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Thu, Oct 8, 2026Updated 5:46 PM IST
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ममदानी की जीत ने बदली यूरोप की राजनीति: वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को बनाया मुख्य मुद्दा, बर्लिन में एलिफ एराल्प को मिली ऐतिहासिक जीत

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हाल ही में आए बदलावों ने यूरोप के राजनीतिक परिदृश्य को एक नई दिशा प्रदान की है। ज़ोहरान ममदानी की जीत के बाद यूरोप में वामपंथी राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इस नई राजनीतिक लहर का सबसे अधिक प्रभाव आवास और किराये से जुड़े मुद्दों पर देखने को मिल रहा है। यूरोप के कई देशों में वामपंथी पार्टियों ने महंगे होते घरों और बढ़ते किराये को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना लिया है, जिसका सीधा असर मतदाताओं के रुझान पर पड़ रहा है। इस नई राजनीतिक रणनीति का सबसे दिलचस्प और चर्चित मामला जर्मनी की राजधानी बर्लिन से सामने आया है, जहां एलिफ एराल्प ने महंगे घरों और आवास संकट को केंद्र में रखकर चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है।

बर्लिन में आवास संकट पिछले कई वर्षों से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। शहर में किराये की दरें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम नागरिकों और विशेषकर निम्न तथा मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए रहने योग्य घर खोजना अत्यंत कठिन हो गया है। इसी जनभावना को समझते हुए एलिफ एराल्प ने अपने चुनावी अभियान की पूरी रणनीति सस्ते घरों और किराये में राहत देने के वादे पर केंद्रित की। उन्होंने मतदाताओं से सीधे संवाद किया और यह स्पष्ट किया कि आवास कोई व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। उनकी इस स्पष्ट और जन-केंद्रित नीति का ही परिणाम रहा कि बर्लिन के मतदाताओं ने उन्हें भारी समर्थन दिया और वे चुनाव जीतने में सफल रहीं। एलिफ एराल्प की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे यूरोप में वामपंथी दलों के लिए एक नई रणनीतिक दिशा तय करने वाली घटना मानी जा रही है।

ज़ोहरान ममदानी की जीत ने वैश्विक स्तर पर, और विशेष रूप से यूरोपीय महाद्वीप में, वामपंथी राजनीति को एक नया आयाम दिया है। ममदानी की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि राजनीतिक दल आम जनता की बुनियादी और दैनिक जरूरतों को प्राथमिकता दें, तो वे किसी भी स्थापित राजनीतिक ढांचे को चुनौती दे सकते हैं। ममदानी के मॉडल से प्रेरणा लेते हुए यूरोप की विभिन्न वामपंथी पार्टियों ने अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना शुरू कर दिया है। पहले जहां वामपंथी पार्टियां मुख्य रूप से पारंपरिक श्रमिक अधिकारों, औद्योगिक नीतियों या सैद्धांतिक वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रहती थीं, वहीं अब उनका पूरा ध्यान शहरी आवास संकट, बढ़ते किराये और जीवनयापन की लागत जैसे ठोस और व्यावहारिक मुद्दों पर टिक गया है।

यूरोप के प्रमुख शहरों में आवास संकट अब केवल एक स्थानीय प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। पेरिस, लंदन, मैड्रिड, एम्स्टर्डम और बार्सिलोना जैसे प्रमुख यूरोपीय शहरों में किराये की कीमतें आसमान छू रही हैं। इन शहरों में युवा पेशेवरों, छात्रों, प्रवासी कामगारों और कम आय वाले परिवारों के लिए उचित किराये पर घर ढूंढना लगभग असंभव होता जा रहा है। इस गंभीर संकट का फायदा उठाते हुए वामपंथी पार्टियों ने ‘किराये पर नियंत्रण’ (रेंट कंट्रोल), सरकारी आवास योजनाओं के विस्तार, रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश पर अंकुश और भूमि सुधार जैसे ठोस कदमों की मांग को अपने घोषणापत्र का मुख्य हिस्सा बना लिया है।

बर्लिन में एलिफ एराल्प की जीत ने अन्य यूरोपीय देशों के राजनीतिक दलों के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है कि मतदाता अब उन नेताओं और पार्टियों का समर्थन करने को तैयार हैं जो उनके दैनिक जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं का समाधान पेश करते हैं। सूत्रों के अनुसार, यूरोप भर में वामपंथी संगठन अब आपस में बेहतर समन्वय स्थापित कर रहे हैं ताकि आवास नीतियों पर एक साझा और मजबूत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जा सके। कई देशों में किराये को लेकर जन आंदोलन भी तेज हुए हैं, जिनमें आम नागरिक सड़कों पर उतरकर सरकारों से किराये की दरों को नियंत्रित करने की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममदानी की जीत और बर्लिन में एलिफ एराल्प की सफलता ने यूरोप में वामपंथी राजनीति के पुनरुत्थान की एक मजबूत नींव रख दी है। हालांकि, यह भी देखा जाना बाकी है कि क्या ये पार्टियां चुनावी वादों को सत्ता में आने के बाद व्यावहारिक नीतियों में बदल पाएंगी। आवास बाजार में निजी कंपनियों और रियल एस्टेट लॉबी का बहुत बड़ा प्रभाव होता है, ऐसे में किराया नियंत्रण जैसे कानूनों को लागू करना किसी भी सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती होगी। इसके अलावा, यूरोप में मौजूद दक्षिणपंथी और उदारवादी पार्टियां भी इन मुद्दों पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, ज़ोहरान ममदानी की जीत के बाद यूरोप की राजनीति में जो बदलाव आया है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि आवास और किराया अब केवल आर्थिक विषय नहीं रहे, बल्कि ये सीधे तौर पर चुनावी जीत और हार तय करने वाले सबसे निर्णायक राजनीतिक मुद्दे बन गए हैं। बर्लिन में एलिफ एराल्प की जीत इसी बदलते यूरोपीय राजनीतिक परिदृश्य की एक बड़ी और ऐतिहासिक बानगी है, जो आने वाले वर्षों में पूरे महाद्वीप की नीतियों को प्रभावित कर सकती है। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट।