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Fri, Oct 9, 2026Updated 4:40 PM IST
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मंडला: अरौली गांव में महिला पर हमला करने वाले बाघ को वन विभाग ने घर की बाड़ी से रेस्क्यू कर मुक्की क्वारंटाइन सेंटर भेजा

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मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले अरौली गांव में एक बाघ द्वारा महिला पर किए गए हमले की घटना के बाद वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। वन विभाग की टीम ने गुरुवार सुबह उस बाघ को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया, जिसने एक महिला पर हमला किया था। यह बाघ गांव के ही एक घर की बाड़ी में छिपा हुआ था, जिसे पकड़कर मुक्की क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई ने गांव में फैले दहशत के माहौल को काफी हद तक शांत किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व से सटे अरौली गांव में एक बाघ आ गया था। गांव में प्रवेश करने के बाद इस बाघ ने एक महिला पर अचानक हमला कर दिया। महिला पर बाघ के हमले की यह घटना गांव वालों के लिए बेहद डरावनी थी। बाघ के हमले से ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। किसी भी व्यक्ति की जान को और अधिक खतरा न हो, इसके लिए ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। महिला पर हुए इस हमले के बाद से पूरे इलाके में भय का माहौल व्याप्त था, क्योंकि बाघ गांव की सीमा में ही मौजूद था और उसके ठिकाने का सटीक पता नहीं चल पा रहा था।

सूचना मिलते ही कान्हा टाइगर रिजर्व के वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत हरकत में आई और अरौली गांव पहुंची। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गांव में पहुंचकर सबसे पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी और बाघ की तलाश शुरू की। टीम ने गांव के विभिन्न हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया। काफी मशक्कत और सावधानीपूर्वक तलाशी अभियान के बाद वन विभाग की टीम को पता चला कि महिला पर हमला करने वाला बाघ गांव के ही एक घर की बाड़ी में जाकर छिप गया है। बाघ के घर की बाड़ी में छिपे होने की पुष्टि होने पर रेस्क्यू टीम ने अपनी रणनीति तैयार की ताकि बिना किसी जनहानि के बाघ को सुरक्षित पकड़ा जा सके।

गुरुवार सुबह वन विभाग की विशेषज्ञ टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। घर की बाड़ी में छिपे बाघ को ट्रैंकुलाइज करने की प्रक्रिया अपनाई गई। वन विभाग के अनुभवी कर्मचारियों ने पूरी सावधानी बरतते हुए बाघ को बेहोश किया और उसे सुरक्षित तरीके से पिंजरे में शिफ्ट किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि आसपास के ग्रामीणों को किसी प्रकार की कोई परेशानी या खतरा न हो। गुरुवार सुबह सफलतापूर्वक रेस्क्यू किए जाने के बाद वन विभाग ने राहत की सांस ली और ग्रामीणों को बाघ के पकड़े जाने की जानकारी दी, जिसके बाद गांव वालों को कुछ हद तक राहत मिली।

वन विभाग द्वारा रेस्क्यू किए गए इस बाघ को अरौली गांव से सीधे मुक्की क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया है। मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में बाघ को विशेष निगरानी में रखा जाएगा। वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की एक टीम अब इस बाघ की स्वास्थ्य जांच करेगी। क्वारंटाइन सेंटर में यह देखा जाएगा कि बाघ स्वस्थ है या नहीं, उसे किसी प्रकार की कोई बीमारी तो नहीं है और वह मानव बस्तियों की ओर क्यों रुख किया। आम तौर पर जब बाघ जंगल छोड़कर गांवों में प्रवेश करते हैं और इंसानों पर हमला करते हैं, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे उनका बूढ़ा या बीमार हो जाना, जंगल में प्राकृतिक शिकार की कमी होना, या फिर उनके व्यवहार में कोई बदलाव आना। इन सभी पहलुओं की जांच मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में की जाएगी।

कान्हा टाइगर रिजर्व देश के सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व में से एक है। यह रिजर्व अपनी बाघों की अच्छी खासी संख्या के लिए जाना जाता है। हालांकि, बाघों की बढ़ती संख्या और उनके विस्तारित होते क्षेत्र के कारण कभी-कभी ऐसे बाघ रिजर्व की सीमाओं से बाहर निकलकर आसपास के गांवों में प्रवेश कर जाते हैं। मंडला जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में समय-समय पर वन्यजीवों के आने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन किसी महिला पर बाघ द्वारा सीधा हमला करना ग्रामीणों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया था।

अरौली गांव में हुई इस घटना के बाद वन विभाग ने आसपास के अन्य गांवों को भी सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे सुबह जल्दी या शाम के अंधेरे में जंगल की तरफ या खेतों में अकेले न जाएं। यदि कोई वन्यजीव दिखे तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें और खुद से उसे भगाने या पकड़ने का प्रयास न करें। वन विभाग की ओर से गुरुवार सुबह किए गए इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। बाघ को मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में रखकर उसके भविष्य और स्वास्थ्य को लेकर उचित निर्णय लिया जाएगा, ताकि भविष्य में ग्रामीणों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।