Nautapa Heatwave Risks; Extreme Heat Summer Routine

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5 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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मौसम विभाग के मुताबिक, भारत के 50 से ज्यादा शहर दुनिया के सबसे गर्म शहर बने हुए हैं। आज यानी 25 मई से नौतपा शुरू हो रहा है। अनुमान है कि इन 9 दिनों में सूरज की तपिश और बढ़ सकती है, जिससे हार्ट से लेकर ब्रेन तक दबाव बढ़ सकता है।

इसलिए नौतपा में डेली रूटीन और खानपान में छोटे-छोटे बदलाव करने जरूरी हैं।

‘जरूरत की खबर’ में आज नौतपा के दौरान शरीर पर होने वाले बदलावों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • नौतपा में डॉक्टर सावधानी बरतने की सलाह क्यों देते हैं?
  • इस दौरान सही और सुरक्षित रूटीन कैसा होता है?

एक्सपर्ट: डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- नौतपा का शरीर पर क्या असर होता है?

जवाब- नौतपा के दौरान टेम्परेचर 40-45°C टेम्परेचर तक पहुंच सकता है, जिससे शरीर का थर्मोरेगुलेशन सिस्टम (टेम्परेचर कंट्रोल करने की प्रक्रिया) दबाव में आ जाता है। इसका असर अलग-अलग अंगों पर इस तरह पड़ता है-

हार्ट

  • हार्ट टेम्परेचर कंट्रोल के लिए स्किन की तरफ ज्यादा ब्लड भेजता है।
  • इससे हार्ट को ज्यादा तेजी से पंप करना पड़ता है। इससे हार्ट रेट बढ़ जाती है।
  • ज्यादा पसीने से पानी और मिनरल्स की कमी हो सकती है, बीपी लो हो सकता है।

लिवर

  • डिहाइड्रेशन के कारण लिवर तक ब्लड सप्लाई थोड़ी कम हो सकती है।
  • इससे मेटाबॉलिज्म और डिटॉक्सिफिकेशन (टॉक्सिन्स हटाने की प्रक्रिया) धीमी हो जाती है।

किडनी

  • पसीने से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो जाते हैं।
  • किडनी पानी बचाने के लिए यूरिन कम बनाती है।
  • लंबे समय तक डिहाइड्रेशन से एक्यूट किडनी इंजरी या स्टोन का रिस्क हो सकता है।

ब्रेन

  • बॉडी टेम्परेचर 40°C के आसपास पहुंचने पर स्ट्रोक का रिस्क बढ़ता है।
  • इससे नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। चक्कर, कन्फ्यूजन और बेहोशी हो सकती है।
  • इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस से ब्रेन की फंक्शनिंग प्रभावित हो सकती है।

डाइजेशन

  • ब्लड फ्लो स्किन की ओर ज्यादा होने पर डाइजेस्टिव सिस्टम को कम ब्लड मिलता है।
  • इससे डाइजेशन स्लो हो जाता है।
  • हाई टेम्परेचर में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- डॉक्टर नौतपा में डेली रूटीन बदलने की सलाह क्यों देते हैं?

जवाब- ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय शरीर का थर्मोरेगुलेशन सिस्टम सामान्य से ज्यादा दबाव में होता है। अगर वही पुराना रूटीन रखा जाए तो शरीर पर जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस पड़ता है।

सवाल- नौतपा के दौरान डेली रूटीन कैसा होना चाहिए?

जवाब- शरीर को तेज गर्मी और लू से बचाने के लिए नौतपा के दौरान लाइफस्टाइल ऐसी रखें, जो ठंडक, हाइड्रेशन और हल्की डाइट पर बेस्ड हो। कंप्लीट शेड्यूल ग्राफिक में देखिए-

सवाल- दिन में किस समय सबसे ज्यादा रिस्क होता है, उस दौरान क्या सावधानियां जरूरी हैं?

जवाब- नौतपा में सबसे ज्यादा रिस्क दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक होता है।

  • इस वक्त धरती पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं।
  • इसी वक्त टेम्परेचर और ह्यूमिडिटी दोनों सबसे ज्यादा होते हैं।
  • बॉडी का कूलिंग सिस्टम उतना प्रभावी नहीं रहता।
  • इस समय शरीर में क्या होता है?
  • शरीर का तापमान बढ़ने लगता है।
  • पसीने के कारण पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम होते हैं।
  • बॉडी कूलिंग के लिए ब्लड स्किन की ओर ज्यादा जाता है। इसलिए इंटरनल ऑर्गन्स को कम सपोर्ट मिलता है।

इस वक्त क्या सावधानियां जरूरी हैं-

1. धूप से बचाव

  • 12-4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
  • अगर निकलना जरूरी हो तो छाता, टोपी या गमछा इस्तेमाल करें।

