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Fri, Oct 9, 2026Updated 4:39 PM IST
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मुजफ्फरपुर जमीन म्यूटेशन घोटाला: मुसहरी के निलंबित CO महेंद्र कुमार शुक्ला गिरफ्तार, भू-माफिया और बेलसंड विधायक अमित रानू से साठगांठ के आरोप

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सामने आए बहुचर्चित जमीन म्यूटेशन घोटाले के मामले में एक बड़ी कार्रवाई हुई है। मुसहरी अंचल के निलंबित अंचलाधिकारी (CO) महेंद्र कुमार शुक्ला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी की पुष्टि मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेस कुमार मिश्रा ने की है। यह मामला अवैध जमीन सौदों और सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी से जुड़ा हुआ है, जिसमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, निलंबित अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला की गिरफ्तारी इस जमीन घोटाले की जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मुसहरी अंचल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीनों के अवैध म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) किए। इस पूरे प्रकरण में उनके संबंध स्थानीय भू-माफियाओं और बेलसंड के विधायक अमित रानू से होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इन सभी की आपसी साठगांठ से जमीनों की खरीद-फरोख्त और सरकारी अभिलेखों में फर्जीवाड़े का यह बड़ा खेल अंजाम दिया गया।

इस मामले में जिला प्रशासन की भूमिका भी अत्यंत सक्रिय रही है। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) द्वारा तैयार की गई एक विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर ही पहले महेंद्र कुमार शुक्ला को उनके पद से निलंबित किया गया था। डीएम की रिपोर्ट में अंचलाधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए थे और स्पष्ट रूप से कहा गया था कि राजस्व विभाग के नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से जमीन म्यूटेशन का काम किया गया। निलंबन के बाद अब उनकी सीधी गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि प्रशासन इस घोटाले की गहराई तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बता दें कि बिहार में जमीन म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज का कार्य अंचलाधिकारी (CO) की देखरेख में होता है। अंचलाधिकारी राजस्व विभाग का एक अहम अधिकारी होता है, जिसकी जिम्मेदारी भूमि संबंधी रिकॉर्ड को अपडेट रखना और वैध दस्तावेजों के आधार पर ही जमीन के स्वामित्व में बदलाव दर्ज करना होती है। जब इस स्तर पर बैठे अधिकारी ही भू-माफियाओं के साथ मिलकर अवैध धंधे में शामिल हो जाते हैं, तो आम नागरिकों की जमीनें हड़पने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने जैसे मामले सामने आते हैं। मुसहरी अंचल में हुए इस घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।

इस घोटाले में बेलसंड विधायक अमित रानू का नाम आना इसे एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामला बना देता है। आरोपों के मुताबिक, विधायक और निलंबित सीओ के बीच गहरी साठगांठ थी, जिसका इस्तेमाल जमीनों के अवैध लेन-देन को अंजाम देने के लिए किया गया। हालांकि, जांच एजेंसियों के लिए यह चुनौती होगी कि वे इस बात के पुख्ता सबूत जुटाएं कि इस फर्जीवाड़े में किस-किस की क्या भूमिका थी और कितनी जमीनों का अवैध म्यूटेशन किया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेस कुमार मिश्रा ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए यह संकेत दिया है कि पुलिस इस मामले में पूरी तत्परता से काम कर रही है। एसएसपी के अनुसार, निलंबित सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला से पूछताछ की जाएगी ताकि इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों और भू-माफियाओं के नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि इस अवैध कारोबार से कितनी काली कमाई हुई और उसका पैसा किन-किन रास्तों से भेजा गया।

मुजफ्फरपुर के मुसहरी अंचल में हुए इस जमीन घोटाले ने स्थानीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी हैं। आम लोगों और किसानों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि कैसे कुछ प्रभावशाली लोग और अधिकारी मिलकर गरीबों की जमीनों पर कब्जा करने या अवैध तरीके से सरकारी रिकॉर्ड बदलने का काम कर रहे थे। डीएम की रिपोर्ट पर पहले निलंबन और फिर पुलिस की इस ताजा गिरफ्तारी से पीड़ित लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

आने वाले दिनों में पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ सकता है। यदि जांच में बेलसंड विधायक अमित रानू या किसी अन्य जनप्रतिनिधि की संलिप्तता के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, निलंबित अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जैसे-जैसे जांच में नए तथ्य सामने आएंगे, उनसे पाठकों को अवगत कराया जाएगा। यह घटना प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।