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Wed, Oct 14, 2026Updated 6:22 PM IST
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मुखेड को सूखाग्रस्त सूची में शामिल करने के बाद भी किसानों की लड़ाई जारी, अब मुआवजे और फसल बीमा का इंतजार

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लोकेशन: मुखेड, नांदेड, महाराष्ट्र
मुखेड तहसील रिपोर्टर: मनोहर भाऊ यरपुरवाड

मुखेड। मुखेड तालुका को सूखाग्रस्त तालुकों की सूची में शामिल किए जाने के बाद किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि, अब प्रभावित किसानों की नजर सरकारी मुआवजे और फसल बीमा की सहायता पर टिकी है। किसानों की मांग है कि खेती में हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें नियमानुसार जल्द आर्थिक सहायता दी जाए।

इस मुद्दे को लेकर मुखेड में किसानों की समस्याओं को उठाने के लिए कई आंदोलन किए गए। इन प्रदर्शनों के जरिए किसानों की मांगों को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने को आंदोलन से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन किसानों का कहना है कि वास्तविक राहत मिलने के बाद ही उनकी समस्या का समाधान होगा।

किसानों के मुद्दे पर हुए कई आंदोलन

मुखेड तालुका में किसानों की समस्याओं को लेकर दिलीप पाटील बेटमोगरेकर और शिवशंकर पाटील कलंबरकर की ओर से रास्ता रोको आंदोलन और श्रृंखलाबद्ध भूख हड़ताल की गई। वहीं, एडवोकेट गोविंदराव डुमणे ने ‘बोंब मारो’ आंदोलन के माध्यम से अपनी बात रखी, जबकि सचिन पाटील ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया।

इन आंदोलनों के जरिए किसानों की फसलों को हुए नुकसान और राहत की जरूरत का मुद्दा उठाया गया। आंदोलन से जुड़े लोगों का मानना है कि किसानों की समस्याओं पर लगातार आवाज उठाना जरूरी है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

89 प्रतिशत बारिश के आंकड़े पर उठे सवाल

मुखेड को सूखाग्रस्त सूची से बाहर रखे जाने के संदर्भ में विधायक की ओर से प्रस्तुत 89 प्रतिशत बारिश के आंकड़े को लेकर सवाल उठाए गए थे। किसानों का कहना है कि केवल बारिश के औसत आंकड़ों से खेती की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।

उनके मुताबिक, मुखेड तालुका की पहाड़ी और पथरीली भौगोलिक परिस्थितियां, हल्की एवं मुरमाड़ जमीन और सीमित उत्पादन क्षमता भी फसलों पर असर डाल सकती हैं। ऐसे में बारिश के आंकड़ों के साथ खेतों की वास्तविक स्थिति और फसल उत्पादन को भी ध्यान में रखकर नुकसान का आकलन किया जाना चाहिए।

सूखाग्रस्त सूची में नाम आने के बाद राहत की उम्मीद

मुखेड को सूखाग्रस्त तालुकों की सूची में शामिल किए जाने के फैसले को किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, प्रभावित किसानों को अब यह इंतजार है कि सरकारी सहायता की प्रक्रिया कब पूरी होगी और उन्हें कितना लाभ मिलेगा।

किसानों का कहना है कि राहत संबंधी निर्णय का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पात्र किसानों तक सहायता पहुंचेगी। इसके लिए प्रशासन से नुकसान का उचित आकलन करने और पात्रता के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जा रही है।

अब मुआवजे और फसल बीमा पर नजर

सूखाग्रस्त सूची में शामिल होने के बाद किसानों की प्रमुख मांग सरकारी मुआवजे और फसल बीमा का लाभ दिलाने की है। किसानों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग उनकी स्थिति का आकलन कर नियमानुसार राहत उपलब्ध कराएंगे।

इस मुद्दे पर सक्रिय लोगों का कहना है कि अब आपसी श्रेय लेने के बजाय किसानों को आर्थिक सहायता दिलाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिलना ही इस पूरे प्रयास का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम होगा।

मुखेड के किसानों की निगाहें अब शासन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। किसानों को वास्तविक राहत कब और किस रूप में मिलेगी, यह संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

मुखेड, जिला नांदेड, महाराष्ट्र से तहसील रिपोर्टर मनोहर भाऊ यरपुरवाड की रिपोर्ट।