मऊगंज: पूर्व जनपद अध्यक्ष बृजेंद्र शुक्ला ने बिजली, सड़क और आवारा मवेशियों की समस्याओं को लेकर प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में बुनियादी सुविधाओं की कमी और किसानों की बढ़ती परेशानियों को लेकर स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। मऊगंज के पूर्व जनपद अध्यक्ष बृजेंद्र शुक्ला ने देवतालाब इलाके में व्याप्त गंभीर समस्याओं को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में खराब ट्रांसफॉर्मर, जर्जर सड़कों, भारी-भरकम बिजली बिलों और आवारा मवेशियों के कारण किसानों पर पड़ रहे संकट का विस्तार से जिक्र किया। पूर्व जनपद अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बृजेंद्र शुक्ला ने सबसे पहले देवतालाब इलाके में बिजली की दयनीय स्थिति पर सरकार और संबंधित विभागों को घेरा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लगे कई ट्रांसफॉर्मर काफी समय से खराब पड़े हुए हैं। बार-बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग द्वारा उन्हें ठीक करवाने या बदलवाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण गांवों में अंधेरा छाया रहता है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि बिना बिजली के न तो लोगों के घरों में रोशनी होती है और न ही किसान अपने खेतों में सिंचाई के लिए पंप चला पाते हैं।
पूर्व जनपद अध्यक्ष ने बिजली आपूर्ति में बाधा के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे भारी-भरकम बिजली बिलों की शिकायतों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ तो क्षेत्र में नियमित रूप से बिजली नहीं मिलती है और ट्रांसफॉर्मर खराब रहने से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग द्वारा मनमाने और अत्यधिक राशि के बिल थोपे जा रहे हैं। गरीब किसान और ग्रामीण इन भारी बिलों का भुगतान करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। बृजेंद्र शुक्ला ने मांग की कि बिजली बिलों की तत्काल जांच हो और जो उपभोक्ता वास्तव में कम बिजली उपयोग कर रहे हैं, उनके बिलों में आवश्यक सुधार किया जाए।
प्रेस वार्ता में सड़कों की खस्ताहाल स्थिति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बृजेंद्र शुक्ला ने बताया कि देवतालाब इलाके सहित आसपास के मार्गों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। उन्होंने कहा कि खराब सड़कों के कारण ग्रामीणों को अपने दैनिक कार्यों, बाजार जाने और आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए कई बार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं देखी गई है।
इसके अलावा, पूर्व जनपद अध्यक्ष ने आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यह गंभीर बात कही कि आवारा मवेशियों के आतंक से क्षेत्र के किसानों ने खेती करना ही छोड़ दिया है। खुले में घूमने वाले ये मवेशी किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। दिन-रात की मेहनत से बोई गई फसल जब जानवरों द्वारा चर ली जाती है, तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। बृजेंद्र शुक्ला ने बताया कि इसी कारण से कई किसान अब खेती से विमुख हो गए हैं, क्योंकि उनकी फसल सुरक्षित नहीं रह पाती है। उन्होंने प्रशासन से आवारा मवेशियों को पकड़कर कान्हा गौशालाओं या अन्य सुरक्षित स्थानों पर भिजवाने की ठोस व्यवस्था करने की मांग की है।
अपनी सभी मांगों को रखते हुए बृजेंद्र शुक्ला ने मऊगंज प्रशासन और राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि देवतालाब इलाके और आसपास के क्षेत्रों की इन बुनियादी समस्याओं को लेकर वे लगातार शांतिपूर्ण तरीके से मांग उठाते रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण हालात नहीं सुधरे हैं। उन्होंने ऐलान किया कि यदि प्रशासन ने खराब ट्रांसफॉर्मरों को ठीक करवाने, सड़कों की मरम्मत करने, बिजली बिलों की विसंगतियों को दूर करने और आवारा मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए तय समय सीमा के भीतर कोई कदम नहीं उठाया, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने अनशन पर बैठने की भी चेतावनी दी है।
पूर्व जनपद अध्यक्ष की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस और चेतावनी के बाद मऊगंज के देवतालाब इलाके में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने भी बृजेंद्र शुक्ला द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन किया है। अब देखना यह होगा कि क्या मऊगंज प्रशासन इन गंभीर समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई करता है, या फिर पूर्व जनपद अध्यक्ष अपनी चेतावनी के अनुसार उग्र आंदोलन और अनशन शुरू करते हैं। फिलहाल, क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि इस पहल से उनकी लंबित समस्याओं का समाधान निकल सकेगा।

