Sat, 10 Oct 20268:22 AM
Sat, Oct 10, 2026Updated 8:22 AM IST
होम › बिहार

मुजफ्फरपुर: फर्जी केवाला से जमीन की दाखिल-खारिज मामले में निलंबित CO और RO गिरफ्तार, कोर्ट में पेशी से पहले सीओ की बिगड़ी तबीयत

WhatsAppFacebookX

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में भूमि घोटाले के एक बड़े मामले में पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए मुशहरी अंचल के निलंबित अंचल अधिकारी (सीओ) महेंद्र शुक्ला और राजस्व अधिकारी (आरओ) करुण कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों अधिकारियों पर भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत कर फर्जी केवाला के आधार पर जमीन की दाखिल-खारिज कराने का गंभीर आरोप है। इस पूरे मामले ने जिले के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है।

बताया जा रहा है कि मुशहरी अंचल क्षेत्र में लंबे समय से भू-माफिया सक्रिय थे, जो सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर आम लोगों की जमीनों पर कब्जा करने या उन्हें अवैध रूप से बेचने का काम कर रहे थे। इस धंधे में अंचल कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद मामला प्रकाश में आया। जांच में यह बात सामने आई कि निलंबित सीओ महेंद्र शुक्ला और आरओ करुण कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी केवाला तैयार कराए। इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन्होंने जमीन की दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को अंजाम दिया, जिससे असली भूस्वामियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

दाखिल-खारिज का काम राजस्व विभाग का अत्यंत संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। किसी भी जमीन के मालिकाना हक में बदलाव या सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने और हटाने की पूरी प्रक्रिया अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी की निगरानी में होती है। जब इसी व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे अधिकारी भू-माफियाओं से हाथ मिला लें, तो आम जनता के लिए न्याय पाना बेहद कठिन हो जाता है। मुशहरी अंचल में हुए इस घोटाले में ठीक यही स्थिति देखने को मिली। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से फर्जी कागजातों को वैधता प्रदान कर दी।

इस मामले में जब शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचीं और जांच शुरू हुई, तो सीओ महेंद्र शुक्ला और आरओ करुण कुमार की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए दोनों को उनके पदों से निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, निलंबन के बाद भी जब उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी, तो पीड़ित पक्ष की ओर से लगातार मांग की जा रही थी कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शुक्रवार को पुलिस ने आखिरकार दोनों निलंबित अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद पीड़ितों को कुछ राहत मिली है।

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपी अधिकारियों को न्यायालय में पेश किया जाना था। लेकिन, कोर्ट में पेशी से ठीक पहले अचानक निलंबित सीओ महेंद्र शुक्ला की तबीयत बिगड़ गई। उनकी स्वास्थ्य स्थिति खराब होने की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। बताया जा रहा है कि सीओ महेंद्र शुक्ला लगभग तीन घंटे तक अस्पताल में भर्ती रहे, जहां उनका चिकित्सकीय परीक्षण और उपचार किया गया। डॉक्टरों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जांच पूरी किए जाने और उनकी हालत में सुधार आने के बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई। इसके बाद पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया।

बिहार में भूमि विवाद और राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार कोई नई समस्या नहीं है। राज्य सरकार ने बीते कुछ वर्षों में भू-माफियाओं पर नकेल कसने और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दाखिल-खारिज की व्यवस्था लागू की गई है ताकि बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाई जा सके। इसके बावजूद मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल जैसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि सिस्टम में अभी भी खामियां मौजूद हैं, जिनका फायदा भू-माफिया और भ्रष्ट कर्मचारी मिलकर उठाते हैं।

वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दोनों अधिकारियों ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर और कितनी जमीनों की फर्जी दाखिल-खारिज की है। आशंका जताई जा रही है कि मुशहरी अंचल में यह घोटाला और भी बड़ा हो सकता है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल, निलंबित सीओ महेंद्र शुक्ला और आरओ करुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में भी खलबली मची हुई है। पुलिस ने इस मामले में आगे की विस्तृत जांच जारी रखी है और सभी पहलुओं पर बारीकी से काम किया जा रहा है।