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Sat, Oct 10, 2026Updated 5:48 PM IST
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मरवाही के कटरा गांव में भालू के हमले से 50 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल, ग्रामीणों ने खदेड़कर बचाई जान, अस्पताल में चल रहा इलाज

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छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र अंतर्गत आने वाले कटरा गांव (टूरी झिरिया) में आज एक भालू ने 50 वर्षीय महिला पर अचानक हमला कर दिया। इस खौफनाक घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई है। घायल महिला की पहचान लीलावती के रूप में हुई है, जो शिवनाथ की पत्नी हैं। भालू के हमले में बुरी तरह जख्मी होने के बाद आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। यह घटना उस समय हुई जब महिला अपने घर से बाड़ी की ओर जा रही थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरवाही क्षेत्र के कटरा गांव (टूरी झिरिया) में आज का दिन तब दहशत में बदल गया, जब एक जंगली भालू गांव की सीमा में प्रवेश कर गया। बताया जा रहा है कि 50 वर्षीय लीलावती अपने रोजमर्रा के काम के सिलसिले में अपनी बाड़ी की तरफ जा रही थीं। इसी दौरान अचानक वहां मौजूद भालू ने उन पर बिना किसी उकसावे के हमला बोल दिया। भालू के इस ताबड़तोड़ और अप्रत्याशित हमले से महिला को संभलने का कोई मौका नहीं मिल पाया और वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। भालू ने महिला पर किस प्रकार से वार किया और उनके शरीर के किन हिस्सों पर चोटें आई हैं, इस बारे में अभी विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट आना बाकी है, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से देखा गया कि महिला को गंभीर चोटें आई हैं।

घटना के तुरंत बाद गांव में चीख-पुकार मच गई। जब आसपास के अन्य ग्रामीणों ने लीलावती पर भालू के हमले की सूचना सुनी और घटनास्थल की ओर भागे, तो उन्होंने देखा कि भालू महिला पर हमलावर है। ग्रामीणों ने बिना अपनी जान की परवाह किए अत्यंत साहस का परिचय दिया। उन्होंने लाठियां और अन्य उपकरण लेकर भालू को वहां से खदेड़ने का प्रयास शुरू किया। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास और शोरगुल के कारण भालू अंततः वहां से पीछे हटने और भागने के लिए मजबूर हो गया। यदि ग्रामीण समय रहते वहां नहीं पहुंचते और भालू को नहीं खदेड़ते, तो महिला की जान को और भी बड़ा खतरा हो सकता था। ग्रामीणों की इस त्वरित कार्रवाई ने लीलावती की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भालू को खदेड़ने के बाद ग्रामीणों ने तुरंत घायल अवस्था में पड़ी लीलावती को संभाला। उनके शरीर से खून बह रहा था और वह दर्द से कराह रही थीं। गांव वालों ने बिना किसी देरी के उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की। वर्तमान में लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। उनकी स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों द्वारा आवश्यक उपचार किया जा रहा है। शिवनाथ की पत्नी लीलावती के परिवारजन और गांव के लोग उनकी सलामती के लिए चिंतित हैं।

यह घटना मरवाही क्षेत्र और आसपास के जंगलों से सटे गांवों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की ओर एक बार फिर ध्यान आकर्षित करती है। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में घने जंगल हैं, जिनमें भालू, तेंदुआ और अन्य वन्यजीवों का बसेरा है। पिछले कुछ समय से जंगलों में भोजन और पानी की कमी या अन्य कारणों से वन्यजीवों का गांवों की तरफ रुख करने का सिलसिला देखा जा रहा है। कटरा गांव (टूरी झिरिया) जैसे जंगल से सटे इलाकों में किसानों और ग्रामीणों को अपनी बाड़ियों और खेतों में जाने के दौरान ऐसे खतरों का सामना करना पड़ता है। विशेषकर सुबह और शाम के समय जब दृश्यता कम होती है, तब जंगली जानवरों के आमने-सामने आने का खतरा अधिक रहता है।

इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों में इस बात का डर बना हुआ है कि कहीं भालू दोबारा गांव में प्रवेश न कर जाए। लोगों ने अपने बच्चों और बुजुर्गों को घरों के अंदर ही रहने की हिदायत दी है। बाड़ियों और खेतों में अकेले जाने से ग्रामीण अब कतरा रहे हैं। वन विभाग से ग्रामीणों की अपेक्षा है कि वे इस मामले में तत्काल संज्ञान लें।

वन विभाग के अधिकारियों को इस घटना की सूचना दिए जाने की संभावना है। आमतौर पर ऐसी घटनाओं के बाद वन विभाग की टीम प्रभावित गांव का दौरा करती है और भालू या अन्य वन्यजीवों की लोकेशन ट्रैक करने का प्रयास करती है, ताकि उन्हें वापस जंगल की ओर खदेड़ा जा सके और ग्रामीणों को सुरक्षित किया जा सके। हालांकि, इस विशिष्ट घटना में वन विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

वन्यजीव विशेषज्ञ और प्रशासन हमेशा यह सलाह देते हैं कि जंगल से सटे गांवों के निवासियों को अकेले जंगल या बाड़ियों की ओर जाने से बचना चाहिए। यदि जाना अनिवार्य हो, तो समूह में जाना चाहिए और अपने साथ शोर मचाने वाले उपकरण रखने चाहिए, जिससे वन्यजीवों को दूर से ही मनुष्यों की उपस्थिति का आभास हो जाए और वे रास्ता बदल लें। इसके अलावा, किसी भी वन्यजीव के हमले की स्थिति में तुरंत वन विभाग और पुलिस को सूचित करना चाहिए।

मरवाही के कटरा गांव (टूरी झिरिया) में हुई यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के लिए एक चेतावनी है कि जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए और अधिक पुख्ता कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। फिलहाल, पूरे गांव की नजरें अस्पताल में भर्ती 50 वर्षीय लीलावती के स्वास्थ्य लाभ पर टिकी हुई हैं, और सभी उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।