभ्यर्थियों की उन समस्याओं का कितनी प्रभावी ढंग से समाधान निकाल पाती है, जिनके लिए वे पिछले पांच महीनों से सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। वंदे भारत न्यूज़ इस मामले में होने वाले हर नए विकास पर नजर रखे हुए है।