मुंगेर: पति के बाद पत्नी की भी मौत से दो मासूम हुए अनाथ, सीएम सम्राट चौधरी की पत्नी ममता चौधरी ने रामपुर पहुंचकर दिया ढांढस

बिहार के मुंगेर जिले से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। जिले के संग्रामपुर प्रखंड स्थित रामपुर गांव में एक परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि दो मासूम बच्चे देखते ही देखते अनाथ हो गए। कुछ समय पहले इस परिवार में पिता की मौत हुई थी और अब बुधवार को मां आस्था कुमारी ने भी जमुई सदर अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस दुखद खबर के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी ममता चौधरी पीड़ित परिवार से मिलने और उन्हें सांत्वना देने के लिए सीधे रामपुर गांव पहुंचीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंगेर जिले के संग्रामपुर प्रखंड के रामपुर गांव की रहने वाली आस्था कुमारी काफी समय से बीमार चल रही थीं। उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा उनका उपचार किया जा रहा था, लेकिन बुधवार को इलाज के दौरान ही आस्था कुमारी ने अंतिम सांस ले ली। उनकी मौत की खबर जैसे ही रामपुर गांव तक पहुंची, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इस घटना ने उस परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली है, क्योंकि आस्था कुमारी के पति का पहले ही निधन हो चुका था। अब दोनों अभिभावकों के चले जाने से उनके दो छोटे-छोटे मासूम बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं। इन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के बाद गांव वालों में गहरी चिंता व्याप्त है।
इस दर्दनाक घटना की सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार की ओर से तत्परता दिखाई गई। बुधवार को ही बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी ममता चौधरी स्वयं मुंगेर जिले के संग्रामपुर प्रखंड के रामपुर गांव पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित परिवार के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की और उन्हें इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया। ममता चौधरी ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और कहा कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं। उन्होंने अनाथ हुए दोनों मासूम बच्चों के प्रति विशेष सहानुभूति जताई और उनके भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री की पत्नी का इस तरह सीधे गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मिलना और उन्हें सांत्वना देना ग्रामीणों के लिए एक बड़ी राहत का विषय रहा।
ममता चौधरी के रामपुर गांव पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी व्यथा उनके समक्ष रखी। पीड़ित परिवार के सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा कि परिवार के मुखिया यानी पिता की मौत पहले ही हो चुकी है और अब मां भी इस दुनिया को छोड़कर चली गई है। ऐसे में इन दो मासूम बच्चों की देखभाल और उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी अब बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। परिजनों ने स्पष्ट रूप से यह मांग रखी कि सरकार इन बच्चों की पूरी जिम्मेदारी ले। उन्होंने कहा कि जब तक ये दोनों बच्चे बालिग नहीं हो जाते, तब तक सरकार को इनके भरण-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी खर्चों को वहन करना चाहिए। परिजनों ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे इन बच्चों का उचित पालन-पोषण और शिक्षा सुनिश्चित कर सकें, इसलिए सरकारी मदद इनके भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों ने भी इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रामपुर गांव में इस प्रकार की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। दो छोटे बच्चों का एक साथ माता और पिता दोनों को खो देना किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। गांव के लोगों ने भी प्रशासन और सरकार से अपील की है कि इन बच्चों के लिए कोई ठोस व्यवस्था की जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। ग्रामीणों ने ममता चौधरी के आगमन को सकारात्मक बताया और उम्मीद जताई कि उनके माध्यम से मुख्यमंत्री तक इस परिवार की सही स्थिति पहुंचेगी और सरकार की ओर से त्वरित कार्रवाई होगी।
बता दें कि बिहार में अनाथ या असहाय बच्चों की देखभाल के लिए सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। ऐसे मामलों में जहां बच्चे अपने दोनों अभिभावकों को खो देते हैं, वहां जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति की भूमिका अहम हो जाती है। हालांकि, परिजनों की यह मांग कि बच्चों के बालिग होने तक सरकार उनका पूरा खर्चा उठाए, यह दर्शाता है कि परिवार को सरकारी सहायता की कितनी सख्त जरूरत है। फिलहाल, ममता चौधरी के दौरे के बाद यह माना जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में आगे की कार्रवाई तेजी से की जाएगी।
इस बीच, आस्था कुमारी के निधन के बाद गांव में शोक का माहौल बना हुआ है। उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में पूरी की गईं, लेकिन हर किसी की नजर उन दो मासूम बच्चों पर टिकी है, जो अभी इस बात को पूरी तरह समझ भी नहीं पा रहे हैं कि उन्होंने क्या खो दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी ममता चौधरी ने बच्चों को गोद में लेकर उन्हें सांत्वना दी और आश्वस्त किया कि उनके साथ खड़े रहने वाले लोग मौजूद हैं। अब देखना यह होगा कि परिजनों की मांग पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन किस तरह से कार्यवाही करता है और इन अनाथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

