राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अदालत ने म्यांमार के उग्रवादियों को हथियार और ड्रोन ऑपरेशन की प्रशिक्षण देने के आरोप में जेल में बंद एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को अपने-अपने देश जाने की इजाजत दी है। इन विदेशी नागरिकों को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था और इन पर यूनियन अफ्रीकन पीपुल्स एंटी-कॉरपरेशन एक्ट (UAPA) की धारा 18 और भारतीय दंड संहिता (BNS) की कुछ धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने कहा कि विदेशी नागरिकों को परिवार से मिलने देना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जमानती बॉन्ड भरवाना अनिवार्य करते हुए एक महीने के भीतर भारत लौटकर अदालत को जानकारी देने की शर्त रखी।
जांच एजेंसी NIA के मुताबिक, ये सभी आरोपी भारत से मलेशिया भागने की योजना बना रहे थे। इससे पहले कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से इनकी गिरफ्तारी हुई थी। अदालत ने जमानत पर रिहार के समय यह निर्धारित किया कि आरोपियों को तत्काल अदालत में उपस्थित न होने की स्थिति में भी जांच जारी रहेगी और आवश्यक अंडरटेकिंग ली जा सकती है। NIA ने अदालत को बताया कि फिलहाल जांच में आरोपियों की तत्काल मौजूदगी जरूरी नहीं है।
इस मामले में गिरफ्तार हुए आरोपियों में अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के बाल्टीमर निवासी मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और यूक्रेन के हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम उर्फ मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। एजेंसी के आरोप के अनुसार, ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और गुवाहाटी पहुंचने के बाद मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में घुस गए। जांच में यह भी सामने आया है कि ये लोग पहले भी बार-बार इस क्षेत्र में आ चुके हैं और म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार तथा ड्रोन ऑपरेशन की प्रशिक्षण देने से जुड़े थे, जो भारत की सुरक्षा के लिए एक खतरा साबित हो सकती थीं।
मुख्य आरोपी मैथ्यू एरॉन वैनडाइक की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी मिली है कि वह एक भाड़े का सिपाही, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, सुरक्षा विश्लेषक और ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI)’ नामक संस्था के संस्थापक हैं। उन्होंने वॉर कॉर्सपोंडेंट और बिजनेसमैन के रूप में भी कार्य किया है। वह पहली बार 2011 में लीबिया के गृह युद्ध के दौरान चर्चा में आए, जब वे मुअम्मर गद्दाफी के शासन के खिलाफ विद्रोही बलों में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने इराक में ISIS के खिलाफ लड़ाई में भाग लिया, सीरिया में बगावत में सहायता की और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेन में लोगों को प्रशिक्षण दिया। एजेंसी का मानना है कि वैनडाइक म्यांमार से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे और ये गतिविधियां भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थीं। सूत्रों के अनुसार, वैनडाइक इस मामले के मास्टरमाइंड माने जाते हैं।
केस में राजनीतिक आयाम सामने आए हैं, क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि अमेरिकी दबाव के कारण अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को राहत मिली और सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों से समझौता किया। कांग्रेस ने यह भी पूछा कि इन विदेशी नागरिकों को भारत का वीजा कैसे मिला और वे भारत के रास्ते म्यांमार कैसे पहुंचे। इसके साथ ही अमेरिकी नागरिक वैनडाइक पर इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगे कुछ अपराधों को हटाने की अर्जी भी अदालत द्वारा मंजूर की गई है।
जांच प्रक्रिया की दिशा में, NIA ने अदालत को बताया कि चार्जशीट के अनुसार UAPA के तहत जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन ड्रोन, बड़ी संख्या में डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री की जांच अभी जारी है। वर्तमान में UAPA से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए और समय की आवश्यकता है और फिलहाल UAPA के आरोप चार्जशीट में शामिल नहीं किए गए हैं। NIA ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि आरोपियों से जरूरी अंडरटेकिंग ली जा सकती है ताकि जांच पूरी होने तक उनकी अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
इस पूरे मामले में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि विदेशी नागरिकों को परिवार से मिलने का अवसर देना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस शर्त पर कि वे निर्धारित समय पर वापस आकर अदालत को रिपोर्ट करेंगे। जमानती बॉन्ड भरवाने के बाद ही रिहार की अनुमति दी गई है। मामले की जटिलता इस कारण बढ़ जाती है कि आरोपियों को म्यांमार के उग्रवादी समूहों से जोड़ने वाले सबूत और उनके द्वारा किए गए ड्रोन प्रशिक्षण से जुड़ी जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है।
यह मामला भारतीय सीमा सुरक्षा और विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर नजर रखने की चुनौतियों को दर्शाता है, खासकर जब विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा का उपयोग करके संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त होते हैं। NIA की जांच जारी है और अगले चरण में ड्रोन तकनीक, डिजिटल उपकरणों और अन्य सामग्री की जांच पूरी होने पर अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना है।


