2. हाइड्रेशन बनाए रखें

  • हर 20-30 मिनट में पानी पिएं।
  • ORS, नींबू पानी या नमक-शक्कर का घोल लें।

3. सही कपड़े

  • हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें।
  • कॉटन फैब्रिक बेहतर रहता है, पसीना सोखता है।

4. भारी काम से बचें

  • एक्सरसाइज या मेहनत वाले काम सुबह या शाम में करें।
  • दोपहर में करने से बॉडी हीट तेजी से बढ़ती है।

5. हल्का खाना

  • तला-भुना और हैवी फूड कम लें।
  • ज्यादा पानी वाले फल (तरबूज, खीरा) फायदेमंद हैं।

6. शरीर के संकेत पहचानें

  • चक्कर, कमजोरी, सिरदर्द, ज्यादा पसीना या उल्टी।
  • ये हीट स्ट्रेस के शुरुआती संकेत हैं।
  • ऐसा महसूस हो तो तुरंत ठंडी जगह जाएं और पानी पिएं।
  • कोई भी असहजता होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- नौतपा के दौरान कितने गैप पर पानी पीना चाहिए?

जवाब- नौतपा में शरीर से पसीने के जरिए लगातार पानी निकलता रहता है, इसलिए प्यास लगने का इंतजार न करें।

  • सही गैप कितना होना चाहिए?
  • सामान्य स्थिति में हर 20-30 मिनट में थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं।
  • बाहर धूप होने पर हर 15-20 मिनट में पानी पिएं।
  • एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय छोटे-छोटे घूंट बेहतर हैं।

सवाल- नौतपा के दौरान डाइट क्या होनी चाहिए?

जवाब- नौतपा में शरीर का लक्ष्य होता है, तापमान कम रखना। हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखना। इसलिए डाइट ऐसी होनी चाहिए, जो हल्की, हाइड्रेटिंग और आसानी से पच जाए। ग्राफिक में डाइट प्लान देखिए-

सवाल- किन लोगों को इन 9 दिनों में ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

जवाब- कुछ लोगों के शरीर की हीट सहन करने की क्षमता कम होती है, इसलिए उन्हें डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है। ग्राफिक में देखिए, किन्हें ज्यादा रिस्क है-

सवाल- नौतपा के दौरान लापरवाही बरतने से क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब- इस दौरान सावधानी न बरतने पर शरीर का हीट और फ्लूइड बैलेंस बिगड़ जाता है, जिससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। जैसेकि-

1. हीट एग्जॉशन

लक्षण: ज्यादा पसीना, कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द।

  • शरीर में मिनरल्स और पानी की कमी हो जाती है।
  • समय पर ध्यान न दिया तो समस्या बढ़ सकती है।

2. हीट स्ट्रोक

लक्षण: कन्फ्यूजन, बेहोशी।

  • शरीर का तापमान 40°C या उससे ज्यादा हो जाता है।
  • पसीना रुक सकता है, स्किन ड्राई हो जाती है। यह मेडिकल इमरजेंसी है।

3. डिहाइड्रेशन

लक्षण: मुंह सूखना, पेशाब कम होना, थकान।

  • शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
  • लंबे समय तक रहने पर किडनी डैमेज हो सकती है।

4. इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

लक्षण: मसल्स में ऐंठन, कमजोरी

  • सोडियम, पोटेशियम की कमी हाे जाती है।
  • हार्ट और ब्रेन की फंक्शनिंग पर असर पड़ता है।

5. ब्रेन पर असर

लक्षण: चक्कर, ध्यान में कमी, कन्फ्यूजन।

  • गंभीर स्थिति में बेहोशी या दौरे पड़ सकते हैं।

6. हार्ट और किडनी पर दबाव

लक्षण: बेहोशी, पेशाब गाढ़ा पीला होना, रुकना।

  • डिहाइड्रेशन से किडनी डैमेज का रिस्क होता है।
  • हार्ट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

7. पाचन संबंधी समस्याएं

लक्षण: भूख कम लगना, कमजोरी

  • फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त हो सकता है।

सवाल- अगर नौतपा में लू लग जाए तो तुरंत क्या करें?

जवाब- लू एक इमरजेंसी हो सकती है। इसलिए तुरंत शरीर को ठंडा करना और हाइड्रेशन देना जरूरी है।

तुरंत क्या करें?

  • मरीज को तुरंत छांव या ठंडी जगह (AC/फैन) पर लिटाएं।
  • टाइट कपड़े ढीले करें।
  • ठंडे पानी की पट्टी/गीला कपड़ा सिर, गर्दन और बगल पर रखें।
  • अगर होश में है तो ठंडा पानी, ORS/नींबू पानी और नमक का घोल धीरे-धीरे पिलाएं।
  • बेहोश व्यक्ति को कुछ भी मुंह से न दें। बहुत बर्फीला पानी न डालें।
  • अगर बेहोशी या कन्फ्यूजन हो तो डॉक्टर के पास जाएं।

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