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Sun, Oct 11, 2026Updated 11:51 AM IST
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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: कुकी-नगा गुटों में झड़प से 5 की मौत, कामजोंग और उखरुल में 10 घर जलाए, BNSS के तहत प्रतिबंध लागू

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वन्दे भारत न्यूज़। मणिपुर में शनिवार को एक बार फिर ताजा हिंसा भड़क उठी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक महिला भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि कामजोंग और उखरुल जिलों में हथियारबंद गुटों के बीच भीषण झड़प हुई। इस दौरान दर्जनों राउंड गोलीबारी हुई और कम से कम 10 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। राज्य में पहले से ही जारी जातीय तनाव के बीच यह नई हिंसा सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।

चस्साड गांव में दो लोगों की हत्या और भारी गोलीबारी

अधिकारियों के अनुसार, कामजोंग जिला नगा बहुल क्षेत्र है, लेकिन यहां स्थित चस्साड गांव में कुकी समुदाय की आबादी अधिक है। शुक्रवार रात इसी गांव में हिंसा की शुरुआत हुई, जब 42 वर्षीय एक महिला को गर्दन के पास गोली मार दी गई। गोली लगने के कुछ ही मिनटों बाद महिला ने दम तोड़ दिया। मृतक महिला पांच बच्चों की मां थी। उसकी हत्या के बाद गांव में तनाव अचानक चरम पर पहुंच गया और कुकी व नगा हथियारबंद गुटों के बीच भारी गोलीबारी शुरू हो गई। यह गोलीबारी शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक लगातार चलती रही। इस झड़प में 22 वर्षीय एक युवक की भी मौत हो गई। इसके अलावा उपद्रवियों ने गांव में 10 घरों को आग लगा दी, जिससे इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो गया।

हिंसा को रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चस्साड पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 162 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

निंगचोउ गांव में संदिग्ध उग्रवादियों का हमला, दो की मौत

कामजोंग जिले में ही एक अन्य घटना में संदिग्ध उग्रवादियों ने म्यांमार सीमा से सटे निंगचोउ गांव में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी की। अधिकारियों ने बताया कि यह गांव तांगखुल नगा समुदाय की बस्ती है। हमलावरों ने गांव में प्रवेश करते ही गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 35 वर्षीय नगाचान्सो निंगशेन और 48 वर्षीय लेइशिशान लेइशाडांग की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षाबल तुरंत गांव पहुंचे और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने दावा किया है कि गोलीबारी करने के बाद हमलावर म्यांमार की ओर भाग निकले। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दोनों मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए कामजोंग जिला अस्पताल भेज दिया गया है।

उखरुल में वाहन पर फायरिंग, चालक की मौत

उखरुल जिले में भी संदिग्ध उग्रवादियों ने हिंसक वारदात को अंजाम दिया। चेपू याओलेन के पास उग्रवादियों ने एक चलते हुए वाहन पर गोलीबारी कर दी। इस हमले में 40 वर्षीय संदीप राय की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, संदीप राय खुद उस चार पहिया वाहन को चला रहे थे, जिस पर हमला किया गया। गोलीबारी के दौरान वे वाहन के अंदर ही बैठे थे और वहीं उनकी मौत हो गई।

कांगपोकपी में भी हथियारबंद गुटों में झड़प

हिंसा का असर सिर्फ कामजोंग और उखरुल तक सीमित नहीं रहा। कांगपोकपी जिले के मकुई अशांग और तापन इलाकों से भी हथियारबंद गुटों के बीच भारी गोलीबारी की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, कांगपोकपी में हुई इस गोलीबारी में किसी के हताहत होने की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

फरवरी से अब तक 40 से ज्यादा मौतें, कई जिले प्रभावित

अधिकारियों के अनुसार, इस साल फरवरी में कुकी और नगा समुदायों के बीच ताजा हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक 40 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा दर्जनों घरों को जलाकर खाक किया जा चुका है। इस हिंसा का सबसे ज्यादा असर मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलोंग और नोनी जिलों में देखा गया है। सेनापति जिले के कुछ हिस्से भी इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं। जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से ही मणिपुर के सभी जिलों के सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। ये बल इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए सक्रिय कार्रवाई कर रहे हैं।

मई 2023 से जारी संघर्ष का व्यापक असर

गौरतलब है कि मैतेई और कुकी-जो समूहों के बीच मई 2023 से जो जातीय संघर्ष शुरू हुआ था, वह आज भी विभिन्न रूपों में जारी है। इस लंबे संघर्ष में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़कर बेघर हो चुके हैं। शनिवार की ताजा घटनाओं ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि मणिपुर में शांति बहाली का रास्ता अभी भी बेहद कठिन बना हुआ है और प्रशासन को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है।